चीन (China) ने अमेरिका (US) को धमकी दी है। उसने कहा है कि अमेरिका को चीन को लेकर अपनी गलत नीतियां बदल लेनी चाहिए। अगर अमेरिका ऐसा नहीं करता है तो टकराव और संघर्ष की स्थिति बनेगी। चीन (Foreign minister of China) के विदेश मंत्री ने मंगलवार को यह बयान दिया। यूक्रेन क्राइसिस को खत्म करने के लिए बातचीत पर जोर देते हुए उन्होंने यह बात कही। विदेश मंत्री Qin Gang ने बीजिंग में एक न्यूज कॉन्फ्रेंस में कहा कि अमेरिका नियमबद्ध तरीके से प्रतियोगिता करने के बजाय चीन को दबाने की कोशिश कर रहा है। अमेरिका और चीन के रिश्ते लंबे समय से खराब बने हुए हैं। पिछले साल फरवरी में यूक्रेन पर रूस के हमले शुरू होने के बाद से यह दरार और बढ़ गई है।
चीन को लेकर अमेरिकी की सोच गलत
Qin ने कहा, "चीन को लेकर अमेरिका की सोच और नजरिया सही नहीं है। वह चीन को अपना मुख्य प्रतिद्वद्वी मानता है। वह चीन को सबसे बड़ी भोगौलिक चुनौती के रूप में भी देखता है। यह ठीक वैसा ही है जैसे शर्ट के पहले बटन को गलत लगा लिया जाए।" चीन और अमेरिका के बीच कई मसलों को लेकर टकराव की स्थिति है। इनमें ताइवान, आपसी व्यापार और यूक्रेन शामिल हैं। लेकिन, पिछले महीने अमेरिका के एक बैलून को चीन का जासूसी उपकरण बता कर नष्ट कर देने के बाद रिश्ते और खराब हो गए हैं।
अमेरिका और चीन में टकराव के भयाह नतीजे होंगे
चीन के विदेशमंत्री ने कहा कि अमेरिका कहता है कि वह चीन से रिश्तों को लेकर गार्डरेल्स बना रहा है। लेकिन, व्यावहारिक रूप से इसका मतलब यह है कि हमले की स्थिति में चीन शब्दों और कार्रवाई के रूप में किसी तरह से जवाब नहीं देगा। लेकिन, यह पूरी तरह से असंभव है। उन्होंने कि अगर अमेरिका अपनी पॉलिसी बदलता नहीं है या गलत रास्ते पर चलने से बाज नहीं आता है तो गार्डरेल्स गाड़ी को पटरी से उतरने से रोक नहीं पाएंगे। इससे टकराव और संघर्ष की स्थिति पैदा होगी और इसका भयावह नतीजों का सामना कौन करेगा?
यूक्रेन संकट के पीछे अदृश्य हाथ
Qin ने कहा कि यूक्रेन में संघर्ष बढ़ाने के पीछे एक अदृश्य हाथ है। माना जा रहा है कि उन्होंने अमेरिकी को लेकर यह कटाक्ष किया। लेकिन, सीधे तौर पर अमेरिका का नाम नहीं लिया। उन्होंने कहा कि यह अदृश्य हाथ कुछ भूराजनीतिक उद्देश्यों को पूरा करने के लिए यूक्रेन क्राइसिस का इस्तेमाल कर रहा है। यूक्रेन को लेकर अमेरिका और चीन के रुख उलट रहे हैं। अमेरिका और यूरोपीय देशों ने यूक्रेन पर हमले के बाद रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाए हैं। उधर, चीन इसे रूस का हमला तक मानने को तैयार नहीं है। उसने रूस को हमलवार मानने से साफ तौर पर इनकार किया है।