OMCs Stocks: कच्चे तेल की फिसलन भी नहीं दे पाएगी राहत, इस कारण प्रभुदास लीलाधर ने जताई आशंका

OMCs Stocks: कच्चे तेल में नरमी के बावजूद OMCs यानी तेल बेचने वाली कंपनियां की कमाई पर इस वित्त वर्ष 2027 में दबाव बना रह सकता है। इसका असर शेयरों पर भी दिख सकता है। ऐसा घरेलू ब्रोकरेज फर्म प्रभुदास लीलाधर का मानना है। ब्रोकरेज फर्म ने अपनी रिपोर्ट में ऐसी ही आशंका जताई है। जानिए ऐसा क्यों और कच्चे तेल को लेकर ब्रोकरेज फर्म का रुझान क्या है

अपडेटेड Jun 21, 2026 पर 12:52 PM
अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध की आंच में बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड $120 के करीब पहुंच गया था लेकिन जब सुलह की उम्मीदें दिखने लगी और समझौते की मेज सजने लगी तो यह धड़ाधड़ फिसलते हुए फिलहाल प्रति बैरल $81 के नीचे आ चुका है। (File Photo- Pexels)

OMCs Stocks: अमेरिका और ईरान के बीच सुलह की उम्मीदों पर कच्चा तेल तेजी से नीचे फिसल पड़ा। इसने तेल बेचने वाली कंपनियों के शेयरों को काफी राहत दी लेकिन घरेलू ब्रोकरेज फर्म प्रभुदास लीलाधर का मानना है कि इस नरमी के बावजूद वित्त वर्ष 2027 में इन कंपनियों की कमाई पर दबाव बना रहा सकता है। बता दें कि अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध की आंच में बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड $120 के करीब पहुंच गया था लेकिन जब सुलह की उम्मीदें दिखने लगी और समझौते की मेज सजने लगी तो यह धड़ाधड़ फिसलते हुए फिलहाल प्रति बैरल $81 के नीचे आ चुका है।

कच्चे तेल में नरमी के बावदूद OMCs Stocks पर दबाव क्यों

प्रभुदास लीलाधर के मुताबिक कच्चे तेल की नरमी के बावजूद पेट्रोल-डीजल में सुस्त रिकवरी, एलपीजी पर बढ़ते नुकसान और एक्साइज ड्यूटी में कटौती को चरणबद्ध तरीके से वापस लेने के आसार पर तेल बेचने वाली कंपनियों को लेकर अनिश्चितता का माहौल बनाया है। ब्रोकरेज फर्म का कहना है कि अमेरिका और ईरान के बीच जंग थमने से ब्रेंट क्रूड की कीमत प्रति बैरल $80 के करीब आने से निवेशकों का भरोसा कुछ बेहतर हुआ है लेकिन ऑयल मार्केट में जारी उतार-चढ़ाव और युद्ध के दौरान रणनीतिक भंडार का इस्तेमाल करने वाले देशों के इसे फिर स्टोर किए जाने से कच्चे तेल की कीमतों में लगातार गिरावट सीमित रह सकती है।


पेट्रोल-डीजल में कितनी अंडर रिकवरी

ब्रोकरेज फर्म ने वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में पेट्रोल पर प्रति लीटर ₹7 और डीजल पर ₹10 की अंडर-रिकवरी का अनुमान लगाया है। प्रभुदास लीलाधर ने यह अनुमान एक्साइज ड्यूटी में प्रति लीटर ₹10 की कटौती के साथ-साथ मोटर स्पिरिट (MS) में $10 और और हाई-स्पीड डीजल (HSD) में $15 के क्रैक स्प्रेड को ध्यान में रखते हुए लगाया है।

एलपीजी से सबसे अधिक दबाव

ब्रोकरेज फर्म के मुताबिक तेल कीमतों में हालिया गिरावट के बावजूद जून 2026 तिमाही में कंपनियों की सेहत पर सबसे अधिक दबाव एलपीजी डाल रही, जिसमें हर सिलेंडर पर कंपनियों को करीब ₹500 के नुकसान की आशंका है। तेल बेचने वाली कंपनियों के मार्च 2026 तिमाही के अर्निंग्स कॉल्स में मैनेजमेंट्स के कमेंट्स का हवाला देते हुए ब्रोकरेज फर्म ने कहा कि मई 2026 में एलपीजी पर अंडर-रिकवरी बढ़कर प्रति सिलिंडर करीब ₹610–₹670 हो गई, जबकि अप्रैल में यह लगभग ₹170 था। नुकसान में यह तेज बढ़ोतरी इंटरनेशनल एलपीजी प्राइसेज में उछाल के चलते हुई। ब्रोकरेज फर्म की रिपोर्ट के मुताबिक एलपीजी आयात के लिए प्रमुख मानक मानी जाने वाला सऊदी कॉन्ट्रैक्ट प्राइस पश्चिमी एशिया में लड़ाई से सप्लाई प्रभावित होने के चलते जून 2026 तिमाही में तिमाही आधार पर 47% बढ़ सकता है।

एक्साइज ड्यूटी में राहत की वापसी का दबाव

प्रभुदास लीलाधर ने पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में की गई प्रति लीटर ₹10 की कटौती को वापस लेने से OMCs की कमाई पर दबाव दिख सकता है। हालांकि इसे चरणबद्ध तरीके से ही वापस लिया जाने के आसार हैं। ब्रोकरेज फर्म का मानना है कि यह कटौती तो राहत देने के लिए सिर्फ अस्थायी इंतजाम था। ऐसे में अब कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और पेट्रोल-डीजल की कीमतों में पहले ही बढ़ोतरी हो जाने के कारण सरकार समय के साथ इस राहत को धीरे-धीरे समाप्त कर सकती है। ब्रोकरेज फर्म की रिपोर्ट के मुताबिक इस ड्यूटी में कटौती के कारण केंद्र सरकार को सालाना लगभग ₹1.7 लाख करोड़ के रेवेन्यू का नुकसान उठाना पड़ रहा है।

अस्थायी साबित हो सकती है कच्चे तेल की गिरावट

कच्चे तेल को लेकर ब्रोकरेज फर्म का अनुमान है कि जियो-पॉलिटिकल टेंशन के हल्के होने और होर्मुज जलडमरूमध्य से आवाजाही सामान्य होने से आने वाले समय में तेल की कीमतें और हल्की हो सकती है। हालांकि प्रभुदास लीलाधर का कहना है कि यह गिरावट अस्थायी साबित हो सकती है, क्योंकि युद्ध के दौरान तेल भंडार में जो कमी आई और रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व (SPR) को फिर से भरने के लिए कई देश खरीदारी बढ़ाएंगे जिससे वैश्विक एनर्जी मार्केट में नई मांग पैदा होगी।

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