प्रोजेक्ट फाइनेंसिंग नियमों में नरमी संभव, PFC और REC जैसी कंपनियों को लगे पंख

वित्त मंत्रालय का कहना है कि आरबीआई ने प्रोजेक्ट फाइनेंसिंग के अपने ड्रॉफ्ट में 6 महीने का यूनीफॉर्म मोरेटोरियम देने की बात कही है। लेकिन आरबीआई को प्रोजेक्ट के प्रकार के आधार पर अलग-अलग मोरेटोरियम देने पर विचार करना चाहिए और 5 फीसदी के प्रोविजनिंग नॉर्म को घटा कर 1-2 फीसदी करना चाहिए

अपडेटेड Jun 24, 2024 पर 2:01 PM
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वित्त मंत्रालय के डिपार्टमेंट ऑफ फाइनेंशियल सर्विसेज ने आरबीआई को सुझाव दिया है कि प्राइवेट और पब्लिक प्रोजेक्ट्स में अंतर करने की जरूरत है

आज PFC और REC जैसी कंपनियों के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर आई है। सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबित प्रोजेक्ट फाइनेंसिंग नियमों में नरमी संभव है। इससे संबंधित ड्राफ्ट पर वित्त मंत्रालय ने अपना सुझाव भेजा है। सूत्रों के मुताबिक RBI को प्रोजेक्ट फाइनेंसिंग प्रावधानों पर नरमी बरतने का सुझाव दिया गया है। सुझाव में पब्लिक और प्राइवेट प्रोजेक्टस पर एक जैसे नियमों (यूनीफार्म नियमों ) पर फिर से विचार की बात कही गई है।

इस खबर पर और विस्तार से जानकारी देते हुए सीएनबीसी-आवाज़ के आलोक प्रियदर्शी ने कहा कि ये खबर प्रोजेक्ट फाइनेंसिंग में शामिल, बैंकों, और एनबीएफसी कंपनियों के लिए बहुत बड़ी राहत लेकर आई है। इस खबर से PFCऔर REC जैसी सरकारी कंपनियों को भी फायदा होगा।

बता दें कि आरबीआई ने 3 मई को प्रोजेक्ट फाइनेंसिंग को लेकर जो ड्रॉफ्ट जारी किया था, उसको लेकर प्रोजेक्ट फाइनेंसिंग कंपनियों में घबराहट बढ़ गई थी। 3 मई के ड्रॉफ्ट में बहुत ही सख्त नियमों की बात कही गई थी। इसमें कहा गया था कि प्रोजेक्ट फाइनेंसिंग में जो भी आवंटन किया जाएगा उसका 5 फीसदी प्रोविजनिंग करना पड़ेगा। इसके अलावा इसमें पब्लिक और प्राइवेट दोनों तरह के प्रोजेक्ट फाइनेंशिंग के लिए एक तरह के नियम बनाने की बात कही गई थी।


प्राइवेट और पब्लिक प्रोजेक्ट्स में अंतर करने की जरूरत

लेकिन अब सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक इस मामले के एक स्टेक होल्डर वित्त मंत्रालय ने भी अपनी सिफारिश आरबीआई को भेज दी है। इसमें वित्त मंत्रालय के डिपार्टमेंट ऑफ फाइनेंशियल सर्विसेज ने आरबीआई को सुझाव दिया है कि प्राइवेट और पब्लिक प्रोजेक्ट्स में अंतर करने की जरूरत है। प्राइवेट प्रोजेक्टस में कई वजहों से फेल होने का संभावना ज्यादा हो सकती है। लेकिन पब्लिक प्रोजेक्ट में सरकार की गारंटी होती है। ऐसे में इन प्रोजेक्ट्स के फेल होने की संभावना बहुत ही कम होती है। किसी खास परिस्थिति में लागत बढ़ जाने पर इन प्रोजेक्ट्स की फंडिंग सरकार कर देती है। ऐसे में पब्लिक और प्राइवेट प्रोजेक्ट्स की फाइनेंसिंग के लिए अगल-अलग नियम बनाए जाने चाहिए।

6 महीने के यूनीफॉर्म मोरेटोरियम में भी बदलाव की सिफारिश

वित्त मंत्रालय का कहना है कि आरबीआई ने प्रोजेक्ट फाइनेंसिंग के अपने ड्रॉफ्ट में 6 महीने का यूनीफॉर्म मोरेटोरियम देने की बात कही है। लेकिन आरबीआई को प्रोजेक्ट के प्रकार के आधार पर अलग-अलग मोरेटोरियम देने पर विचार करना चाहिए।

5 फीसदी की प्रोविजनिंग को घटा कर 1 से 2 फीसदी करने की सिफारिश

इसके अलावा 5 फीसदी के प्रोविजनिंग नॉर्म पर वित्त मंत्रायलय की तरफ ले कहा गया है कि इतनी ज्यादा प्रोविजनिंग से कंपनियों की कॉस्ट ऑफ क्रेडिट बहुत ज्यादा हो जाएगी। ऐसे में प्रोजेक्ट प्रोविजनिंग 1 से 2 फीसदी ही होनी चाहिए।

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REC और PFC ने पकड़ी रफ्तार

इस खबर का रिएक्शन की देखने को मिला है। फिलहाल 1.30 बजे के आसपास REC को शेयर 11.80 रुपए यानी 2.31 फीसदी की बढ़त के साथ 522 रुपए के आसपास दिख रहा है। आज की इसका अब तक का दिन का हाई 524 रुपए है। स्टॉक का वॉल्यूम 9672665 शेयर के आसपास दिख रहा है।

PFC के शेयरों में भी अच्छी तेजी देखने को मिल रही है। यह स्टॉक 3.90 रुपए यानी 0.81 फीसदी की बढ़त के साथ 486 रुपए के आसपास कारोबार कर रहा है। आज का इसका अब तक का दिन का हाई 487.60 रुपए है। जबकि इसका दिन का लो 472.60 रुपए है।

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