Dollar Vs Rupee : रुपया 56 पैसे उछलकर 93.91 पर हुआ बंद, 12 अक्टूबर के बाद दिखी एक दिन की सबसे बड़ी बढ़त
Dollar Vs Rupee : आज के सेशन के दौरान भारतीय करेंसी छह महीने के हाई पर भी पहुंच गई, जिससे इसकी वीकली बढ़त लगभग 1.2 प्रतिशत हो गई और यह एशिया की बेहतर प्रदर्शन करने वाली मुद्राओं में से एक बन गई
Dollar vs Rupee : कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से भी रुपये को सपोर्ट मिल रहा है। ईरान विवाद के समाधान की उम्मीदों के बीच, इस हफ्ते ब्रेंट क्रूड की कीमतों में लगभग 20 प्रतिशत की गिरावट आई है
Dollar Vs Rupee : विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की घरेलू इक्विटी बाजार में वापसी और ब्रेंट क्रूड की कीमतों में लगभग 20 प्रतिशत की गिरावट के चलते, सप्ताह के दौरान रुपया 1.2 प्रतिशत मजबूत हुआ। वहीं, शुक्रवार को RBI द्वारा 93.88 के स्तर के आसपास डॉलर की खरीदारी किए जाने से रुपये की बढ़त सीमित रही। आज शुक्रवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 56 पैसे उछलकर 93.91 पर बंद हुआ। 12 अक्टूबर के बाद से यह एक दिन में आई सबसे बड़ी तेजी है। घरेलू इक्विटी बाजार में विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI) के फिर से आने और कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट से रुपये को मजबूती मिली। पिछले सत्र में रुपया 94.47 पर बंद हुआ था।
इंडियन करेंसी छह महीने के हाई पर पहुंची
आज के सेशन के दौरान इंडियन करेंसी छह महीने के हाई पर भी पहुंच गई, जिससे इसकी वीकली बढ़त लगभग 1.2 प्रतिशत हो गई और यह एशिया में बेहतर प्रदर्शन करने वाली मुद्राओं में से एक बन गई। डीलरों का कहना है कि विदेशी बैंकों को विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) की ओर से डॉलर बेचते हुए देखा गया, जिससे रुपये में और तेजी आई। हालांकि,भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को भी 93.88 के स्तर के आसपास डॉलर खरीदते हुए देखा गया, जिससे रुपये की मजबूती सीमित हो गई।
रुपया सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाली एशियाई मुद्रा रही
आज के दिन रुपया सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाली एशियाई मुद्रा रही। रुपए में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 0.6 प्रतिशत मजबूती आई। इसने दूसरी एशियाई करेंसीज के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन किया। हालांकि,साल की शुरुआत से अब तक इसमें 4.3 प्रतिशत की गिरावट आई है, जबकि पिछले एक साल में इसमें 5.6 प्रतिशत की गिरावट आई है। वहीं, चालू वित्त वर्ष में अब तक इस करेंसी में 0.96 प्रतिशत की बढ़त हुई है।
रुपए के लिए 93.50 पर सपोर्ट और 94.30 पर रेजिस्टेंस रहने का अनुमान
HDFC सिक्योरिटीज के रिसर्च एनालिस्ट दिलीप परमार ने कहा कि भारतीय रुपया एशिया की अन्य सभी मुद्राओं से आगे निकल गया है। 12 अक्टूबर के बाद से इसमें एक दिन की सबसे बड़ी तेजी देखी गई है, जिससे यह छह महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है। विदेशी निवेश की भारी आवक और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बीच, घरेलू शेयर बाजार में जबरदस्त तेजी आई। इसके पीछे 'एंटी-AI' ट्रेड को लेकर हो रही चर्चा और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं में कमी जैसे फैक्टर काम कर रहे हैं। नियर टर्म में स्पॉट USDINR के नीचे जाने की उम्मीद है। रुपए के लिए 93.50 पर सपोर्ट और 94.30 पर रेजिस्टेंस रहने का अनुमान है।
विदेशी निवेशकों की वापसी से रुपए को मिला सपोर्ट
कई महीनों तक लगातार निकासी करने के बाद,विदेशी निवेशक अब भारतीय इक्विटी बाजार में वापस लौट आए हैं। इससे पहले,ग्लोबल फंड्स ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) रैली का फायदा उठाने के लिए अमेरिकी और दूसरे एशियाई बाजारों को प्राथमिकता दी। उस समय,सेमीकंडक्टर और AI इंफ्रास्ट्रक्चर सप्लाई चेन में सीमित पैठ होने के कारण, भारतीय इक्विटी बाजार उनके लिए कम आकर्षक रह गए थे।
हालांकि,अब टेक्नोलॉजी शेयरों के महंगे वैल्यूएशन और AI निवेश से मिलने वाले रिटर्न को लेकर बनी चिंताओं के चलते निवेशक फिर से परंपरागत निवेश विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं। निवेश के नजरिए में आए इस बदलाव से भारतीय बाजारों को फायदा हुआ है। रॉयटर्स के मुताबिक विदेशी निवेशकों ने इस हफ्ते लगभग 3 अरब डॉलर के भारतीय शेयर खरीदे हैं। इसमें गुरुवार को की गई 1.6 अरब डॉलर की खरीदारी भी शामिल है,जो पिछले लगभग छह सालों में एक दिन में की गई उनकी सबसे बड़ी खरीदारी है।
कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से भी रुपये को सपोर्ट
कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से भी रुपये को सपोर्ट मिल रहा है। ईरान विवाद के समाधान की उम्मीदों के बीच, इस हफ्ते ब्रेंट क्रूड की कीमतों में लगभग 20 प्रतिशत की गिरावट आई है। कच्चे तेल के एक बड़े आयातक के रूप में भारत को तेल की कीमतों में गिरावट से फायदा होता है। इससे आयात बिल कम हो जाता है और डॉलर की मांग भी घट जाती है।
विदेशी निवेश बढ़ने और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से रुपये पर दबाव डालने वाले दो प्रमुख कारण कमजोर पड़ गए हैं। हालांकि, हमें इस पर ध्यान रखना होगा कि विदेशी निवेशक अपनी खरीदारी कब तक जारी रखते हैं और कच्चे तेल की कीमतों का क्या रुख होता है। ये रुपये की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।
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