मार्केट आउटलुक पर बात करते हुए् पाइपर सेरिका (Piper Serica) के फाउंडर और फंड मैनेजर अभय अग्रवाल ने कहा कि इस समय बाजार को जो प्रॉब्लम सबसे ज्यादा परेशान कर रही है वह है अमेरिका में बॉन्ड यील्ड में लगातार हो रही बढ़त। अभी ऐसा नहीं लगता है कि बॉन्ड यील्ड में हो रही ये बढ़त थमेगी। बस हमें यही देखना है कि यह स्थिति और कितनी खराब होगी। दुनिया में काफी देश हैं जिनके पास अमेरिकी बॉन्ड हैं। जापान के पास तो 15 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा के यूएस बोंड्स हैं। यह अब अमेरिका बॉन्ड खरीद भी नहीं रहा है। बल्की येन को संभालने के लिए अमेरिकी बॉन्ड की बिकवाली कर रहा है। जापान जैसा बड़ा बॉन्ड खरीदने वाला देश जब इसकी बिकवाली करने लगेगा तो स्वाभाविक है कि यूएस में जो बॉन्ड यील्ड बढ़ेगी ही।
अमेरिकी लीडर चाहे जो भी कहें, सच्चाई यही है कि यूएस में अभी भी डेफिसिट बहुत ज्यादा है और उसमें कमी होने की कोई उम्मीद नहीं है। ऐसे में हम एक ऐसी स्थिति में हैं जहां साफ लग रहा है कि अमेरिका रेट कम करने की चाहे जितनी भी कोशिश कर ले, उसकी यह कोशिश फेल होनी ही है। ऐसे स्थिति में भारत जैसे उभरते बाजारों में आने वाले विदेशी निवेश पर दबाव रहेगा। जब तक इंटरेस्ट रेट का मसला सुलझता नहीं है, हमें उम्मीद भी नहीं करनी चाहिए कि भारत में फॉरेन इन्वेस्टमेंट की स्थिति में सुधार होगा। ब्याज दरों पर तस्वीर साफ होने पर ही विदेशी फ्लो संभव है।
भारत पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि आरबीआई अभी ब्याज दरों में बढ़त नहीं करेगा। लेकिन आईबीआई लिक्विडिटी कम करने के लिए कदम उठा सकता है। ऐसा करने के लिए उसके पास काफी विकल्प भी हैं। ऐसे माहौल में इक्विटी मार्केट लॉन्ग टर्म निवेशकों के लिए निवेश के काफी अच्छे मौके नजर आ रहे हैं।
क्योंकि जब बाजार में पार्टिसिपेशन कम होता है तभी खरीदारी का माहौल बनता है। निवेश के नजरिए से इस समय मिड कैप और स्माल कैप में ज्यादा अच्छे मौके हैं। उन्होंने बताया कि उनके पोर्टफोलिये में 75% हिस्सा स्माल कैप का है। लेकिन यह भी ध्यान में रहना चाहिए इस सेगमेंट की तमाम अच्छी कंपनियों के शेयर काफी महंगे हो गए है। अच्छी ग्रोथ की संभावना वासी ऐसी कंपनियों पर ही फोकस होना चाहिए जो सही भाव पर मिल रही हों। इस समय निवेशकों के अपने पोर्टफोलियो में थोड़ा कैश एलोकेशन बढ़ाना चाहिए और ग्रोथ तलाशना चाहिए। हालांकि, ऐसे शेयर काफी कम हैं।
इस समय वैल्यू तलाशने से बचें। तमाम लार्जकैप कंपनियां इस समय सस्ते भाव पर मिल रही है। लेकिन इनमें आगे किसी बड़े ग्रोथ की उम्मीद नहीं है क्योंकि ये स्लो ग्रोथ मोड में हैं। ऐसे में अगर मार्केट में रिकवरी होगी तब भी इनमें कोई प्राइस रिकवरी नहीं होगी। ऐसे में लगता है कि अगले दो-तीन महीने मार्केट के लिए काफी मुश्किल भरे रह सकते हैं। इस समय इन्वेस्टर्स को ज्यादा अग्रेसिव हुए बिना अपने पोर्टफोलियो में सही भाव पर मिल रहे अच्छी ग्रोथ की संभावना वाले शेयर जोड़ने चाहिए, ओवर एलोकेट नहीं करना चाहिए और थोड़ा कैश बढ़ाना चाहिए।
उन्होंने आगे कहा कि कई बार ऐसा होता है कि कुछ टेक्निकल कारणों की वजह से अच्छी कंपनियों के शेयरों में भी एकाएक गिरावट आ जाती है। जैसे कई बार जब किसी कंपनी में कोई बड़ा निवेशक या फंड एग्जिट करता है तो अच्छी कंपनी होने के बावजूद उसके शेयरों में 10-15 फीसदी तक का करेक्शन आ जाता है। ऐसे मौकों के लिए लिए आपके पास पड़ा कैश काम आएगा। ऐसा लगता है कि अगले दो-तीन महीनों में इस तरह के तमाम मौके मिल सकते हैं। लिक्विडिटी ड्राई होने की वजह से हमे मिड एंड स्माल कैप्स में इस तरह के कई स्टॉक स्पेसिफिक शार्प करेक्शंस देखने को मिल सकते हैं। इसलिए इन्वेस्टर्स को अपने पास कुछ कैश रखना चाहिए और उसको इस तरह के मौकों का फायदा उठाने के लिए इस्तेमाल करना चाहिए।
अभय अग्रवाल ने आगे कहा कि लार्जकैप में बड़ी तेजी की उम्मीद नहीं है। लेकिन मिड और स्मॉल कैप में मौके हैं। कंजम्प्शन थीम बेहतर लग रही है। ऑटो में टू-व्हीलर स्पेस पसंद है। निवेश के नजरिए से एनर्जी ट्रांजिशन की थीम भी काफी अच्छी है। फार्मा सेक्टर पर भी पॉजिटिव नजरिया है।
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