अगस्त में स्टॉक मार्केट में काफी उतारचढ़ाव के बावजूद सेंसेक्स नई ऊंचाई पर पहुंच गया। लगातार 12 सत्रों में आई तेजी से सेंसेक्स न सिर्फ गिरावट की भरपाई करने में कामयाब रहा बल्कि यह लाइफ टाइम हाई पर पहुंच गया। अब बड़ा सवाल यह है कि क्या सितंबर में स्टॉक मार्केट की यह तेजी जारी रहेगी? कई एनालिस्ट्स ने निवेशकों को हाई वैल्यूएशन से सतर्क किया है। पिछले कु समय से मार्केट की वैल्यूएशन को लेकर चिंता जताई जा रही है। पिछले 10 साल के ट्रेंड को देखा जाए तो सितंबर ने निवेशकों को निराश किया है।
सितंबर में 7 बार निगेटिव रिटर्न
2014 से अब तक सेंसेक्स (Sensex) ने सितंबर में 7 बार निगेटिव रिटर्न दिया है। इस दौरान एवरेज लॉस 0.74 फीसदी रहा है। 2023, 2021 और 2019 अपवाद के साल रहे हैं। इन तीन सालों में सेंसेक्स चढ़ा है। इसने 2023 में 1.5 फीसदी, 2021 में 2.7 फीसदी और 2019 में 3.6 फीसदी रिटर्न दिया है। अगर इस पॉजिटिव रिटर्न को हटा दिया जाए तो सितंबर में औसत लॉस 2.18 फीसदी रहा।
इंटरेस्ट रेट में कमी की उम्मीद के साथ शुरुआत
इस बार सितंबर की शुरुआत अमेरिका में इंटरेस्ट रेट में कमी की उम्मीद के साथ हुई है। फेडरल रिजर्व तीसरे हफ्ते में इंटरेस्ट रेट में कमी कर सकता है। इस दौरान मार्केट में उतारचढ़ाव दिख सकता है। अमेरिका में अगस्त के रोजगार के डेटा इस हफ्ते के अंत तक आएंगे। इसका असर भी अमेरिकी स्टॉक मार्केट पर दिखेगा। फेडरल रिजर्व पिछले महीने सितंबर की अपनी मॉनेटरी पॉलिसी में इंटरेस्ट रेट में कमी का संकेत दे चुका है।
मार्केट में आ सकता है मामूली करेक्शन
इधर, इंडियन मार्केट में एनालिस्ट्स मार्केट में मामूली करेक्शन का अनुमान जता रहे हैं। इसकी वजह यह है कि मार्केट लगातार 12 सत्रों से चढ़ रहा है। इसलिए निवेशक कुछ मुनाफावसूली कर सकते हैं। जहां तक विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की बात है तो अभी उनका रुख साफ नहीं है। लेकिन, MSCI EM Index के एडजस्टमेंट से आने वाले हफ्तों में इंडिया में कुछ विदेशी निवेश दिख सकता है।
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अमेरिका में इंटरेस्ट घटने के असर दुनियाभर में पड़ेगा
इंडिपेंडेंट एनालिस्ट अजय बग्गा ने कहा, "इस हफ्ते मार्केट फ्लैट से लेकर थोड़ा नरम रह सकता है। इस महीने मार्केट पर सबसे ज्यादा असर अमेरिका में फेडरल रिजर्व के इंटरेस्ट रेट के फैसले पर पड़ेगा। फेडरल रिजर्व अपनी मॉनेटरी पॉलिसी की बैठक के नतीजों का ऐलान 18 सितंबर को करेगा। अगर अमेरिकी केंद्रीय बैंक इंटरेस्ट रेट घटाता है तो इसे इंटरेस्ट रेट में कमी की साइकिल की शुरुआत माना जाएगा। इसका दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों, करेंसीज, कैरी ट्रेड और दूसरे एसेट्स पर असर पड़ेगा। "