बैंकिंग सिस्टम में लिक्विटिडी कम होने की वजह से कई बैंक और कंपनियां फंड जुटाने के लिए शॉर्ट टर्म डेट मार्केट का सहारा ले रही हैं। मनीकंट्रोल (Moneycontrol) की एनालिसिस में यह बात पता चली है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, रिजर्व बैंक द्वारा अनसिक्योर्ड लेंडिंग पर रिस्क वेटेज में बढ़ोतरी करने से नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों के लिए बैंक फंडिंग की कमी हो गई है। लिक्विडिटी (कैश) की कमी की वजह से नवंबर 2023 में सर्टिफिकेट्स ऑफ डिपॉजिट (CDs) और कमर्शियल पेपर्स (CPs) की आउटस्टैंडिंग में तेजी से बढ़ोतरी हुई।
सर्टिफिकेट्स ऑफ डिपॉजिट शॉर्ट टर्म डेट इंस्ट्रूमेंट्स होता है, जिसका इस्तेमाल बैंक फंड जुटाने के लिए करते हैं, जबकि कमर्शियल पेपर इंस्ट्रूमेंट अनसिक्योर्ड मनी मार्केट इंस्ट्रूमेंट होते हैं, जो कॉरपोरेट बॉरोअर्स द्वारा प्रॉमिसरी नोट के तौर पर जारी किए जाते हैं। कॉरपोरेट बॉरोअर्स इसे इसलिए जारी करते हैं, ताकि वे शॉर्ट टर्म बॉरोइंग को डायवर्सिफाई कर सकें।
नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड (NSDL) के आंकड़ों के मुताबिक, नवंबर के दौरान आउटस्टैंडिंग CD में सालाना आधार पर 18 पर्सेंट की बढ़ोतरी हुई, जबकि CPs में 10 पर्सेंट की बढ़ोतरी हुई।
रॉकफोर्ट फिनकैप एलएलपी (Rockfort Fincap LLP) के फाउंडर और मैनेजिंग पार्टनर वेंकटकृष्णन श्रीनिवासन ने बताया, 'सिस्टम में लिक्विडिटी की लगातार कमी और क्रेडिट के मोर्चे पर खर्च की वजह से कंपनियों को अतिरिक्त लिक्विडिटी की तरफ देखना पड़ता है। लिक्विडिटी डेफिसिटी ज्यादा होने, मसलन एडवांस टैक्स आउटफ्लो, जीएसटी पेमेंट आदि स्थितियों में ये इकाइयां मनी मार्केट के जरिये अतिरिक्त फंड जुटाती हैं।'
करुर व्यास बैंक (Karur Vysya Bank) के DGM और ट्रेजरी हेड वी. रामचंद्र रेड्डी ने बताया कि बैंक अपना CASA पोर्टफोलियो बढ़ाने के लिए हरमुमकिन कोशिश कर रहे हैं, जो अपेक्षाकृत ज्यादा स्थिर है। रेड्डी का यह भी कहना था कि रिजर्व बैंक द्वारा कैपिटल नॉर्म्स को लेकर सख्ती किए जाने के बाद नॉन-बैंकंग फाइनेंस कंपनियां शॉर्ट टर्म बैंक लोन के बजाय कमर्शियल पेपर को प्राथमिकता दे रहे हैं और इस वजह से दोनों के बीच स्प्रेड कम हो रहा है।