SEBI ने ओपन मार्केट बायबैक फिर से शुरू करने की इजाजत दी, 1 अगस्त से नए नियम लागू

सेबी ने स्टॉक एक्सचेंजों के जरिए होने वाले शेयर बायबैक के लिए अलग से ट्रेडिंग विंडो की जरूरत खत्म करने का भी फैसला किया है। पहले टैक्स के मामले में फर्क होने की वजह से अलग विंडो की शुरुआत की गई थी। सेबी का मानना है कि अब इसकी जरूरत नहीं रह गई है

अपडेटेड Jun 19, 2026 पर 6:27 PM
सेबी ने कहा है कि स्टॉक एक्सचेंजों के जरिए ओपन मार्केट बायबैक पहले से मौजूद बायबैक फ्रेमवर्क के तहत एक अतिरिक्त विकल्प होगा।

सेबी ने स्टॉक एक्सचेंजों के जरिए ओपन मार्केट शेयर बायबैक दोबारा शुरी करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। शेयर बायबैक के इस तरीके को अप्रैल 2025 में बंद कर दिया था। टैक्स के नियमों में बदलाव के बाद ऐसा किया गया था। 1 अगस्त से शेयर बायबैक का यह तरीका फिर से शुरू हो जाएगा।

ओपन मार्केट बायबैक एक अतिरिक्त विकल्प होगा

ओपन मार्केट बायबैक को 66 दिनों में पूरा करना होता है। बायबैक के लिए एलॉटेड कम से कम 40 फीसदी फंड का इस्तेमाल होना जरूरी है। सेबी ने कहा है कि स्टॉक एक्सचेंजों के जरिए ओपन मार्केट बायबैक पहले से मौजूद बायबैक फ्रेमवर्क के तहत एक अतिरिक्त विकल्प होगा।


टैक्स को लेकर अब बायबैक के तरीकों में फर्क नहीं रह गया है

रेगुलेटर ने यह भी कहा है कि बायबैक के अलग-अलग तरीकों के बीच टैक्स को लेकर फर्क अब खत्म हो गया है। टैक्स के संसोधित नियमों में इस फर्क को दूर कर दिया गया है। इससे उन कंपनियों को शेयर बायबैक का ऐलान करने में आसानी होगी, जिनके पास पर्याप्त कैश है। वे अपने शेयरहोल्डर्स को बायबैक ऑफर कर सकती हैं।

बायबैक के वैकल्पिक तरीके का दुरूपयोग नहीं होने देगा सेबी

रेगुलेटर यह सुनिश्चित करेगा कि बायबैक के वैकल्पिक तरीके का दुरूपयोग नहीं किया जाए। इसके लिए बायबैक पीरियड के दौरान ISIN लेवल पर प्रमोटर और प्रमोटर ग्रुप की होल्डिंग्स फ्रिज कर दी जाएगी। हालांकि, टेंडर ऑफर के जरिए बायबैक में प्रमोटर्स को पार्टिसिपेट करने की इजाजत होगी। सेबी ने यह भी फैसला किया है कि शेयर बायबैक करने वाली कंपनी को पब्लिक अनाउंसमेंट के एक वर्किंग दिन के अंदर शेयरहोल्डर्स को इलेक्ट्रॉनिक तरीके से नोटिफाय करना होगा।

बायबैक के लिए अलग ट्रेडिंग विंडों की भी नहीं पड़ेगी जरूरत

सेबी ने स्टॉक एक्सचेंजों के जरिए होने वाले शेयर बायबैक के लिए अलग से ट्रेडिंग विंडो की जरूरत खत्म करने का भी फैसला किया है। पहले टैक्स के मामले में फर्क होने की वजह से अलग विंडो की शुरुआत की गई थी। सेबी का मानना है कि अब इसकी जरूरत नहीं रह गई है। अब बायबैक के ट्रांजेक्शंस स्टॉक एक्सचेंजों के रेगुलर ट्रेडिंग मैकेनिज्म के तहत पूरे होंगे।

मर्चेंट बैंकर्स की अनिवार्य नियुक्ति की जरूरत भी खत्म

रेगुलेटर ने बायबैक ट्रांजेक्शंस के लिए मर्चेंट बैंकर्स की अनिवार्य नियुक्ति की जरूरत भी खत्म कर दी है। अब प्रोसिजर से संबंधित कई जिम्मेदारियां लिस्टेड कंपनियों, स्टॉक एक्सचेंजों, कंप्लायंस ऑफिसर्स और सेक्रेटेरियल ऑडिटर्स पर डाल दी गई है।

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