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बुजर्गों की देखभाल से इनकार नहीं कर सकते बच्चे, इस कानून के बारे में यहां जानिए सबकुछ

इंडिया में माता-पिता या बुजुर्गों की उपेक्षा की खबरे बढ़ रही हैं। खासकर बच्चे तब अपने माता-पिता से दूरी बनाने लगते हैं, जब उन्हें लगता है कि वे उनके ऊपर बोझ बन चुके हैं। इस समस्या से निपटने के लिए सरकार ने कानून बनाया है। इसमें बुजुर्गों के अधिकारों को कानूनी मान्यता दी गई है

Curated By: Rakesh Ranjanअपडेटेड Mar 17, 2023 पर 5:29 PM
बुजर्गों की देखभाल से इनकार नहीं कर सकते बच्चे, इस कानून के बारे में यहां जानिए सबकुछ
संसद ने Maintenance and Welfare of Parents and Senior Citizens Act, 2007 पारित किया था। इसमें सीनियर सिटीजंस की फाइनेंशियल सिक्योरिटी, वेल्फेयर और प्रोटेक्शन का प्रावधान है।

बुजुर्गों (Senior Citizens) की देखभाल के मामले में इंडिया दुनिया के कई विकसित देशों के मुकाबले बेहतर स्थिति में है। माता-पिता (Parents) की देखभाल हमारी संस्कृति में शामिल है। लेकिन, कभी-कभी यहां भी दादा-दादी और माता-पिता की उपेक्षा की खबरें आती हैं। बुजुर्गों के बीमार रहने या मानसिक रूप से स्वस्थ नहीं होने पर बच्चों का सपोर्ट नहीं मिलने की खबरें बढ़ रही हैं। कुछ लोग अपने माता-पिता से तब दूरी बनाने लगे हैं, जब उन्हें लगता है कि वे उन पर बोझ की तरह हैं। खास बात यह है कि ऐसे मामले देश के किसी एक हिस्से से नहीं बल्कि पूरे देश में ही देखने को मिल रहे हैं। हर राज्य, जाति और आर्थिक-सामजिक वर्ग में यह समस्या बढ़ रही है।

Abuse के दायरे में क्या-क्या आता है?

सबसे बड़ी समस्या बुजुर्गों से बदसलूकी (Abuse) की है। इसका मतलब सिर्फ Physical Abuse से नहीं है। इसका मतलब बहुत व्यापक है। इसके दायरे में Emotional abuse, sexual abuse और तिरस्कार भी शामिल हैं। आम तौर पर यह देखा जाता है कि बच्चे प्रॉपर्टी अपने नाम में ट्रांसफर कराने के लिए माता-पिता पर दबाव बनाते हैं। उन्हें अकेला छोड़ देते हैं। कई बार तो वे उन्हें अपने घर से चले जाने को भी कह देते हैं। ये सभी abuse के उदाहरण हैं।

संसद ने पारित किया है कौन सा कानून?

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