नए साल में शेयर बाजार में बहुत जोश रहेगा, इसकी उम्मीद बहुत कम है। लेकिन इस दौरान शेयर मार्केट पर किन चीजों का असर होगा, वो जानना आपके लिए जरूरी है। इन चीजों को जानने के पहले आप कॉमेंट करके जरूर बताएं कि क्या आपको इस साल मार्केट में तेजी की उम्मीद है?
कोटक एसेट मैनेजमेंट कंपनी के MD निलेश शाह के मुताबिक, इस साल शेयर मार्केट पर जिन तीन चीजों का असर होने वाला है उनमें पहला जियोपॉलिटिकल टेंशन है। इसके अलावा अमेरिका के नए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के फैसलों और इंडिया-चीन के रिश्तों से शेयर बाजार की किस्मत तय होने वाली है।
नीलेश शाह ने बताया कि अगर बड़ी इकोनॉमी की बात करें तो इंडिया सबसे ज्यादा ग्रोथ वाली इकोनॉमी बना रहेगा। लेकिन इसके लिए उन्होंने कुछ सुधार भी सजेस्ट किए हैं। इनमें इंस्पेक्टर राज, लैंड रिफॉर्म्स, लेबर रिफॉर्म, फॉर्म रिफॉर्म और ज्यूडिशियल रिफॉर्म की बहुत जरूरत है।
2025 में चलेंगे ये 6 सेक्टर्स
Nilesh Shah का कहना है कि इन रिफॉर्म्स के बगैर इंडिया के लिए डबल डिजिट ग्रोथ हासिल करना मुश्किल होगा। इस फिस्कल ईयर की दूसरी तिमाही में इंडिया की जीडीपी ग्रोथ घटकर 5.4 फीसदी पर आ गई। इसकी सबसे बड़ी वजह सुस्त कंजम्प्शन है।
इकोनॉमिस्ट्स का कहना है कि इनफ्लेशन खासकर फूड इनफ्लेशन बढ़ने की वजह से लोगों के पास खर्च करने लायक पैसे कम बच रहे हैं। यहां तक कि लोग जरूरी चीजों पर भी कम खर्च कर पा रहे हैं।
कंजम्पशन बढ़ाने के लिए बैंक क्या इंटरेस्ट रेट में कटौती करेंगे। इस पर नीलेश शाह की राय अलग है। शाह का मानना है कि RBI फिलहाल रेट कट करने के मूड में नहीं है। उनका मानना है कि केंद्रीय बैंक साल 2025 की दूसरी छमाही में इंटरेस्ट रेट में कमी कर सकता है। हालांकि, आरबीआई इंटरेस्ट रेट में ज्यादा कमी नहीं करेगा। मौजूदा माहौल में उन्होंने मीडियम टर्म के लिए गोल्ड में निवेश करने की सलाह दी। 2024 में गोल्ड ने निवेशकों को अच्छा रिटर्न दिया है।
अब ये जान लेते हैं कि 2025 में किन सेक्टर्स में पैसा लगाना ठीक होगा। शाह के मुताबिक, प्राइवेट बैंक, आईटी, फॉर्मा, टेलीकॉम, कंज्यूमर स्टेपल्स और सीमेंट सेक्टर निवेशकों के लिए अट्रैक्टिव हैं।
प्राइवेट बैंकों का क्रेडिट कल्चर अच्छा है और माइक्रो फाइनेंस को उन्होंने ज्यादा लोन नहीं दिया है। अनसिक्योर्ड लोन के मामले में भी उनकी बैलेंसशीट ठीक है। आईटी कंपनियां AI और ML का इस्तेमाल कर रही हैं। इनकी मदद से वे क्लाइंट्स को फॉस्ट सॉल्यूशन ऑफर कर रही हैं। फॉर्मा कंपनियों की वैल्यूएशन सही लग रही है। टेलीकॉम कंपनियों को टैरिफ में रिवीजन का फायदा मिलेगा। सीमेंट सेक्टर में कंसॉलिडेशन दिख सकता है।