PNB Housing Share Price: 32% तक चढ़ सकता है ये हाउसिंग फाइनेंस शेयर, ब्रोकरेज ने दी खरीदने की सलाह

PNB Housing Share Price: हाउसिंग फाइनेंस कंपनी PNB Housing Finance पर मोतीलाल ओसवाल का भरोसा बढ़ा हुआ है। ब्रोकरेज ने 1,275 रुपये का टारगेट दिया है, जो मौजूदा भाव से करीब 32% ज्यादा है। जानिए कंपनी के किस बिजनेस पर दांव लगाया जा रहा है और आगे शेयर की चाल किन बातों पर निर्भर करेगी।

अपडेटेड Jun 08, 2026 पर 4:31 PM
PNB Housing अब टियर-2, टियर-3 और उभरते बाजारों पर ज्यादा फोकस कर रही है।

PNB Housing Share Price: हाउसिंग फाइनेंस सेक्टर की कंपनी PNB Housing Finance के शेयर पर मोतीलाल ओसवाल काफी बुलिश है। ब्रोकरेज फर्म ने शेयर पर BUY रेटिंग बरकरार रखी है और 1,275 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है। मौजूदा भाव 968 रुपये के मुकाबले यह करीब 32% की संभावित तेजी दिखाता है।

1,275 रुपये का टारगेट क्यों दिया गया?

मोतीलाल ओसवाल का कहना है कि PNB Housing Finance अब अपने कारोबार को नए स्तर पर ले जाने की तैयारी में है। कंपनी का फोकस अब अफोर्डेबल और उभरते हाउसिंग सेगमेंट पर बढ़ रहा है। यही वे क्षेत्र हैं जहां लोन की मांग भी तेजी से बढ़ रही है और कमाई की संभावना भी ज्यादा है।


फिलहाल कंपनी के रिटेल लोन पोर्टफोलियो में इन सेगमेंट्स की हिस्सेदारी करीब 40% है। मैनेजमेंट इसे FY27 के अंत तक 45% और अगले दो साल में करीब 50% तक ले जाना चाहता है।

छोटे शहरों पर कंपनी का बड़ा दांव

PNB Housing अब टियर-2, टियर-3 और उभरते बाजारों पर ज्यादा फोकस कर रही है। इसके लिए वह अपनी मौजूदा शाखाओं का बेहतर इस्तेमाल कर रही है और अफोर्डेबल हाउसिंग बिजनेस का दायरा बढ़ा रही है।

इसके अलावा कंपनी माइक्रो हाउसिंग सेगमेंट में भी उतरने की तैयारी कर रही है। इस तरह के लोन पर आम होम लोन के मुकाबले ज्यादा यील्ड मिलती है, जिससे कंपनी के मार्जिन और कमाई को फायदा हो सकता है।

डेवलपर फाइनेंस से भी मिलेगा सहारा

PNB Housing Finance ने चुनिंदा डेवलपर फाइनेंस और कंस्ट्रक्शन फाइनेंस कारोबार में भी कदम बढ़ाया है। हालांकि प्रबंधन का कहना है कि इस तरह के लोन का हिस्सा कुल पोर्टफोलियो के 8-10% से ज्यादा नहीं होने दिया जाएगा। कंपनी का फोकस अभी भी रिटेल लोन बिजनेस पर ही रहेगा।

एसेट क्वालिटी भी मजबूत

मोतीलाल ओसवाल के मुताबिक, कंपनी की एसेट क्वालिटी फिलहाल काफी मजबूत बनी हुई है। FY26 की चौथी तिमाही में ग्रॉस एनपीए (GNPA) घटकर करीब 0.93% पर आ गया। बेहतर रिकवरी, सख्त अंडरराइटिंग और मजबूत कलेक्शन सिस्टम का फायदा कंपनी को मिल रहा है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अगले कुछ तिमाहियों तक राइट-ऑफ किए गए खातों से होने वाली रिकवरी कंपनी की कमाई को सहारा देती रह सकती है।

किन जोखिमों पर नजर रखनी होगी?

मोतीलाल ओसवला रिपोर्ट में कुछ जोखिमों का भी जिक्र किया गया है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव की वजह से बॉन्ड यील्ड और फंड जुटाने की लागत बढ़ रही है। अगर उधारी की लागत और बढ़ती है, तो कंपनी के मार्जिन पर दबाव आ सकता है।

इसके अलावा अफोर्डेबल और उभरते हाउसिंग सेगमेंट में तेजी से विस्तार के दौरान एसेट क्वालिटी को संभालकर रखना भी कंपनी के लिए बड़ी चुनौती होगी।

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