सेबी की पाबंदी के बाद शंकर शर्मा सहित 23 लोग नहीं बेच पाएंगे Brightcom के शेयर

सेबी ने Brightcom Group के प्रीफरेंशियल शेयरों की जांच के बाद यह अंतरिम आदेश पास किया है। जांच में मार्केट रेगुलेटर को गड़बड़ियां मिली हैं जिसकी वजह से यह फैसला लिया गया

अपडेटेड Aug 23, 2023 पर 2:14 AM
सेबी ने Brightcom Group के प्रीफरेंशियल शेयरों की जांच के बाद यह अंतरिम आदेश पास किया है

दिग्गज निवेशक शंकर शर्मा सहित 23 लोग Brightcom Group के शेयर नहीं बेच पाएंगे। मार्केट रेगुलेटर सेबी ने 22 अगस्त को एक अंतरिम आदेश पास करके Brightcom के शेयरों की बिक्री पर रोक लगाई है। सेबी ने Brightcom Group के प्रीफरेंशियल शेयरों की जांच के बाद यह अंतरिम आदेश पास किया है।

सेबी को जांच में यह पता चला कि Brightcom Group के प्रीफरेंशियल शेयरों के आवंटन में हेरफेर किया गया है। जांच में यह भी पता चला कि Brightcom Group के पैसों को ठिकाने लगाने के लिए आवंटियों से शेयर एप्लिकेशन मनी के फर्जी रसीद लिए गए हैं। जांच में हैरान करने वाले खुलासे होने के बाद सेबी ने तत्काल Brightcom Group के शेयरों की बिक्री पर पाबंदी लगाने का अंतरिम आदेश पास कर दिया।

मार्केट रेगुलेटर सेबी ने Brightcom के MD और चेयरमैन सुरेश कुमार रेड्डी और इसके CFO नारायण राजू पर अगले आदेश तक किसी भी लिस्टेड कंपनी या उसकी सब्सिडियरी में डायरेक्टर या मैनेजर लेवल के पद संभालने पर रोक लगा दी है। इसके साथ ही सुरेश कुमार रेड्डी के कंपनी के शेयर बेचने पर भी पाबंदी लगा दी है।


सेबी ने अपने अंतरिम ऑर्डर में Brightcom को यह पक्का करने को कहा है कि ऑडिटर कंपनी P. Murali & Co. और PCN & Associates सहित उनके नए पुराने पार्टनर्स किसी भी तरह Brightcom या इसकी सहयोगी कंपनियों सेना जुड़े हों।

सेबी के ऑर्डर के मुताबिक, नोटिस नंबर 25 के तहत शंकर शर्मा को 37.77 रुपए प्रति वारंट के हिसाब से 1,50,00,000 वारंट जारी किए गए थे। इस हिसाब से शंकर शर्मा को कुल 56.66 करोड़ रुपए का पेमेंट करना होता। लेकिन कंपनी को 55.66 करोड़ रुपए की जगह सिर्फ 39.98 करोड़ रुपए ही मिले। यानि उसे सही वैल्यू से 16.67 करोड़ रुपए कम मिले हैं।

यहां तक कि 39.98 करोड़ रुपए के पेमेंट का कोई सबूत भी नहीं है।

सेबी के अंतरिम आदेश के मुताबिक, "Brightcom Group को शंकर शर्मा से 25.7936 करोड़ रुपए मिले थे। इसके बाद शंकर शर्मा ने 25 और 26 जुलाई 2023 को एक ईमेल भेजकर सेबी को बताया कि वारंट एप्लिकेशन मनी के तौर पर उन्होंने 14.19 करोड़ रुपए का पेमेंट Brightcom Group के HDFC Bank अकाउंट में किाय है। हालांकि शर्मा ने अपने पूरे बयान में रकम बताने के अलावा ट्रांजैक्शन की कोई डिटेल नहीं दी थी। इसकी वजह से यह वेरिफाई नहीं हो पाया कि शर्मा ने पेमेंट की है या नहीं। और फिलहाल इसकी जांच चल रही है। इसलिए ऐसा लग रहा है कि Brightcom Group को सिर्फ 39.98 करोड़ रुपए ही मिले हैं। शर्मा से कंपनी को पूरी रकम नहीं मिल पाई है। इस मामले में Brightcom Group के दावे झूठे हैं।"

सेबी के आदेश में ये भी कहा गया है कि रेगुलेटर ने आवंटित वारंट या शेयरों के बारे में शंकर शर्मा की तरफ से Brightcom Group को किए गए पमेंटे के बारे में बार-बार जानकारी और डॉक्यूमेंट्स मांगे हैं। लेकिन अभी भी सेबी को पूरे सबूत नहीं मिले हैं।

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