सेबी ने एल्गोरिदम-ट्रेडिंग के नियमों की एक बड़ी कमी दूर कर दी है, जिसका फायदा अवैध एल्गो प्रोवाइडर्स उठा सकते थे। इसके लिए मार्केट रेगुलेटर ने नियम में एक छोटा बदलाव किया है। सेबी ने इस बारे में 13 दिसंबर, 2024 को एक कंसल्टेशन पेपर पेश किया था। इसके बाद मनीकंट्रोल ने नियम में एक कमी को उजागर किया था। यह कमी मुख्य रूप से उस लिमिट से जुड़ा है, जिससे ज्यादा के ऑर्डर को एल्गो ऑर्डर माना जाता है।
4 फरवरी को संशोधित नियम जारी
SEBI ने बदलाव के बाद संशोधित नियम 4 फरवरी को जारी किया। इसमें मार्केट रेगुलेटर ने कहा है कि ब्रोकर्स के एप्लिकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस (API) के जरिए आने वाले सभी ऑर्डर्स के साथ एल्गो ऑर्डर का टैग होना जरूरी है। इसके लिए स्टॉक एक्सचेंज की तरफ से उपलब्ध कराए गए यूनिक आइडेंटिफायर का इस्तेमाल करना होगा। यह उस सिस्टम से पूरी तरह से अलग है, जिसके बारे में कंसल्टेशन पेपर में बताया गया था।
पहले नियम में यह कहा गया था
13 दिसंबर को जारी कंसल्टेशन पेपर में कहा गया था कि सिर्फ ऐसे ऑर्डर में टैग का इस्तेमाल करना होगा, जो तय लिमिट से ज्यादा के होंगे। इसमें कहा गया था कि ब्रोकर्स की तरफ से क्लाइंट्स को उपलब्ध कराए गए API के जरिए प्रति सेकेंड की तय लिमिट से ज्यादा के सभी ऑर्डर्स को एल्गो ऑर्डर माना जाएगा और इनमें एक्सचेंज की तरफ से उपलब्ध कराए गए यूनिक आइडेंटिफायर का टैग लगाना होगा।
अवैध एल्गो प्रोवाइडर्स पकड़ में नहीं आते
कंसल्टेशन पेपर के हिसाब से इसका मतलब यह था कि सिर्फ ऐसे ऑर्डर में एल्गो टैग लगाना जरूरी होगा जिन्हें एक खास स्पीड के साथ फायर किया जाएगा। इंडस्ट्री की अंदर का जानकारी रखने वालों ने मनीकंट्रोल को बताया था कि इससे कई अवैध एल्गो प्रोवाइडर्स पकड़ में आने से बच जाते। इसकी वजह यह है कि उनके ज्यादातर एल्गो में काफी कम ऑर्डर होते हैं। कई बार तो इनकी संख्या एक घंटे में 2 या 3 होती है। ये शायद ही कभी एक सेकेंड में कई ऑर्डर फायर करते हैं।
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सेबी ने फाइनल ड्राफ्ट नियम को पक्का कर दिया
इसका मतलब यह था कि अनरजिस्टर्ड एल्गो मार्केट रेगुलेटर की मॉनेटरिंग में आने से बच जाते। मनीकंट्रोल ने बताया था कि अगर ऐसे ऑर्डर की पहचान एल्गो ऑर्डर के रूप में नहीं होती तो इनके प्रोवाइडर्स को उन नियमों के पालन करने की जरूरत नहीं रह जाती, जिन्हें निवेशकों के हितों की रक्षा के लिए बनाया गया है। वे ऐसी स्ट्रेटेजी भी बेच सकते थे, जिन्हें समझना इनवेस्टर के लिए मुश्किल होता। सेबी के फाइनल ड्राफ्ट में यह कमी दूर कर दी गई है।