RBI Monetary Policy: आरबीआई ने इंटरेस्ट रेट बढ़ाया, बढ़ जाएगी होम लोन, कार और दूसरे लोन की EMI

RBI Monetary Policy: आरबीआई की अक्टूबर की मॉनेटरी पॉलिसी अनुमान के मुताबिक रही। इकोनॉमिस्ट्स ने रेपो रेट बढ़ने की उम्मीद जताई थी। हालांकि, इसका असर होम लोन और कार लोन लेने वाले ग्राहकों पर पड़ेगा

अपडेटेड Oct 07, 2026 पर 10:17 AM
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आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने 7 अक्तूबर को सुबह 10 बजे मॉनेटरी पॉलिसी का ऐलान किया।

RBI Monetary Policy: भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने 7 अक्तूबर को रेपो रेट बढ़ाने का ऐलान किया। इससे रेपो रेट 5.25 फीसदी से बढ़कर 5.50 फीसदी हो गया है। फरवरी 2023 के बाद आरबीआई ने पहली बार रेपो रेट बढ़ाया है। केंद्रीय बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने सुबह 10 बजे रेपो रेट बढ़ाने के फैसले के बारे में बताया। इससे होम लोन, कार लोन और दूसरे लोन महंगे हो जाएंगे।

तीन दिन की एमपीसी की मीटिंग के बाद रेट बढ़ाने का फैसला

RBI की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की तीन दिन की मीटिंग 5 अक्तूबर को शुरू हुई थी। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा (Sanjay Malhotra) ने उसके मीटिंग के नतीजों का ऐलान 7 अक्तूबर को किया। आरबीआई का इंटरेस्ट रेट बढ़ाने का फैसला उम्मीद के मुताबिक है। एनालिस्ट्स ने अक्तूबर की पॉलिसी में रेपो रेट बढ़ने की उम्मीद जताई थी। हालांकि, आरबीआई ने मॉनेटरी पॉलिसी के रुख में भी बदलाव किया है। मल्होत्रा ने कहा कि पॉलिसी का रुख 'कैलिबेरेटेड टाइटेनिंग' होगा। इसका मतलब है कि जरूरत के हिसाब से आरबीआई पॉलिसी को सख्त बना सकता है।


आरबीआई की मॉनेटरी पॉलिसी अनुमान के मुताबिक 

सीएनबीसी-टीवी18 के पोल में एनालिस्ट्स ने रेपो रेट 25 बेसिस प्वाइंट्स बढ़ने की उम्मीद जताई थी। इसकी वजह तेजी से बढ़ता रिटेल इनफ्लेशन है। पिछले कई महीनों से रिटेल इनफ्लेशन लगातार बढ़ रहा है। अगस्त में रिटेल इनफ्लेशन बढ़कर 4.82 फीसदी पर पहुंच गया। यह आरबीआई के 4 फीसदी के टारगेट से ज्यादा है। अमेरिका और ईरान की लड़ाई का असर क्रूड की सप्लाई पर पड़ा है। इससे क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल आया है, जिससे इनफ्लेशन बढ़ रहा है।

क्रूड ऑयल में उछाल से लगातार बढ़ रही महंगाई

एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस वित्त वर्ष में रिटेल इनफ्लेशन 5 फीसदी के पार जा सकता है। ऐसे में इंटरेस्ट रेट बढ़ने का सिलसिला आगे भी जारी रह सकता है। इंटरेस्ट रेट बढ़ने से भले ही इनफ्लेशन बढ़ने की रफ्तार कम हो जाए, लेकिन इससे होम लोन और कार लोन सहित दूसरे लोन महंगे होंगे। होम लोन और कार लोन के ग्राहकों को बैंक ज्यादा इंटरेस्ट रेट पर लोन ऑफर करेंगे। जिन ग्राहकों ने पहले से होम लोन या कार लोन ले रखा है, उनकी EMI बढ़ेगी।

फेडरल रिजर्व ने भी सितंबर में बढ़ाया था इंटरेस्ट रेट

अमेरिकी केंद्रीय बैंक ने भी सितंबर की अपनी मॉनेटरी पॉलिसी में इंटरेस्ट रेट बढ़ाया था। फेडरल रिजर्व ने महंगाई को बढ़ने से रोकने के लिए ऐसा किया था। इस महीने के आखिर में फेडरल रिजर्व  की मॉनेटरी पॉलिसी आने वाली है। कुछ एनालिस्ट्स का मानना है कि फेड लगातार दूसरी बार इंटरेस्ट रेट बढ़ा सकता है। अमेरिका में भी महंगाई फेड के टारगेट से ज्यादा है। क्रूड में उछाल से दूसरे देशों में भी महंगाई बढ़ रही है। इससे आगे मॉनेटरी पॉलिसी सख्त होने का अनुमान है।

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रेपो रेट बढ़ने से बैंक होम लोन और कार लोन का इंटरेस्ट बढ़ाते हैं

बैंकों के इंटरेस्ट रेट किसी एक बेंचमार्क से लिंक्ड होते हैं। ज्यादातर बैंकों के इंटरेस्ट रेट रेपो रेट से लिंक्ड हैं। इसका मतलब है कि रेपो रेट बढ़ने पर बैंक लोन का इंटरेस्ट रेट बढ़ाते हैं। रेपो रेट घटने पर वह लोन का इंटरेस्ट रेट कम करते हैं। आरबीआई के रेपो रेट में बदलाव नहीं करने पर बैंकों का इंटरेस्ट रेट ज्यादातर स्थिर रहता है।

 

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