
क्या आपसे भी कोई शेयर मार्केट एक्सपर्ट महीने भर में 1000 रुपए को एक लाख बनाने का दावा कर रहा है। और जब ये दावा ऑनलाइन या सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म पर हो रहा है तो सावधान हो जाइए क्योंकि मुनाफा तो छोड़िए आपकी पूंजी भी नहीं बचेगी। शेयर मार्केट में एक नए तरह का स्कैम चल रहा है। इसमें सेबी रजिस्टर्ड रिसर्च एनालिस्ट के नाम पर निवेशकों को चूना लगाया जा रहा है। अगर आप भी किसी मार्केट एक्सपर्ट के नाम पर भरोसा करके शेयरों में पैसा लगाते हैं तो अब पहले से ज्यादा अलर्ट रहने की जरूरत है।
वैसे तो सेबी से रजिस्टर्ड इनवेस्टमेंट एडवाइजर्स और रिसर्च एनालिस्ट्स निवेश की सलाह देने के लिए ऑथराइज्ड हैं। लेकिन जब कोई रेगुलेटर के नाम पर ही चूना लगाने लगे तो आप क्या करेंगे? इस तरह के स्कैम में होता ये है कि सेबी रजिस्टर्ड इनवेस्टमेंट एडवाइजर्स या रिसर्च एनालिस्ट के नाम पर फर्जी प्रोफाइल बनाकर जालसाज निवेशकों को लूट रहे हैं। अगर आप के साथ ऐसा वाकया हुआ है तो हमें कॉमेंट करके जरूर बताएं।
सोशल मीडिया ज्ञानवीरों से रहें सावधान!
अब निवेशकों के सामने दिक्कत ये है कि वो फोटो और नाम देखकर ये समझ नहीं पाते कि यह प्रोफाइल असली है या नकली। और पैसे गंवाने वाले निवेशकों की संख्या जैसे-जैसे बढ़ रही है वैसे वैसे सेबी में इनकी शिकायतें भी बढ़ती जा रही हैं। इन शिकायतों की वजह से रजिस्टर्ड इनवेस्टमेंट एडवाइजर्स और रिसर्च एनालिस्ट्स भी मुश्किल में हैं क्योंकि भले ही उन्हें स्कैम के बारे में कुछ पता ना हो लेकिन स्कैमर उनके नाम पर ही चूना लगा रहे हैं।
पैसा गंवाने के बाद क्या करें
मनीकंट्रोल ने इस मामले में कुछ लीगल एक्सपर्ट्स से बातचीत की। रजिस्टर्ड इनवेस्टमेंट एडवाइजर्स और रिसर्च एनालिस्ट को कानूनी सलाह देने वाले कंपनी सेक्रेटरी आनंद कनकनी ने बताया कि ऐसे स्कैम में नाम फंसने के बाद रिसर्च एनालिस्ट्स को सबसे पहले क्या करना चाहिए। इस तरह के किसी भी स्कैम का पता चलते ही सबसे पहले साइबर क्राइम पोर्टल, सेबी और बीएसई एडमिनिस्ट्रेशन एंड सुपरविजन यानि BASL को इंफॉर्म करना चाहिए। इसके अलावा उन्हें अपने सभी क्लाइंट्स को भी इसकी जानकारी तुरंत देनी चाहिए।
मार्केट एक्सपर्ट्स को भी लेना होगा एक्शन
इकोनॉमिक लॉ प्रैक्टिस के पार्टनर विनोद जोसफ ने कहा कि सेबी ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई करता है, क्योंकि ऐसे मामले हो सकते हैं जिनमें इंटरमीडियरी ने ऐसे फ्रॉड को अंजाम देने के लिए थर्ड पार्टी से सहयोग किया हो। इंटरमीडियरी थर्ड पार्टी को अपने नाम का इस्तेमाल करने की इजाजत दे सकता है और बदले में कुछ पैसा मांग सकता है। उन्होंने कहा कि सेबी इस बात का पता कैसे लगाएगा कि इंटरमीडियरी और जालसाजों में मिलीभगत नहीं है।
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