विदेश में बस चुकी बेटी को क्या भारत में पिता की खेती की जमीन में हिस्सा मिलेगा? जानिए क्या है नियम

पिता की संपत्ति में बेटी को हिस्सेदारी का अधिकार हिंदू सक्सेशन एक्ट, 1956 के तहत मिलता है। अगर मृत्यु से पहले पिता ने वसीयत बनाई है तो उनकी संपत्ति में उन लोगों को हिस्सा मिलेगा, जिनके नाम वसीयत में होंगे

अपडेटेड Oct 21, 2026 पर 7:00 PM
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अगर पिता का निधन वसीयत बनाने से पहले हो जाता है तो उनकी संपत्ति पर हिंदू सक्सेशन एक्ट, 1956 का सेक्शन 8 लागू होता है।

कई परिवार में बेटी या बेटे विदेश में बस जाते हैं। उन्हें दूसरे देश की नागरिकता मिल जाती है। सवाल है कि क्या ऐसे मामले में बेटी को भारत में अपने पिता की जमीन में हिस्सा मिलेगा? मनीकंट्रोल ने यह सवाल मुंबई के मशहूर टैक्स एक्सपर्ट और सीए बलवंत जैन से पूछा।

 हिंदू सक्सेशन एक्ट, 1956 के प्रावधान

जैन ने कहा कि सबसे पहले यह जान लेना जरूरी है कि पिता की संपत्ति में बेटी को हिस्सेदारी का अधिकार हिंदू सक्सेशन एक्ट, 1956 के तहत मिलता है। अगर मृत्यु से पहले पिता ने वसीयत बनाई है तो उनकी संपत्ति में उन लोगों को हिस्सा मिलेगा, जिनके नाम वसीयत में होंगे। अगर पिता का निधन वसीयत बनाने से पहले हो जाता है तो उनकी संपत्ति पर हिंदू सक्सेशन एक्ट, 1956 का सेक्शन 8 लागू होगा।


संपत्ति में बेटी के अधिकार का कानून 2005 में

यह कानून हिंदू सक्सेशन एक्ट, 1956 लागू होने के बाद से वजूद में है। लेकिन, हिंदू अविभाजित परिवार (HUF) की संपत्ति में बेटी को अधिकार सितंबर 2005 से मिला है। हिंदू सक्सेशन एक्ट के सेक्शन 8 के मुताबिक, अगर किसी हिंदू व्यक्ति की मौत वसीयत बनाने से पहले हो जाती है तो उसकी संपत्ति में क्लास I उत्तराधिकारियों की बराबर हिस्सेदारी होगी। और यह निधन के तुरंत बाद प्रभावी होगा। बेटी क्लास I उत्तराधिकारी में शामिल है। इसलिए उसे संपत्ति में उतना ही हिस्सा मिलेगा, जितना बेटे को मिलेगा। अगर बेटी नॉन-रेजिडेंट या नॉन-इंडियन सिटीजन है तो भी पिता की संपत्ति में उसके अधिकार पर किसी तरह का असर नहीं पड़ेगा।

नॉन-रेजिडेंट के मामले में FEMA के प्रावधान

नॉन-रेजिडेंट के संपत्ति में अधिकार के मामले में जो दूसरा कानून लागू होता है वह फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट (FEMA) से जुड़ा है। FEMA के तहत, किसी NRI या OCI को भारत में खेती की जमीन, फार्महाउस या प्लांटेशन प्रॉपर्टी खरीदने की इजाजत नहीं है। हालांकि, वह FEMA के तहत खेती की जमीन सहित कोई अचल संपत्ति उत्तराधिकार के जरिए भारत के किसी नागरिक से हासिल कर सकता है।

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राज्य खेती की जमीन के मामले में बना सकता है कानून

तीसरा कानून जो खेती की जमीन में उत्तराधिकारी के अधिकार के मामले में लागू होता है वह राज्य का कानून है। चूंकि खेती राज्य का विषय है, जिससे राज्य को खेती की जमीन से जुड़ा कानून बनाने का अधिकार है। इसमें उत्तराधिकार का मसला भी शामिल है। खेती की जमीन पर उत्तराधिकारी के अधिकारों के मामले राज्यों के ऐसे कानून को हिंदू सक्सेशन एक्ट, 1956 पर वरीयता हासिल है। सामान्य प्रॉपर्टी के मामले में हिंदू सक्सेशन एक्ट के तहत बेटियों को उतना ही अधिकार हासिल है, जितना बेटों को हासिल है। लेकिन, स्पेशल स्टेट एग्रीकल्चरल टेनेंसी लेजिस्लेशन उत्तराधिकार के अलग नियम बना सकता है।

डिसक्लेमर: मनीकंट्रोल पर एक्सपर्ट्स की तरफ से व्यक्त विचार उनके अपने विचार होते हैं। ये वेबसाइट या इसके मैनेजमेंट के विचार नहीं होते। मनीकंट्रोल की यूजर्स को सलाह है कि उन्हें निवेश का फैसला लेने से पहले सर्टिफायड एक्सपर्ट्स की राय लेनी चाहिए।

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