5G के लिए भारी निवेश की जरूरत, टेलीकॉम कंपनियां चाहती हैं सस्ता स्पेक्ट्रम

टेलीकॉम कंपनियों की संस्था COAI के मुताबिक उन्हें टावर्स को फाइबर से लैस करने के लिए 2.2 लाख करोड़ और 4 साल में 15 लाख टावर लगाने के लिए 2.5 लाख करोड़ निवेश की जरूरत पड़ेगी।

अपडेटेड Apr 02, 2022 पर 12:57 PM
टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर में भारत फिलहाल कई देशों से पीछे है।

सरकार देश में 5G रोल आउट की तैयारियों में जुटी है लेकिन इसके लिए प्रयाप्त इंफ्रास्ट्रक्चर नदारद है, ऐसे में 5G को सफल बनाने लिए कंपनियों को खासतौर पर टावर्स की संख्या बढ़ाने और फाइबर बिछाने पर भारी भरकम निवेश की ज़रूरत पड़ेगी। जो कि 5G रोल आउट में सबसे बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।

सरकारी प्लान के मुताबिक कुछ महीनों में 5G स्पेक्ट्रम नीलामी की जाएगी। टेलीकॉम कंपनियां स्पेक्ट्रम के प्राइस बैंड को सस्ता करने की गुहार लगा चुकी हैं लेकिन समस्या बस इतनी नहीं है। टेलीकॉम कंपनियों को अगले 4 साल में करीब 5 लाख करोड़ के निवेश की जरूरत पड़ेगी।

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टेलीकॉम कंपनियों की संस्था COAI के मुताबिक उन्हें टावर्स को फाइबर से लैस करने के लिए 2.2 लाख करोड़ और 4 साल में 15 लाख टावर लगाने के लिए 2.5 लाख करोड़ निवेश की जरूरत पड़ेगी। ऐसे में ये सवाल लाजमी है कि क्या भारतीय टेलीकॉम कंपनियों के पास 5G इंफ़्रा पर खर्च करने के लिए इतना फण्ड है?

टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर में भारत फिलहाल कई देशों से पीछे है। आंकड़ों के मुताबिक अमेरिका जापान और चीन जैसे देशों में 80-90% टावर्स फाइबर से लैस हैं। वही भारत में ये अनुपात करीब 33% है। जानकारों का मानना है कि देश में कई गुना बढ़ता डाटा कंजम्पशन टेलीकॉम कंपनियों के लिए भारी कमाई का संकेत देता है लेकिन इस कमाई के लिए बड़ा खर्च भी करना होगा।

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