भारत और चीन 'Pillar 1' टैक्स डील में डाल रहे हैं बाधा : अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी जेनेट येलेन

येलेन ने कहा कि अधिकांश देश इन मुद्दों पर अमेरिकी रुख का समर्थन कर रहे हैं। वहीं, हमें भारत के साथ समस्या है। भारत हमारे साथ बातचीत नहीं करेगा। येलेन ने आगे कहा कि वे इस सौदे के लिए जून के अंत की समय सीमा को पूरा करने के लिए सक्रिय रूप से बातचीत में लगी हुई हैं

अपडेटेड May 25, 2024 पर 3:05 PM
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टैक्स डील का दूसरा पिलर, कॉर्पोरेट मुनाफे पर 15 फीसदी ग्लोबल न्यूनतम कर कई देशों द्वारा अलग से लागू किया जा रहा है, लेकिन अमेरिकी कांग्रेस ने इसकी पुष्टि नहीं की है

अमेरिकी ट्रेजरी सचिव जेनेट येलेन ने शुक्रवार को कहा कि वह अत्यधिक लाभदायक बहुराष्ट्रीय कंपनियों पर केंद्रित ग्लोबल कॉर्पोरेट टैक्स डील के एक हिस्से को बचाने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन भारत अमेरिकी हितों के लिए अहम मुद्दों में शामिल होने से इनकार कर रहा है। येलेन ने इटली में जी7 फाइनेंल लीडर्स की बैठक के मौके पर एक साक्षात्कार में रॉयटर्स से कहा कि चीन भी 2021 में सैद्धांतिक रूप से मंजूर ओईसीडी कॉर्पोरेट टैक्स सौदे के "पिलर 1" टैक्स डील को अंतिम रूप देने के लिए हुआ वार्ता में अनुपस्थित रहा है जिसमें दुनिया के 140 देश शामिल हैं।

येलेन ने आगे कहा कि वे इस सौदे के लिए जून के अंत की समय सीमा को पूरा करने के लिए सक्रिय रूप से बातचीत में लगी हुई हैं। उन्होंने कहा "हम इसे लागू करने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं।" इससे पहले शुक्रवार को, इटली के वित्त मंत्री जियानकार्लो जियोर्जेटी ने अमेरिका, भारत और चीन की आपत्तियों का हवाला देते हुए संवाददाताओं से कहा कि पिलर 1 वार्ता विफल होने वाली है।

बता दें कि पिलर 1 वार्ता का उद्देश्य मुख्य रूप से यू.एस.-आधारित डिजिटल कंपनियों पर कर लगाने के अधिकार को फिर तय करना है, जिससे उन देशों में लगभग 200 बिलियन डॉलर के कॉर्पोरेट मुनाफे पर कर लगाया जा सकेगा जहां कंपनियां व्यापार करती हैं।


टैक्स डील का दूसरा पिलर, कॉर्पोरेट मुनाफे पर 15 फीसदी ग्लोबल न्यूनतम कर कई देशों द्वारा अलग से लागू किया जा रहा है, लेकिन अमेरिकी कांग्रेस ने इसकी पुष्टि नहीं की है।

येलेन ने कहा कि इस बातचीत में अमेरिका के लिए दो "रेड लाइन" इश्यू हैं, जो ट्रांसफर प्राइसिंग और ट्रांसफर प्राइसिंग की गणना को सरल बनाने के लिए "एमाउंट बी" सिस्टम से संबंधित हैं। जबकि अधिकांश देश इन बिंदुओं पर अमेरिका के रुख से सहमत हैं, भारत इन मुद्दों पर बात करने के लिए तैयार नहीं है।

गौरतलब है कि पिलर 1 वार्ता के विफल होने से कुछ देशों में डिजिटल सेवा करों की वापसी हो सकती है और संभावित ट्रेड तनाव फिर से बढ़ सकता है।

 

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