Explainer: आपके शहर में क्यों बढ़ रही हैं टमाटर की कीमतें? समझें क्या है इसका कारण और कैसे पड़ता है असर
लखनऊ में टमाटर (Tomato) की कीमतें 130 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गईं। कोच्चि में अदरक (Ginger) 230 रुपए और हरी मिर्च (Green Chilli) की कीमत बढ़कर 160 रुपए प्रति किलो हो गईं। चेन्नई, कोयंबटूर और त्रिची में, बैंगन और सहजन जैसी सब्जियां 60 रुपए और 80 रुपये प्रति किलोग्राम पर बेची जा रही हैं, जबकि मुंबई में केले 80 रुपए दर्जन मिल रहे हैं
MoneyControl News
अपडेटेड Jun 29, 2023 पर 9:56 PM
आपके शहर में क्यों बढ़ रही हैं टमाटर की कीमतें?
इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून (Southwest Monsoon) देर से आया। भले ही इससे गर्मी से कुछ राहत मिली हो, लेकिन लगातार हो रही बारिश (Rain) ने पूरे भारत में सब्जियों और फलों की कीमतें भी बढ़ा (Vegetables Fruits Price Hike) दी हैं। इस हफ्ते लखनऊ में टमाटर (Tomato) की कीमतें 130 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गईं। कोच्चि में अदरक (Ginger) 230 रुपए और हरी मिर्च (Green Chilli) की कीमत बढ़कर 160 रुपए प्रति किलो हो गई। चेन्नई, कोयंबटूर और त्रिची में, बैंगन और सहजन जैसी सब्जियां 60 रुपए और 80 रुपये प्रति किलोग्राम पर बेची जा रही हैं, जबकि मुंबई में केले 80 रुपए दर्जन मिल रहे हैं।
अब आने वाले महीनों में एल नीनो की आशंका के साथ, रिजर्व ऑफ इंडिया (RBI) ने भी माना है कि खाने-पीने की चीजों की कमतों पर काबू पाना एक चुनौती हो सकती है। लेकिन सवाल ये है कि आखिर मानसून में सब्जियों की कीमतें इतनी तेजी से क्यों बढ़ जाती हैं? तो आइए जानते हैं इसका जवाब...
दक्षिण-पश्चिम मानसून भारत में जून में आता है और सितंबर तक रहता है। ये देश की सालाना बारिश का लगभग 70 प्रतिशत है, और हमारी पीने के पानी और खेती बाड़ी की जरूरतों को पूरा करने के लिए काफी अहम है। लगभग आधी आबादी डायरेक्ट या इनडायरेक्ट तरीके से इस सेक्टर पर निर्भर है।
RBI के अनुसार, "सिंचाई के बुनियादी ढांचे का काफी तेजी से विस्तार हुआ है, जिससे भारत की मानसून पर निर्भरता कम हो गई।" फिर भी, 2022 में कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय की तरफ से जारी आंकड़ों पर नजर डाली जाए, तो देश का लगभग 50 प्रतिशत बोया गया क्षेत्र अभी भी मानसून की बारिश पर निर्भर करता है।
इसमें सबसे ज्यादा मुश्किल वाली बात ये है कि पिछले कुछ सालों में पूरे देश में मानसून अनियमित रहा है। इसे ऐसे समझें, इस साल, भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, जून के आखिरी हफ्ते तक, भारत में बारिश में कुल मिलाकर लगभग 23 प्रतिशत की कमी थी, लेकिन ये डिस्ट्रिब्यूशन बराबर नहीं था।
चक्रवात बिपरजोय के कारण उत्तर पश्चिम भारत में 37 प्रतिशत से ज्यादा बारिश हुई। दूसरी ओर, मध्य भारत में 35 फीसदी और दक्षिण प्रायद्वीप 45 प्रतिशत कम बारिश हुई।
टमाटर के दाम
ज्यादातर फल और सब्जियां जलवायु (Climate) को लेकर संवेदनशील होती हैं, यही कारण है कि हम उनकी कीमतों में उछाल देखने मिल रहा है। उदाहरण के लिए, सबसे पहले गर्मी का असर टामटर पर पड़ा, जिससे फसल सूख गई और मुरझा गई।
