Gold-Silver ETF में लगाते हैं पैसे? बदल गई निवेशकों के लिए ये तीन चीजें

ETF Rules Changed: अगर आप किसी स्टॉक या सोने-चांदी के ईटीएफ में पैसे लगाते हैं, आज से नियमों में तीन बड़े बदलावों के बारे में समझ लें। नए नियमों के तहत अब ईटीएफ का प्राइस बैंड नए तरीके से तय होगा। जानिए क्या हुए हैं बदलाव और कौन-कौन से नियम पहले की ही तरह हैं

अपडेटेड Sep 07, 2026 पर 12:18 PM
  • Follow Us On Google
  • Add as a Preferred Source on Google
ETF Rules Changed: ईटीएफ से जुड़े नियमों में बदलाव के बाद अब इसके भाव अंडरलाइंग एसेट्स यानी जिन एसेट्स को ईटीएफ ट्रैक कर रहा है, उनके हिसाब से फटाफट बदलेंगे। (File Photo- Pexels)

ETF Rules Changed: ईटीएफ यानी एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स से जुड़े नियम आज 7 सितंबर से बदल गए हैं जिसके तहत अब इनका प्राइस बैंड नए तरीके से तय होगा। सोने और चांदी के ईटीएफ के लिए तो और भी अहम बदलाव हुए हैं। नए नियमों से अब मार्केट की तेज उठा-पटक में भी ईटीएफ का प्राइस और अंडरलाइंग वैल्यू में बहुत फर्क नहीं रहेगा। गोल्ड-सिल्वर ईटीएफ में प्री-ओपन ऑक्शन होगा और ओवरनाइट वैश्विक मार्केट में सोने-चांदी की कीमतों में तेज उठा-पटक के बाद प्राइस बैंड को बढ़ाने के लिए अधिक फ्लेक्सिबिलिटी मिलेगी।

नए नियमों का क्या होगा असर

ईटीएफ से जुड़े नियमों में बदलाव के बाद अब इसके भाव अंडरलाइंग एसेट्स यानी जिन एसेट्स को ईटीएफ ट्रैक कर रहा है, उनके हिसाब से फटाफट बदलेंगे। इससे गोल्ड और सिल्वर ईटीएफ की ओपनिंग प्राइस भी अधिक व्यवस्थित हो सकती है और करीद-बिक्री के अलग-अलग ऑर्डर्स का असर कम हो सकता है। हालांकि नया सिस्टम एनएवी के मुकाबले प्रीमियम या डिस्काउंट को पूरी तरह खत्म नहीं करेगा, खासतौर से कम लिक्विडिटी वाले ईटीएफ के मामले में यानी कि निवेशकों को अभी भी iNAV चेक करना होगा और ट्रे़डिंग के समय लिमिट ऑर्डर्स का इस्तेमाल जारी रखना होगा।


क्या थी खामी

हर ईटीएफ के साथ दो नंबर जुड़े होते हैं- एनएवी और मार्केट प्राइस। इसमें से एनएवी फंड के पास मौजूद सिक्योरिटीज की प्रति यूनिट कीमत है तो मार्केट प्राइस वह भाव है, जिस पर बायर्स और सेलर्स के बीच बात बनी है। आदर्श रूप से दोनों कीमतों में अधिक फर्म नहीं होना चाहिए लेकिन पहले के नियमों की वजह से इनमें अधिक अंतर आने की गुंजाइश रहती थी।

एक्सचेंज हर सुबह हर ईटीएफ के लिए एक बेस प्राइस तय करते हैं। यह एक रेफरेंस पॉइंट होता है, जिससे दिन के सर्किट लिमिट को तय किया जाता है। हालांकि ओपनिंग प्राइस समेत मार्केट प्राइस अभी भी बायर्स और सेलर्स ही तय कर सकते हैं लेकिन बेस प्राइस दो ट्रेडिंग दिन पहले का ईटीएफ का एनएवी होता था, जिसे T-2 NAV कहा जाता है, और अधिकतर ईटीएफ इसके दोनों तरफ 20% तक मूव कर सकता था।

