साल 2024 के लिए नोबेल शांति पुरस्कार का ऐलान हो गया है। जापानी संगठन निहोन हिडानक्यो को मिला है। नॉर्वेजियन नोबेल समिति ने कहा कि संगठन को ये पुरस्कार परमाणु हथियारों के खिलाफ लंबी मुहिम चलाने के लिए दिया जा रहा है। नॉर्वेजियन नोबेल समिति को इस साल के नोबेल शांति पुरस्कार के लिए कुल 286 लोगों ने अप्लाई किया था। जिसमें से 89 संगठन हैं। पिछली बार यानी साल 2023 में ईरानी पत्रकार और मानवाधिकार कार्यकर्ता नरगिस मोहम्मदी को शांति के लिए नोबेल पुरस्कार मिला था।
जापानी संगठन निहोन हिडानक्यो हिरोशिमा और नागासाकी पर हुए परमाणु हमले में बचे लोगों की देखभाल काम करता है। बम से बचे लोगों के जमीनी स्तर के आंदोलन को हिबाकुशा के नाम से भी जाना जाता है। जापान का यह संगठन इस बात को ध्यान में रखते हुए काम कर रहा है कि परमाणु हथियारों का इस्तेमाल दोबारा कभी नहीं किया जाना चाहिए।
निहोन हिडानक्यो का गठन कब हुआ था?
बता दें कि जापानी संगठन निहोन हिडानक्यो गठन साल 1956 हुआ था। इसका मकसद परमाणु हथियारों से होने वाले नुकसान को लेकर दुनिया भर में जगरूकता फैलाना है। नोबेल समिति ने परमाणु हथियारों के खिलाफ आवाज उठाने को लेकर निहोन हिडानक्यो की तारीफ भी की है। अगले साल हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु बम गिराए जाने के 80 साल पूरे हो जाएंगे। जिसमें करीब 1.20 लाख लोगों की मौत हो गई थी। उसके बाद के कुछ सालों तक हजारों लोग चोटों और रेडिएशन के संपर्क में आने की वजह से काल के गाल में समा गए थे। नोबेल समिति ने कहा कि इस साल नोबेल शांति पुरस्कार निहोन हिडांक्यो को देते हुए हम उन सभी जीवित बचे लोगों को सम्मानित करना चाहते हैं। जिन्होंने दर्दनाक यादों के बावजूद शांति का विकल्प चुना है।
इस शख्स को दो बार मिल चुका है नोबेल पुरस्कार
अमेरिका के पोर्टलैंड में जन्मे लिनस पॉलिंग दुनिया के एकमात्र ऐसे व्यक्ति हैं। जिन्हें दो-दो नोबेल पुरस्कार मिल चुके हैं। एक नोबेल प्राइज उन्हें केमिस्ट्री में मिला था। वहीं दूसरा शांति के लिए मिला था। नोबेल प्राइज के आधिकारिक सोशल मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने रासायनिक बंधन को समझने और उसको डेस्क्राइब करने के लिए क्वांटम मैकेनिक्स का उपयोग किया था। बाद में उन्होंने परमाणु हथियारों के खिलाफ जोरदार अभियान चलाया। परमाणु परीक्षण पर पाबंदी लगाने के लिए एक पिटीशन फाइल की थी।