Rupee vs Dollar: भारतीय रुपया शुक्रवार, 6 नवंबर को डॉलर के मुकाबले 94.08 तक मजबूत हो गया। ये 7 मई के बाद रुपये का सबसे मजबूत इंट्राडे स्तर है, यानी करीब 6 महीने का ऊपरी स्तर। खास बात ये है कि दिन की शुरुआत रुपये के लिए अच्छी नहीं थी और ये कमजोर होकर खुला था।
कमजोर शुरुआत के बाद पलटा रुपया
शुक्रवार को रुपया डॉलर के मुकाबले 94.50 पर खुला। गुरुवार को ये 94.41 पर बंद हुआ था, यानी शुरुआत में ही 9 पैसे की कमजोरी आई। इसके बाद रुपये ने धीरे-धीरे वापसी की। पहले ये 94.36 तक सुधरा और फिर और मजबूत होकर 94.08 तक पहुंच गया।
यहां एक बात समझनी जरूरी है। रुपये का नंबर जितना नीचे आता है, रुपया उतना मजबूत होता है। 94.08 का मतलब है कि 1 डॉलर खरीदने के लिए अब 94.08 रुपये देने होंगे। पिछले बंद भाव के मुकाबले रुपया 33 पैसे और दिन के शुरुआती स्तर से 42 पैसे मजबूत हुआ।
क्रूड और डॉलर ने डाला दबाव
फॉरेक्स ट्रेडर्स के मुताबिक रात में क्रूड ऑयल की कीमतों में आई तेजी और डॉलर में रिकवरी ने रुपये पर दबाव बनाया था। ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 2.04% चढ़कर 100.30 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था।
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा क्रूड बाहर से खरीदता है, इसलिए क्रूड महंगा होने पर डॉलर की मांग बढ़ती है और रुपये पर दबाव आता है। उधर दुनिया की 6 बड़ी करेंसी के मुकाबले डॉलर की ताकत बताने वाला डॉलर इंडेक्स 0.17% चढ़कर 101.71 पर था।
FII की जोरदार खरीदारी ने दिया सहारा
इन दबावों के बीच विदेशी निवेशकों का पैसा रुपये के लिए बड़ा सहारा बना। एक्सचेंज के आंकड़ों के मुताबिक गुरुवार को विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) भारतीय शेयरों में नेट खरीदार रहे और उन्होंने ₹14,974.68 करोड़ के शेयर खरीदे।
घरेलू शेयर बाजार में शुरुआती कारोबार में मिला-जुला रुख रहा। सेंसेक्स 33 अंक चढ़कर 79,343.06 पर पहुंचा, जबकि निफ्टी 52.95 अंक फिसलकर 24,477.40 पर आ गया।
आगे कैसी रहेगी रुपये की चाल
मिराए एसेट शेयरखान के रिसर्च एनालिस्ट अनुज चौधरी के मुताबिक रुपया आगे पॉजिटिव रुख के साथ कारोबार कर सकता है। घरेलू बाजार की मजबूती और विदेशी निवेशकों का नया पैसा इसे सहारा दे सकता है। लेकिन रूस-यूक्रेन से जुड़ा जियोपॉलिटिकल तनाव और मिडिल ईस्ट के घटनाक्रम रुपये की बढ़त को सीमित कर सकते हैं।
आने वाले दिनों में रुपये की दिशा तीन बातों से तय होगी। विदेशी निवेशकों का पैसा लगातार आता रहता है या नहीं, क्रूड की कीमतें किधर जाती हैं और डॉलर कितना मजबूत रहता है।