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शेयर बाजार में अफसोस करना बीमारी है, सट्टा छोड़कर निवेश की तरफ बढ़ने से हुआ फायदा- विजय केडिया

विजय केडिया ने अपने शेयर बाजार में अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि सट्टे में मां के गहने बेचने तक की नौबत आ गई थी। एक वक्त मुझ पर ऐसा भी आया जब बच्चे का दूध खरीदने के पैसे नहीं थे। इसके बाद सट्टा छोड़कर निवेश की तरफ मेरा रुझान बना जो भी आज भी बरकरार है। बच्चे के दूध और मां के गहने वाली घटना से स्टॉप लॉस की सीख मिली

Edited By: Sunil Guptaअपडेटेड Oct 17, 2023 पर 4:40 PM
शेयर बाजार में अफसोस करना बीमारी है, सट्टा छोड़कर निवेश की तरफ बढ़ने से हुआ फायदा- विजय केडिया
विजय केडिया ने कहा कि उनके निवेश किये हुए शेयर्स में Cera Sanitary के शेयर ने उन्हें 16,000 गुना रिटर्न दिया।

आज से हमारे सहयोगी चैनल सीएनबीसी आवाज़ पर एक बहुत ही महत्वपूर्ण पोडकास्ट (Podcast) की शुरुआत हुई है। इसे चैनल के मैनेजिंग एडिटर अनुज सिंघल ने माई इनवेस्टमेंट जर्नी का नाम दिया। आज से शुरू हुए इस पहले पोडकास्ट में शेयर बाजार के दिग्गज निवेशकों में से एक माने जाने वाले विजय केडिया ने अनुज सिंघल से बातचीत में कहा कि शेयर बाजार में निराश होकर रुकना नहीं चाहिए। शेयर बाजार में अफसोस करते रहना एक बीमारी है। इससे बाहर निकलना चाहिए। सट्टा लगाने से बाजार में पैसा नहीं बनता है। सट्टा छोड़कर निवेश करने से मुझे फायदा हुआ है। पेश है उनसे लंबी बातचीत के प्रमुख संपादित अंश-

कैसे शुरू हुई विजय केडिया की निवेश यात्रा?

विजय केडिया ने कहा कि 19 साल पहले शेयर बाजार में उतरे। फ्यूचर्स ट्रेडिंग के साथ बाजार में उतरे थे। सट्टा करने की सोच से फ्यूचर्स ट्रेडिंग शुरू की थी। शुरुआत में फ्यूचर्स ट्रेडिंग में मेरा पैसा बना लेकिन बाद में फ्यूचर्स ट्रेडिंग ने मुझे कंगाल कर दिया।

सट्टे से निवेश की यात्रा कैसे हुई?

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