सरकार की तरफ से लोगों को पेंशन की सुविधा देने के लिए अटल पेंशन योजना (APY) चलाई जा रही है। इस योजना को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ से साल 2015 में शुरू किया गया था। इस योजना में लोगों को 1,000 रुपये से 5,000 रुपये तक हर मंथली पेंशन के तौर पर दिए जाते हैं। इस पेंशन योजना में अभी तक 5 करोड़ से भी ज्यादा लोग अपना रजिस्ट्रेशन करा चुके हैं।
सरकार ने बदल दिए हैं नियम
सरकार ने अटल पेंशन योजना के तहत नियमों में बदलाव कर दिया है। अब कोई भी नागरिक जो आयकर दाता है या फिर रह चुका है वह इस योजना में शामिल नहीं हो सकता है। इससे पहले भारत का कोई भी नागरिक जो कि 18 से 40 साल की उम्र के बीच का है वह इस योजना में निवेश कर सकता है। इस योजना के तहत केंद्र सरकार का ग्राहक के लिए योगदान का 50 प्रतिशत या 1,000 रुपये प्रति वर्ष, जो भी कम हो, योगदान देता है। सरकारी सह-योगदान उन लोगों के लिए उपलब्ध है जो किसी भी वैधानिक सामाजिक सुरक्षा योजना से जुड़े हुए नहीं हैं और आयकरदाता नहीं हैं।
सरकार देती है पेंशन की गारंटी
बजट 2015-16 में घोषित अटल पेंशन योजना, वृद्धावस्था में आय सुरक्षा के लिए केंद्र सरकार की योजना है और असंगठित क्षेत्र के सभी नागरिकों पर केंद्रित है। इस योजना का संचालन राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) के माध्यम से पेंशन फंड नियामक और विकास प्राधिकरण (PFRDA) द्वारा किया जाता है। योजना के तहत, ग्राहकों के लिए 1,000 रुपये से 5,000 रुपये प्रति माह के बीच न्यूनतम मासिक पेंशन की गारंटी है। सरकार द्वारा न्यूनतम पेंशन के लाभ की गारंटी दी जाएगी। APY के तहत, एक ग्राहक को 60 वर्ष की आयु से प्रति माह 1,000 रुपये से 5,000 रुपये की आजीवन न्यूनतम गारंटीकृत पेंशन प्राप्त होगी।
पेंशन योजना को बंद कैसे करें
अगर किसी भी वजह से सब्सक्राइबर की मृत्यु हो जाती है तो पति या फिर पत्नी को पेंशन की रकम दी जाएगी। अगर दोनों की ही मृत्यु हो जाती है तो नॉमिनी को पेंशन की रकम दी जाएगी। 60 साल की उम्र के बाद 100 फीसदी एनुइटी के साथ अटल पेंशन योजना से बाहर निकला जा सकता है। हालांकि इस दौरान पेंशन मिलती रहेगी। केवल लाइलाज बीमारी की स्थिति में ही 60 साल की उम्र के पहले इस योजना