बुजुर्गों (Senior Citizens) की देखभाल के मामले में इंडिया दुनिया के कई विकसित देशों के मुकाबले बेहतर स्थिति में है। माता-पिता (Parents) की देखभाल हमारी संस्कृति में शामिल है। लेकिन, कभी-कभी यहां भी दादा-दादी और माता-पिता की उपेक्षा की खबरें आती हैं। बुजुर्गों के बीमार रहने या मानसिक रूप से स्वस्थ नहीं होने पर बच्चों का सपोर्ट नहीं मिलने की खबरें बढ़ रही हैं। कुछ लोग अपने माता-पिता से तब दूरी बनाने लगे हैं, जब उन्हें लगता है कि वे उन पर बोझ की तरह हैं। खास बात यह है कि ऐसे मामले देश के किसी एक हिस्से से नहीं बल्कि पूरे देश में ही देखने को मिल रहे हैं। हर राज्य, जाति और आर्थिक-सामजिक वर्ग में यह समस्या बढ़ रही है।
Abuse के दायरे में क्या-क्या आता है?
सबसे बड़ी समस्या बुजुर्गों से बदसलूकी (Abuse) की है। इसका मतलब सिर्फ Physical Abuse से नहीं है। इसका मतलब बहुत व्यापक है। इसके दायरे में Emotional abuse, sexual abuse और तिरस्कार भी शामिल हैं। आम तौर पर यह देखा जाता है कि बच्चे प्रॉपर्टी अपने नाम में ट्रांसफर कराने के लिए माता-पिता पर दबाव बनाते हैं। उन्हें अकेला छोड़ देते हैं। कई बार तो वे उन्हें अपने घर से चले जाने को भी कह देते हैं। ये सभी abuse के उदाहरण हैं।
संसद ने पारित किया है कौन सा कानून?
इस समस्या को बढ़ने से रोकने के लिए कानून बनाकर बुजुर्गों और माता-पिता के अधिकारों को सुरक्षा प्रदान करना जरूरी है। संसद ने Maintenance and Welfare of Parents and Senior Citizens Act, 2007 पारित किया था। इसमें सीनियर सिटीजंस की फाइनेंशियल सिक्योरिटी, वेल्फेयर और प्रोटेक्शन का प्रावधान है। यह विधेयक मिनिस्ट्री ऑफ सोशल जस्टिस एंड इम्पावरमेंट की पहल थी।
सीनियर सिटीजन का मतलब क्या है?
उपर्युक्त कानून के तहत बेटे और बेटियों के लिए अपने माता-पिता की देखभाल करना जरूरी है। इस कानून में कहा गया है कि पेरेंट का मतलब biological, adoptive या step-parent हो सकता है। इसके लिए माता-पिता का बुजुर्ग यानी सीनियर सिटीजन होना भी जरूरी नहीं है। सीनियर सिटीजन का मतलब ऐसे व्यक्ति से है, जिसकी उम्र 60 साल पूरी हो चुकी है।
मेंटेनेंस की परिभाषा क्या है?
इस कानून के सेक्शन 2(b) में मेंटेनेंस की परिभाषा दी गई है। इसमें फूड, क्लॉद, रेजिडेंस और मेडिकल अटेंशन और ट्रीटमेंट के प्रोविजन शामिल हैं। इस कानून में 2013 में संशोधन किया गया था, जिसके बाद बुजुर्गों को अपने बच्चों के खिलाफ शिकायत करने का अधिकार मिल गया है। माता-पिता की देखभाल नहीं करने के लिए उसके बच्चों को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। इसमें यह भी कहा गया है कि सीनियर सिटीजन को छोड़ देना एक आपराधिक कृत्य है।
क्या हर महीने पैसे देने का भी प्रावधान है?
उपर्युक्त कानून के तहत अगर सीनियर सिटीजंस या माता-पिता अपनी कमाई से अपनी देखभाल करने में सक्षम नहीं हैं तो वे इस कानून के सेक्शन 5 के तहत अप्लिकेशन फाइल कर सकते हैं। इस कानून के सेक्शन 4 में सीनियर सिटीजंस के प्रति बच्चों या रिश्तेदारों की जिम्मेदारी के बारे में बताया गया है। अगर कोई व्यक्ति अपने माता-पिता की उपेक्षा करता है तो उसके लिए जुर्माने का भी प्रावधान है। इस कानून में यह भी कहा गया है कि बच्चों को अपने माता-पिता या सीनियर सिटीजंस को हर महीने 10,000 रुपये देने होंगे। इस कानून के दायरे से बहू और दमाद का बाहर रखा गया है। इसकी वजह यह है कि इस कानून के सेक्शन 2(a) के दायरे से बहू और दामाद को बाहर रखा गया है।