Nifty Target: दिसंबर तक रिकॉर्ड ऊंचाई पर होगा निफ्टी, तो क्या यह शेयरों में निवेश बढ़ाने का समय है?

लोटसड्यू वेल्थ एंड इनवेस्टमेंट एडवाइजर्स के फाउंडर और सीईओ अभिषेक बनर्जी का अनुमान है कि निफ्टी इस साल के अंत तक नई ऊंचाई पर पहुंच सकता है। उन्होंने कुछ खास सेक्टर को फिलहाल अट्रैक्टिव बताया

अपडेटेड Sep 05, 2026 पर 12:06 PM
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शेयर बाजारों में 4 सितंबर को कई सत्रों के बाद रिकवरी दिखी।

शेयर बाजारों के प्रमुख सूचकांक कुछ समय से सीमित दायरे में चढ़-उतर रहे हैं। लेकिन, जल्द मार्केट का ट्रेंड बदलने वाला है। निफ्टी इस साल के अंत तक नई ऊंचाई पर पहुंच सकता है। लोटसड्यू वेल्थ एंड इनवेस्टमेंट एडवाइजर्स के फाउंडर और सीईओ अभिषेक बनर्जी ने यह अनुमान जताया है। भारतीय शेयर बाजारों को लेकर उनका नजरिया काफी पॉजिटिव है। उनका मानना है कि इस साल के अंत तक निफ्टी ऑल-टाइम हाई पर होगा।

इन सेक्टर्स में निवेश से बनेगा पैसा

अभी किस सेक्टर में इनवेस्ट करने पर होगी कमाई? इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि कुछ खास सेक्टर के नाम बताए। इनमें हेल्थकेयर, कंज्यूमर डिस्क्रेशनरी और फाइनेंशियल सर्विसेज शामिल हैं। उन्होंने कहा कि देशों में जीडीपी बढ़ रही है, जिससे हेल्थकेयर की डिमांड बढ़ रही है। इसका अलावा लोगों तक इंश्योरेंस की बढ़ती पहुंच से भी दूसरे सेक्टर्स के मुकाबले हेल्थकेयर की डिमांड ज्यादा तेजी से बढ़ेगी।


भारत सकंट से निपटने की स्थिति में

मध्यपूर्व क्राइसिस के बारे में उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों का लंबी अवधि में कोई असर नहीं पड़ता है। हालांकि, अभी रिस्क है और इसके चलते उतार-चढ़ाव दिख रहा है। जहां तक इंडिया की बात है तो उस पर इसका असर कम पड़ रहा है। इसकी कई वजहें हैं। बेहतर क्रेडिट फैसिलिटी, स्पेशल ऑयल पर्चेज, टैरिफ में कमी और फार्मा और इंजीनियरिंग टैलेंट में मजबूत स्थिति का फायदा इंडिया को मिल रहा है।

केंद्रीय बैंक इंटरेस्ट रेट को सीमा के अंदर बनाए रखेंगे

क्या अमेरिका में बॉन्ड यील्ड लंबे समय तक हाई बनी रहेगी? इसके जवाब में बनर्जी ने कहा कि केंद्रीय बैंकों का काम मॉनेटरी पॉलिसी के जरिए मार्केट को रेगुलेट करना है। यह उनका एकाधिकार है। जब की रिस्क बढ़ता है तो केंद्रीय बैंक के पास उससे निपटने के लिए 5-10 टूल्स होते है। अगर डिफॉल्ट के रिस्क को छोड़ दिया जाए तो हमें यह मानना होगा कि केंद्रीय बैंक इंटरेस्ट रेट को एक सीमा के अंदर बनाए रखने और इकोनॉमी की ग्रोथ के लिए अपना काम करते रहेंगे। मेरा मानना है कि अमेरिकी बॉन्ड यील्ड्स नीचे आएंगी और यह लंबी अवधि के बॉन्ड्स खरीदने का मौका है।

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कई सत्रों के बाद शुक्रवार को मार्केट में रिकवरी 

शेयर बाजारों में 4 सितंबर को कई सत्रों के बाद रिकवरी दिखी। हालांकि, अभी भी निफ्टी 24,000 के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे है। शुक्रवार को यह 0.10 फीसदी यानी 24 अंक चढ़कर 23,897 पर बंद हुआ। सेंसेक्स 0.48 फीसदी यानी 362 अंक चढ़कर 76,515 पर क्लोज हुआ। इसका मतलब है कि ऑल-टाइम हाई से प्रमुख सूचकांक अभी काफी दूर हैं। शेयरों की वैल्यूएशंस भी अट्रैक्टिव हो गई हैं।

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