Short Call: आखिर Nifty, Sensex में कब शुरू होगी रिकवरी, Dr Reddy's Labs और Siemens India क्यों सुर्खियों में हैं?

निफ्टी में तेज गिरावट के बाद अच्छी रिकवरी आती है। पिछले कई सालों के डेटा से इसकी पुष्टि होती है। साल 2000 से अब तक निफ्टी 107 बार 1 फीसदी से ज्यादा की गिरावट के साथ खुला है। अगर कोविड की बात की जाए तो अप्रैल 2020 के बाद से ऐसा सिर्फ 20 बार हुआ है। हिस्ट्री बताती है कि इनमें से ज्यादातर करेक्शन के बाद निफ्टी में अच्छी रिकवरी देखने को मिली है

अपडेटेड Dec 23, 2024 पर 10:11 AM
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डॉ रेड्डीज का स्टॉक 20 दिसंबर को 1.5 फीसदी के उछाल के साथ 1,345.3 रुपये पर बंद हुआ था। यह निफ्टी 50 का सबसे ज्यादा चढ़ने वाला शेयर था।

आप अगर लंबे समय से मार्केट में इनवेस्ट कर रहे हैं तो आपने 5 फीसदी, 10 फीसदी और 40 फीसदी तक का करेक्शन देखा होगा। लेकिन, आपने निफ्टी 50 को कितनी बार 1 फीसदी की गिरावट के साथ खुलते देखा है? सैमको सिक्योरिटीज ने अपनी रिपोर्ट में इस बारे में दिलचस्प बातें बताई हैं। उसने बताया है कि साल 2000 से अब तक निफ्टी सिर्फ 107 बार 1 फीसदी से ज्यादा की गिरावट के साथ खुला है। अगर कोविड की बात की जाए तो अप्रैल 2020 के बाद से ऐसा सिर्फ 20 बार हुआ है। हिस्ट्री यह बताती है कि इनमें से ज्यादातर करेक्शन के बाद निफ्टी में अच्छी रिकवरी देखने को मिली है।

पिछले 40 ऐसे मौकों के बाद 33 बार Nifty 50 में तेज रिकवरी दिखी है और निफ्टी में औसत 5.36 फीसदी तेजी आई है। क्या इसका मतलब है कि हमें खुशियां मनानी चाहिए? इसका जवाब है नहीं, क्योंकि पिछले प्रदर्शन को देखकर भविष्य में प्रदर्शन का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता। मार्केट से जुड़े लोग यह बात जानते हैं। लेकिन, यह अंधेरे के बीच उम्मीद की एक किरण जरूर है।

Dr Reddy's Labs

डॉ रेड्डीज का स्टॉक 20 दिसंबर को 1.5 फीसदी के उछाल के साथ 1,345.3 रुपये पर बंद हुआ था। यह निफ्टी 50 का सबसे ज्यादा चढ़ने वाला शेयर था। Dr Reddy's Labs का स्टॉक लगातार तीन सत्रों में 9 फीसदी चढ़ा है। इससे पहले शेयरों में आई गिरावट की वजह कंपनी के रेवेन्यू में Revlimid की ज्यादा कंट्रिब्यूशन को लेकर चिंता थी।


FY25 में अब तक कंपनी का पूंजीगत खर्च दोगुना हो गया है। दरअसल कंपनी ऑपरेशनल कैपेसिटी के साथ बायोसिमिलर्स, पेप्टाइड्स और दूसरे पोर्टफोलियो का विस्तार करना चाहती है। इससे ग्रोथ को सपोर्ट मिलेगा। उधर, बेयर्स का मानना है कि भले ही मैनेजमेंट को FY25 और FY26 में Revlimid की बदौलत अच्छी ग्रोथ हासिल होने की उम्मीद है, लेकिन 2026 की शुरुआत में इसका पेटेंट एक्सपायर कर जाएगा। इसका असर कंपनी की ग्रोथ पर देखने को मिलेगा।

Siemens India

सीमेंस इंडिया के शेयरों में 20 दिसंबर को 9.8 फीसदी की गिरावट आई थी। इसकी वजह मैनेजमेंट की कमजोर केमेंट्री थी। खासकर प्राइवेट कैपिटल एक्सपेंडिचर को लेकर मैनेजमेंट की कमेंट्री से निराशा हुई है। सेमीकंडक्टर, EV, बैटरी, सोलर में प्राइवेट कैपिटल एक्सपेंडिचर बढ़ रहा है। इसके आगे भी जारी रहने की उम्मीद है। FY25 की दूसरी छमाही में सरकार का पूंजीगत खर्च बढ़ता दिख रहा है। इसके प्राइवेट कैपिटल एक्सपेंडिचर भी बढ़ेगा।

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विदेशी ब्रोकरेज फर्म नुवामा का कहना है कि Siemens India डिजिटल और फैक्ट्री बिल्डिंग टेक्नोलॉजीज जैसे नए क्षेत्रों में बिजनेस का विस्तार कर सकती है। इससे ग्रोथ और ऑपरेटिंग मार्जिन बढ़ेगा। उधर, बेयर्स का कहना है कि T&D, ट्रांसपोर्टेशन और हाइड्रोकाबर्न जैसे प्रमुख वर्टिकल्स में उम्मीद से ज्यादा स्लोडाउन दिख रहा है। इसका असर कंपनी की ओवरऑल बिजनेस ग्रोथ पर पड़ सकता है।

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