FIIs Holding Stocks: भारतीय मार्केट में कुछ ऐसे स्टॉक्स रहे, जिनमें विदेशी निवेशकों ने चार तिमाही तक ताबड़तोड़ पैसे डाले। आम रुझान की बात करें तो विदेशी निवेशक भारतीय मार्केट से अपना पैसा तेजी से निकाल रहे हैं। एक साल में उन्होंने करीब $3800 करोड़ के शेयरों की नेट बिक्री की। महंगे वैल्यूएशन, कंपनियों की कमजोर कमाई, वैश्विक स्तर पर कारोबारी अनिश्चितताएं और जियो-पॉलिटिकल टेंशन के चलते उन्होंने धड़ाधड़ शेयर बेचे। कच्चे तेल में उबाल, महंगाई, और देश में AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) से जुड़े निवेश के मौकों की कमी ने विदेशी निवेशकों के सेंटिमेंट पर असर डाला।
FIIs का किन स्टॉक्स पर भरोसा कायम
धड़ाधड़ बिकवाली के बावजूद विदेशी निवेशकों ने एमटीएआर टेक्नोलॉजीज, नॉलेज मरीन एंड इंजीनियरिंग वर्क्स, वर्चुओसो ऑप्टोइलेक्ट्रॉनिक्स, साउथ इंडियन बैंक, पॉलीकैब इंडिया, कमिटेड कार्गो केयर, यूपीएल, शांति एजुकेशनल इनिशिएटिव्स, ग्रेट ईस्टर्न शिपिंग कंपनी, वारी एनर्जीज, हिताची एनर्जी इंडिया, वेदांता, टाटा कैपिटल, श्रीराम प्रॉपर्टीज, डेक्कन सीमेंट्स, बैंक ऑफ महाराष्ट्र और हिंडाल्को इंडस्ट्रीज जैसी कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी लगातार बढ़ाई।
विदेशी निवेशकों की सबसे अधिक होल्डिंग MTAR टेक में बढ़ी जोकि सालाना आधार पर 7.6% से बढ़कर 24.8% हो गई। इस दौरान नॉलेज मरी एंड इंजीनियरिंग वर्क्स में उनकी होल्डिंग 11.6 पर्सेंटेज प्वाइंट बढ़कर 12.1% और वर्चुओसो ऑप्टोइलेक्ट्रॉनिक्स में 9.1 पर्सेंटेज प्वाइंट बढ़कर 11.3% तक पहुंच गया। वहीं साउथ इंडियन बैंक, पॉलीकैब इंडिया, कमिटेड कार्गो केयर, यूपीएल, शांति एजुकेशनल इनिशिएटिव्स, ग्रेट ईस्टर्न शिपिंग कंपनी और वारी एनर्जीज में भी विदेशी निवेशकों की होल्डिंग चार तिमाहियों के दौरान 5.9 पर्सेंटेज प्वाइंट्स से 7.8 पर्सेंटेज प्वाइंट के बीच बढ़ी।
इन सबके अलावा विदेशी निवेशकों की चार तिमाही में आरएंडबी डेनिम्स, कमिंस इंडिया, स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAIL), मैक्स फाइनेंशियल सर्विसेज़, सीमेंस एनर्जी इंडिया, यूफ्लेक्स, थायरोकेयर टेक्नोलॉजीज़, साल्जर इलेक्ट्रॉनिक्स, तमिलनाडु मर्केंटाइल बैंक, सेगल इंडिया, वंडर इलेक्ट्रिकल्स, टीएसएफ इन्वेस्टमेंट्स, अपार इंडस्ट्रीज, इंडियन बैंक, अहलूवालिया कॉन्ट्रैक्ट्स (इंडिया), हिमाद्री स्पेशलिटी केमिकल, ऑप्टिमस इन्फ्राकॉम, एलएंडटी फाइनेंस, टाटा टेक्नोलॉजीज, टेक्समैको इंफ्रास्ट्रक्चर एंड होल्डिंग्स, टीटागढ़ रेल सिस्टम्स, एल्केम लैबोरेटरीज़, हनीवेल ऑटोमेशन इंडिया, नितिन स्पिनर्स और बजाज हेल्थकेयर में भी होल्डिंग बढ़ी है।
एक्सपर्ट्स के मुताबिक भले ही विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयरों में अपना निवेश काफी कम कर दिया है, लेकिन वे पूरी तरह से बाजार से बाहर नहीं निकले हैं। इसकी बजाय इस बिकवाली से भारतीय मार्केट से पूरी तरह हटने के बजाय एआई से जुड़े मौकों की तरफ अपने पैसों को रणनीतिक रूप से फिर से लगाने का संकेत मिलता है। मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के मुताबिक इक्विनॉमिक्स रिसर्च के फाउंडरजी चोक्कालिंगम का कहना है कि विदेशी निवेशकों ने मुख्य रूप से लॉर्ज-कैप स्टॉक्स में बिकवाली की और ब्रोडर लेवल पर कुछ शेयरों में खरीदारी जारी रखी। उनका कहना है कि कई स्मॉल-कैप और मिड-कैप कंपनियां शानदार वैल्यूएशन पर मिल रही थी जिसका फायदा विदेशी निवेशकों ने उठाया।
जून तिमाही में विदेशी निवेशक नेट सेलर्स बने रहे। निफ्टी 100 की 80 कंपनियों के जारी शेयरहोल्डिंग पैटर्न के हिसाब से 63 कंपनियों में विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी हल्की हुई तो 17 में बढ़ी। विदेशी निवेशकों की बिकवाली के झटके को कुछ हद तक DII (घरेलू संस्थागत निवेशकों) ने संभालने की कोशिश की और उन्होंने 55 कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई तो 24 में हिस्सेदारी घटाई।
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