इसकी एक खामी ऐसे समझें, शार्प फाइनेंशियल्स के फाउंडर बालकृष्ण बगड़िया के मुताबिक अगर सोमवार शाम किसी ईटीएफ का एनएवी ₹100 है और बुधवार को भी ट्रेडिंग रेंज उसी ₹100 के आस-पास ही तय होती है तो मंगलवार को अंडरलाइंग मार्केट में तेजी आने की स्थिति में फंड की फेयर वैल्यू अगर ₹125 हो गई लेकिन प्राइस बैंड के चलते ₹120 पर ही ट्रेडिंग रुक जाएगी। उनका कहना है कि यह नियम निवेशकों को भारी उतार-चढ़ाव से बचाने के लिए बनाया गया है लेकिन इसके चलते ईटीएफ अपनी सही वैल्यू तक नहीं पहुंच पाता। इसके अलावा बालकृष्ण के मुताबिक एक खामी ये भी थी कि 20% का बैंड सभी प्रकार के जैसे कि गोल्ड, स्टॉक या ओवरनाइट बॉन्ड के ईटीएफ में लागू होता था, जबकि ये सभी व्यवहार में अलग-अलग हैं।

अब क्या बदला?

15 जून 2026 के अपने सर्कुलर में सेबी ने तीन बदलाव पेश किए। पहले ये नियम 1 सितंबर से ही लागू होने वाले थे। हालांकि 28 अगस्त के एक सर्कुलर के जरिए सेबी ने इसे बढ़ाकर 7 सितंबर कर दिया। इससे एक्सचेंज को अपने सिस्टम को बेहतर ढंग से लागू करने के लिए एक हफ्ते का अतिरिक्त समय मिल गया, जबकि बाकी सब कुछ वैसा ही रहा।

अब बदलाव की बात करें तो सबसे पहले, बेस प्राइस। अब यह पिछले दिन की क्लोजिंग प्राइस होगी, जिसे पिछले सेशन के आखिरी 30 मिनट में ईटीएफ के ट्रेड्स के VWAP (वॉल्यूम-वेटेड एवरेज प्राइस) के तौर पर कैलकुलेट किया जाएगा यानी कि नई ट्रेडिंग रेंज वहीं से शुरू होगी जहां ईटीएफ ने एक सेशन पहले शाम को ट्रेड किया था, न कि दो दिन पुरानी वैल्यूएशन से।

दूसरा, प्राइस बैंड अब एसेट के हिसाब से तय होंगे। इक्विटी और डेट ईटीएफ के लिए शुरुआती कारोबार में ट्रेडिंग रेंज 10% रहेगी जो धीरे-धीरे बढ़कर 20% तक जा सकती है। हर बार लिमिट तक पहुंचने के बाद 15 मिनट का कूलिंग-ऑफ ब्रेक होगा। वहीं गोल्ड और सिल्वर ईटीएफ की ट्रेडिंग 6% की रेंज में शुरू होगी लेकिन चूंकि ग्लोबल बूलियन की कीमतें चौबीसों घंटे बदलती रहती हैं, तो उनके बैंड बिना किसी ऊपरी सीमा के 3% के स्टेप्स में बढ़ते रह सकते हैं। इससे सोने-चांदी के ईटीएफ को ओवरनाइट ग्लोबल मार्केट में बड़ी हलचल के बाद भी अपनी सही वैल्यू तक पहुंचने में मदद मिलती है। ओवरनाइट और लिक्विड ईटीएफ की वैल्यू में बहुत कम बदलाव होगा और उनका 5% का फिक्स्ड बैंड बना रहता है।

तीसरी बात, स्टॉक्स की ही तरह गोल्ड और सिल्वर ईटीएफ की शुरुआत हर दिन प्री-ओपन कॉल ऑक्शन से होगी। इसके तहत मार्केट खुलने से पहले ही खरीद-बिक्री के ऑर्डर इकट्ठा किए जाते हैं और इन्हें एक भाव यानी इक्विलिब्रियम प्राइस पर मैच किया जाता है। इससे ओपनिंग प्राइस में दिन के पहले किसी रैंडम ऑर्डर की बजाय ओवरऑल डिमांड और सप्लाई का पता चलता है।

क्या नहीं बदला

ईटीएफ के भाव अभी भी एनएवी के मुकाबले डिस्काउंट या प्रीमियम पर हो सकते हैं क्योंकि यह फर्क डिमांड-सप्लाई और लिक्विडिटी से बनता है, न कि ट्रेडिंग के नियमों से। इसके अलावा ईटीएफ के रिटर्न, लागत और टैक्स भी वैसे ही रहेंगे।

ETF में निवेश की टाइमिंग वाकई मायने रखती है? जानें लॉन्ग टर्म निवेशकों के लिए सही रणनीति

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।