Chinese Tech Shares Prices fall : Hang Sang Index 25 अक्टूबर को 15,165.59 अंक पर बंद हुआ था। यह जनवरी 2018 में इसके लाइफ टाइम हाई से सालाना 15 फीसदी की गिरावट है। तब यह इंडेक्स 33,154 अंक पर था। यानी साढ़े चार साल में यह 50 फीसदी से ज्यादा गिर चुका है। हैंगसेंग दुनिया के प्रमुख सूचकांकों में से एक है। इस सूचकांक में चीन की कई दिग्गज टेक्नोलॉजी कंपनियां शामिल हैं।
हैंगसेंग में आई गिरावट से पता चलता है कि चीन की टेक्नोलॉजी कंपनियां बहुत मुश्किल में हैं। दुनिया के कोरोना की महामारी से बाहर निकलने के बावजूद इनवेस्टर्स चीन की टेक्नोलॉजी कंपनियों के शेयर बेच रहे हैं। वे इन कंपनियों के फ्यूचर को लेकर फिक्रमंद हैं।
चाइनीज कंपनियों के शेयरों में पैसे लगाने वाले इंडियन म्यूचुअल फंड स्कीमों को इस साल (2022) की शुरुआत से अब तक 26 से 43 फीसदी के बीच नुकसान हुआ है। लेकिन, कुछ इनवेस्टर्स को इन शेयरों में निवेश का मौका दिखाई देता है।
कई सालों तक चीन की इकोनॉमी का ग्रोथ रेट दुनिया में सबसे ज्यादा रहा है। मैन्युफैक्चरिंग पर फोकस के चलते इकोनॉमी की ग्रोथ काफी तेज रही। इसमें निर्यात की बड़ी भूमिका रही। कई दशकों तक डबल डिजिट ग्रोथ के बाद चीन की इकोनॉमी अब सुस्त पड़ रही है। कोरोना की महामारी के बाद दुनिया के कई देश अब चीन के विकल्प की तलाश में हैं। वे 'चाइन-प्लस-वन स्ट्रेटेजी' अपना रहे हैं।
कोरोना के बाद चीन में आए बदलाव का असर भी कंपनियों के प्लान पर पड़ा है। Ant Group को IPO का अपना प्लान टालन पड़ा। बच्चों के गेमिंग एप्स के इस्तेमाल की समय सीमा तय कर दी गई है। स्कूल कुरिकुलम ऑफर करने वाली एडटेक कंपनियों को प्रॉफिट कमाने के प्रतिबंध लगा दिया गया है। इस साल (2022) जब दुनियाभर में कोरोना के बाद हालात सामान्य हो रहे हैं, चीन में 'जीरो कोविड' पॉलिसी लागू है। इसका खराब असर इकोनॉमी पर पड़ा है।
इस साल चीन में शी जिनपिंग को तीसरी बार राष्ट्रपति चुन लिया गया। माना जा रहा है कि इससे अर्थव्यवस्था और चीन में ऑपरेट करने वाली कंपनियों पर सरकार का नियंत्रण और बढ़ जाएगा।
एक मल्टीनेशनल फंड हाउस के फंड मैनेजर ने कहा, "स्टॉक में बिकवाली के बावूजद इनवेस्टर्स और फंड मैनेजर्स चाइनीज कंपनियों के शेयरों में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं। पॉलिसी को लेकर तस्वीर साफ नहीं होने से अनिश्चितता का माहौल है, जिससे वे इन स्टॉक्स में निवेश करने से बच रहे हैं।" ब्लूमबर्ग के डेटा के मुताबिक, विदेशी निवेशकों ने चाइनीज कंपनियों के 2.5 अरब डॉलर के शेयर बेचे हैं।
सैंक्टम वेल्थ की चीफ इनवेस्टमेंट ऑफिसर रूपाली प्रभु ने कहा कि चाइनीज पॉलिसी से संकेत मिलता है कि सरकार का झुकाव वामपंथी विचारधारा की ओर है। इस बात को लेकर तस्वीर साफ नहीं है कि सरकार पहले की तरह पूंजीवाद या फ्री-मार्केट फोर्सेज को बढ़ावा देगी या नहीं।
माना जा रहा है कि चीन की सरकार फिर से इकोनॉमी को लेकर अपनी पुरानी सोच पर अमल कर सकती है। वह कंजम्प्शन आधारित ग्रोथ पर फोकस कर सकती है। इससे इकोनॉमी में सुस्ती देखने को मिलेगी। एनालिस्ट्स का कहना है कि इस साल 5.5 फीसदी ग्रोथ के लक्ष्य को हासिल करना मुश्किल लगता है।
जब दुनियाभर में केंद्रीय बैंक इनफ्लेशन को काबू में करने के लिए इंटरेस्ट रेट बढ़ा रहे हैं, चीन इकोनॉमी की ग्रोथ बढ़ाने के उपाय कर रहा है। पीपल्स बैंक ऑफ चाइना ने एक साल के लोन के प्राइम रेट को धीरे-धीरे घटाकर 3.65 फीसदी पर ला दिया है। पिछले साल यह 3.85 फीसदी था।