दिग्गज निवेशक वॉरेन बफेट ने शेयर मार्केट्स के डेरीवेटिव्स को सामूहिक विनाश का वित्तीय हथियार कहा है। यह बात बेवजह नहीं कही गई है। इसके पीछे कुछ अहम कारण हैं। हमें डेरीवेटिव्स में हाथ आजमाने के पहले कुछ सावधानियां जरूर बरतनी चाहिए। इस हफ्ते Archegos कैपिटल द्वारा 20 अरब डॉलर की forced fire sale सुर्खियों में रही। इस घटना से हमें बहुत कुछ सीखने को भी मिला है जिसको ध्यान में रखकर हम बाजार में अपना जोखिम कम कर सकते हैं।
Archegos मामले की वजह से तमाम वित्तीय ससंस्थाएं और बैंक मुश्किल में आ गए। हालांकि इस तरह के जटिल इन्वेस्टमेंट रणनीतियों से व्यक्तिगत निवेशकों का कोई खास मतलब नहीं होता। लेकिन इस घटना से सामान्य निवेशकों को भी बहुत कुछ सीखने को मिलता है।
इक्विटी मार्केट में लंबे नजरिए से निवेश करें और कर्ज लेकर निवेश न करें.
बता दें कि डेरेवेटिव्स के तहत लीवरेज्ड पोजीशन ली जा सकती है। यानी एक लाख रुपये रख के आप 5 लाख रुपये की पोजीशन ले सकते हैं। ऐसा आप इस उम्मीद में करते हैं कि आपने जिस भी इंस्ट्रूमेंट में पैसा लगाया है, उसमें बढ़ोतरी होगी। लेकिन कई बार इसका उल्टा हो जाता है। आपने जिस भी अंडरलेइंग में पैसा लगाया है, उसकी चाल उल्टी भी पड़ सकती है। ऐसी स्थिति में आपको 5 गुना घाटा होता है।
प्लान रूपी (Plan Rupee Investment Services) के अमोल जोशी का कहना है कि अगर स्टॉक की कीमतें आपकी उम्मीद के विपरीत दिशा अपना लेती हैं तो आपके पोर्टफोलियो की वैल्यू घट जाएगी। जानकारों का कहना है कि ट्रेडिंग के लिए डेरिवेटिव्स अथवा उधार के फंड का उपयोग करना खतरनाक साबित हो सकता है। इससे बचने की कोशिश करनी चाहिए।
जानाकरों का कहना है कि डेरिवेटिव्स में तभी कारोबार करना चाहिए जब आपको उसके बारे में अच्छी तरह से जानकारी हो। ऐसा न होने पर आपको नुकासन उठाना पड़ सकता है। जानकारों का कहना है कि Archegos की घटना से हमें यह सीख मिलती है कि उधार के पैसों से ट्रेडिंग न करें।
बहुत सारे व्यक्तिगत निवेशक ट्रेडिंग और निवेश के बीच फर्क नहीं कर पाते। शेयर बाजार में जोखिम से बचने के लिए निवेशकों को लंबे नजरिए से निवेश करना चाहिए। लंबे नजरिए का मतलब है कि कम से एक साल ज्यादा की अवधि के लिए निवेश करना चाहिए। इस बात का ध्यान रखें कि डेरिवेटिव अथवा मार्जिन ट्रेडिंग शॉर्ट ट्रेडिंग होती है। इसको आपको निवेश नहीं समझना चाहिए।
बड़े दिग्गज निवेशकों की नकल ना करें
दुनिया में ऐसे कई दिग्गज निवेशक हैं, जिनकी हम नकल करने की कोशिश करते हैं। जो वो खरीदते हैं, उसको हम खरीदने की कोशिश करते हैं और जो वो बेचते हैं, उसको हम बेचने की कोशिश करते हैं। शेयर बाजार की शब्दावली में इसे coat-tail investing या cloning कहा जाता है।
टेक्नोलॉजी के इस जमाने में हमें तमाम दिग्गज अपनी रणनीति के बारे में बताते दिखते हैं। लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि जो कुछ हमें दिखाई देता है, या बताया जाता है, यह पूरा सच नहीं होता है। यह किसी के लिए संभव नहीं है कि हम इन सुपर इन्वेस्टर की पूरी रणनीति को समझ या जान सकें।
Sukhanidhi Investment Advisors के Vinayak Savanur का कहना है कि दिग्गज निवेशकों का अंधानुकरण न करें। कई बार इनकी भी रणनीतियां गलत साबित होती दिखी हैं। किसी भी प्रोडक्ट के बारे में अगर आपको जानकारी नहीं है तो उसमें कतई निवेश न करें।
पोर्टफोलियों को डाइवर्सिफाई करें
जब कोई खास असेट क्लास या खास सेक्टर या खास शेयर अच्छा प्रदर्शन करता है तो निवेशक ज्यादा से ज्यादा पैसा उसी शेयर में लगाना शुरू कर देते हैं। Archegos ने भी यही गलती की, उसने उधार लिए गए पैसे को टेक्नोलॉजी शेयरों में निवेशित कर दिया। जब सब कुछ आपकी उम्मीद के अनुरूप रहा तो आपको फायदा मिलता रहा, लेकिन जैसे ही उस खास सेक्टर या शेयर के लिए जिसमें आपने अपना अधिकांश निवेश किया है, स्थितियां बदली वैसे ही छुपने के लिए आपको स्थान ढूंढना मुश्किल हो गया, कुछ ऐसा ही Archegos के साथ भी हुआ।
इस स्थिति से बचने के लिए निवेशकों को अपने पोर्टफोलियों में डाइवर्सिफिकेशन बनाकर रखना चाहिए। सारा पैसा किसी खास शेयर, किसी खास सेक्टर या खास असेट क्लास पर ही न लागाकर उसका थोड़ा-थोड़ा हिस्सा स्टॉक, बॉन्ड, रियल एस्टेट में बांट कर लगाना चाहिए। निवेशक को अपनी जोखिम उठाने की क्षमता को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग असेट क्लास और सेक्टर में पैसा लगाना चाहिए।
इसके साथ ही अपने पोर्टफोलियो की समय-समय पर नियमित तौर पर री-बैलेसिंग और समीक्षा जरूर करते रहें। ऐसा करने से आप किसी असेट क्लास में एकाएक कोई बड़ी मुश्किल आने पर आप उससे अपना बचाव कर सकते हैं। किसी खास सेक्टर या सेगमेंट में जरूरत से ज्यादा निवेश आपके पोर्टफोलियो के रिटर्न को नुकसान पहुंचा सकता है। अतीत का अनुभव हमें यही सिखाता है।