Income Tax Return: न्यू टैक्स रिजीम में क्या क्लेम कर सकते हैं और क्या नहीं? ITR भरने से पहले देख लें ये पूरी लिस्ट

Income Tax Return: इस बार इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल करने से पहले 'न्यू टैक्स रिजीम' के नियमों को ठीक से समझ लेना बेहद जरूरी है। नई टैक्स व्यवस्था में टैक्स की दरें तो कम हैं। लेकिन इसके बदले में टैक्स पेयर्स को उन अधिकतर लोकप्रिय छूटों और कटौतियों को छोड़ना पड़ता है जो ओल्ड टैक्स रिजीम में मिला करती थीं

अपडेटेड Jul 13, 2026 पर 4:21 PM
Income Tax Return: आईटीआर दाखिल करने से पहले न्यू टैक्स रिजीम के नियमों को ठीक से समझ लेना बेहद जरूरी है

ITR 2026: इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने की प्रक्रिया चल रही है। लेकिन इस बार रिटर्न दाखिल करने से पहले 'न्यू टैक्स रिजीम' के नियमों को ठीक से समझ लेना बेहद जरूरी है। नई टैक्स व्यवस्था में टैक्स की दरें तो कम हैं। लेकिन इसके बदले में टैक्स पेयर्स को उन अधिकतर लोकप्रिय छूटों और कटौतियों को छोड़ना पड़ता है जो ओल्ड टैक्स रिजीम में मिला करती थीं। मनी कंट्रोल के पर्सनल फाइनेंस सेक्शन में आयुष मिश्रा की रिपोर्ट बताती है कि अक्सर टैक्स पेयर्स यह मान लेते हैं कि पुरानी व्यवस्था की तरह ही सभी कटौतियां यहां भी लागू रहेंगी।

ऐसे में टैक्स प्लानिंग में गलती हो जाती है और उन पर टैक्स का बोझ बढ़ जाता है। आइए टैक्स विशेषज्ञों के हवाले से जानते हैं कि नई टैक्स व्यवस्था के तहत आप किन-किन टैक्स छूटों को खो देते हैं और अभी भी आपके पास कौन से सीमित विकल्प मौजूद हैं।

न्यू टैक्स रिजीम में क्या क्लेम नहीं कर सकते? फुल लिस्ट


'टैक्समैन' के वाइस प्रेसिडेंट नवीन वाधवा ने विस्तार से बताया है कि नई टैक्स व्यवस्था में करदाताओं को कौन-कौन सी छूट और कटौती का लाभ नहीं मिलता है:-

लीव ट्रैवल कंसेशन (LTC): धारा 10(5) के तहत मिलने वाली छूट।

हाउस रेंट अलाउंस (HRA): धारा 10(13A) के तहत मिलने वाली मकान किराया छूट।

आधिकारिक और व्यक्तिगत भत्ते: धारा 10(14) के तहत आने वाले भत्ते (उन भत्तों को छोड़कर जो विशेष रूप से निर्धारित किए जा सकते हैं)।

सांसदों/विधायकों को मिलने वाले भत्ते: धारा 10(17) के तहत।

नाबालिग की आय पर छूट: धारा 10(32) के तहत मिलने वाली राहत।

SEZ इकाइयों के लिए कटौती: विशेष आर्थिक क्षेत्रों (SEZ) में स्थापित इकाइयों के लिए धारा 10AA के तहत मिलने वाली कटौती।

मनोरंजन भत्ता: धारा 16(ii) के तहत।

प्रोफेशनल टैक्स: धारा 16(iii) के तहत मिलने वाली छूट।

होम लोन का ब्याज (स्वयं के कब्जे वाली संपत्ति): धारा 24(b) के तहत स्व-कब्जे वाली आवासीय संपत्ति के लिए होम लोन के ब्याज पर मिलने वाली कटौती।

अतिरिक्त मूल्यह्रास (Additional Depreciation): नए प्लांट और मशीनरी के संबंध में धारा 32(1)(iia) के तहत।

अधिसूचित पिछड़े क्षेत्रों में निवेश: नए प्लांट और मशीनरी में निवेश के लिए धारा 32AD के तहत मिलने वाली कटौती।

