दोनों स्टॉक एक्सचेंजों में फिलहाल 600 SME कंपनियां लिस्टेड हैं और इन कंपनियों का मार्केट कैपिटल 2 लाख करोड़ रुपये के ऊपर है। हालांकि, सेबी के होल-टाइम मेंबर अश्विनी भाटिया का मानना है कि इस मामले में सावधानी बरतने की जरूरत है। भाटिया CII के फाइनेंसिंग 3.0 समिट के मौके पर बोल रहे थे। SME IPO पर भाटिया ने बताया, 'कोई भी इस मामले में मना नहीं कर रहा है। मैं एक बैंकर हूं और हमें जरूरत के हिसाब से नहीं बताया गया था।' उन्होंने कहा कि दुर्भाग्य से मौजूदा इको-सिस्टम में यह रवैया नहीं देखने को मिलता है। यहां तक कि चार्टर्ड एकाउंटेंट्स, मर्चेंट बैंकर और एक्सचेंज की भूमिका भी सही नहीं है।
भाटिया ने कहा, 'इन कंपनियों का अच्छा डॉक्टर बनने की जरूरत है। जब वे पारासीटामॉल पर जिंदा रह सकते हैं, तो उन्हें स्ट्रॉइड देने की जरूरत नहीं है।' भाटिया का कहना था कि इन कंपनियों के पास IPO के अलावा भी कई विकल्प उपलब्ध हैं, मसलन क्राउडफंडिंग, एंजेल इनवेस्टर्स, वेंचर कैपिटलिस्ट, माइक्रोफाइनेंस आदि।
AIF की 3 मुख्य कैटेगरी में ऐसे फंड शामिल हैं जो सामाजिक या आर्थिक रूप से फायदेमंद सेक्टरों में निवेश करते हैं। भाटिया ने कहा, ' सीधा IPO की तरफ जाने के बजाय एंजेल फंड या वेंचर फंड बेहतर रूट हो सकता है।' भाटिया का कहना था कि कुछ SMEs को लेकर अपेक्षाएं काफी ज्यादा है। उन्होंने कहा, ' कम समय में काफी ज्यादा ग्रोथ का आइडिया व्यावहारिक नहीं है। सीए और बैंकरों की भूमिका इन अपेक्षाओं को दुरुस्त करने की है।'
भाटिया का कहना था कि MSMEs की संभावनाओं को अनलॉक करने के लिए ज्यादा से ज्यादा पार्टनरशिप की जरूरत है।