फिर, मई में बेमौसम बारिश ने राजस्थान, उत्तर प्रदेश और हरियाणा में उपज को नुकसान पहुंचाया। जून में कर्नाटक में भारी बारिश का असर फसलों पर भी पड़ा, जिससे सप्लाई प्रभावित हुई।
इंटरनेशनल फूड-पॉलिसी रिसर्च इंस्टीट्यूट- साउथ एशिया के सीनियर रिसर्च फेलो अंजनी कुमार ने कहा, "भारी बारिश फोटोसिंथेसिस एक्टिविटी को कम करके, मेटाबॉलिज्म और एंजाइमेटिक एक्टिविटी को बदलकर उपज और उपज की क्वालिटी को प्रभावित कर सकती है।"
कुमार ने आगे कहा, "इसने सेब, नाशपाती, आड़ू और प्लम जैसे फलों को भी प्रभावित किया है, उपज कम हो गई है और क्वालिटी खराब हो गई है, और बगीचों में बीमारियां फैल गई हैं।"
देश के कुछ हिस्सों में बाढ़ के कारण किसानों के लिए फलों और सब्जियों को खेतों से बाजारों तक ले जाना भी मुश्किल हो गया है। उदाहरण के लिए, चक्रवात बिपरजोय के कारण राजस्थान में भारी बारिश हुई, जिससे फसलें नष्ट हो गईं, इसलिए वे स्थानीय बाजारों तक कभी नहीं पहुंच पाईं।
सप्लाई चेन में इस रुकावट के कारण टमाटर, हरी मिर्च, करेला, नींबू और अदरक जैसी सब्जियों की उपलब्धता कम हो गई, जिससे उनकी कीमतें बढ़ गईं।
कैसे पड़ रहा असर?
सब्जी उत्पादन के नजरिए से भारत के सभी क्षेत्र समान रूप से महत्वपूर्ण नहीं हैं। जैसे कि, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक देश में टमाटर के शीर्ष उत्पादकों में से हैं। अगर इन राज्यों मौसम या किसी दूसरे कारण से फसल को नुकसान होता है, तो इससे तुरंत कमी हो सकती है और कीमतें बढ़ सकती हैं।
अशोक ट्रस्ट के एनवायरनमेंट और डेवलपमेंट केंद्र में PhD फेलो श्रीनिवास बडिगर कहते हैं, "बाजार, प्रोडक्शन-सप्लाई-जमाखोरी की समस्या के चलते ज्यादातर उपभोग की जाने वाली जरूरी सब्जियों की कीमतें बढ़ेंगी, जो हमारी दैनिक पोषक तत्वों की जरूरतों को पूरा करने के लिए काफी जरूरी हैं। उदाहरण के लिए, प्याज, टमाटर, (कुछ) साग और हरी मिर्च। ये सभी शॉर्ट टर्म फसलें हैं, जिनके लिए समय पर बारिश या सिंचाई की जरूरत होती ह फलों में, मुझे लगता है कि मानसून में देरी के कारण केले की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है।"
चावल, इलायची, सोयाबीन का प्रोडक्शन
चिंता की बात यह भी है कि कम बारिश के कारण धान, दलहन, तिलहन, कपास और गन्ना जैसी खरीफ फसलों की बुआई में देरी हुई है। 23 जून को कृषि मंत्रालय की तरफ से जारी आंकड़ों के अनुसार, बुआई साल दर साल 4.5 प्रतिशत कम होकर 12.9 मिलियन हेक्टेयर रही।
देरी और हल्के मानसून ने पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और झारखंड के धान बेल्ट में चिंता पैदा कर दी है। केरल के इडुक्की जिले में, जहां बारिश में 74 प्रतिशत की कमी आई है, कृषि क्षेत्र, खासकर इलायची उत्पादन को नुकसान होने की आशंका है।
पर्याप्त बारिश की कमी के कारण मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में सोयाबीन की बुआई प्रभावित हुई है, लेकिन यह कहना जल्दबाजी होगी कि पैदावार या कीमतों पर क्या असर होगा।
इसके उलट, सब्जियों की कीमतों में बढ़ोतरी आमतौर पर कम समय के लिए होती है। इसलिए जैसे-जैसे सप्लाई बढ़ेगी, कीमतें भी स्थिर होती जाएंगी।