विशिष्ट व्यवसाय: चाय, कॉफी या रबर व्यवसाय के संबंध में धारा 33AB और भारत में पेट्रोलियम या प्राकृतिक गैस के पूर्वेक्षण, निष्कर्षण या उत्पादन से जुड़े व्यवसाय के लिए धारा 33ABA के तहत मिलने वाली कटौती।

वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए दान/खर्च: स्वीकृत वैज्ञानिक अनुसंधान संघों, विश्वविद्यालयों, कॉलेजों या अन्य संस्थानों को दिए गए दान के लिए धारा 35(1)(ii), धारा 35(1)(iii) और धारा 35(2AA) के तहत कटौती। साथ ही वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए भारतीय कंपनी को किए गए भुगतान पर धारा 35(1)(iia) के तहत छूट।

पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure): कुछ स्पेसिफिक व्यवसायों जैसे कोल्ड चेन सुविधा, वेयरहाउसिंग सुविधा आदि के लिए धारा 35AD के तहत मिलने वाली कटौती।

कृषि विस्तार परियोजना (Agriculture Extension Project): धारा 35CCC के तहत व्यय पर मिलने वाली कटौती।

चैप्टर VI-A के तहत कटौतियां: धारा 80C से 80U के तहत मिलने वाली लोकप्रिय कटौतियां (जैसे 80C, 80D आदि) पूरी तरह अनुपलब्ध हैं। हालांकि इसमें धारा 80JJAA, धारा 80CCD(2), धारा 80CCH(2) और धारा 80LA(1A) को छूट दी गई है। यानी इन्हें क्लेम किया जा सकता है।

न्यू टैक्स रिजीम में क्या क्लेम कर सकते हैं?

भले ही कई बड़ी कटौतियां इस व्यवस्था से बाहर हैं। लेकिन चार्टर्ड अकाउंटेंट श्रेया गुप्ता गोयल और अन्य विशेषज्ञों के मुताबिक नई टैक्स व्यवस्था में अभी भी कुछ बेहद महत्वपूर्ण कटौतियां और छूट हासिल की जा सकती हैं:-

सैलरीड क्लास के लिए स्टैंडर्ड डिडक्शन: वेतनभोगी कर्मचारियों को ₹75000 तक का स्टैंडर्ड डिडक्शन (मानक कटौती) मिलता है।

फैमिली पेंशन पर स्टैंडर्ड डिडक्शन: पारिवारिक पेंशन पर ₹25000 या पेंशन का 1/3 हिस्सा जो भी कम हो उसकी कटौती उपलब्ध है।

किराए पर दी गई संपत्ति का होम लोन ब्याज: किराए पर दी गई संपत्ति के मामले में धारा 24b के तहत होम लोन के ब्याज पर कटौती का लाभ उठाया जा सकता है।

NPS में एंप्लॉयर का योगदान: नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) में एम्प्लॉयर के योगदान पर सैलरी के 14 फीसदी तक की कटौती का लाभ मिलता है।

अग्निवीर कॉर्पस फंड: धारा 80CCH के तहत अग्निवीर कॉर्पस फंड में किए गए सभी योगदानों पर कटौती मान्य है।

लीव एनकैशमेंट (Leave Encashment): धारा 10(10AA) के तहत मिलने वाली छूट।

ग्रेच्युटी (Gratuity): धारा 10(10) के तहत मिलने वाला लाभ।

दिव्यांगों के लिए परिवहन भत्ता (Transport Allowances): दिव्यांग व्यक्तियों को मिलने वाले परिवहन भत्ते पर छूट।

स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना (VRS): धारा 10(10C) के तहत वीआरएस के लिए मिलने वाली छूट।

उपहार: ₹50000 तक के उपहारों पर टैक्स छूट।

मील वाउचर्स: प्रति मील ₹200 तक के मील वाउचर टैक्स के दायरे से बाहर हैं।

आपके लिए कौन सी रिजीम बेहतर? विशेषज्ञों की राय

टैक्स विशेषज्ञों का मानना है कि ओल्ड और न्यू टैक्स रिजीम में से किसी एक का चयन पूरी तरह से टैक्स पेयर की इनकम प्रोफाइल और उसके द्वारा क्लेम की जाने वाली कटौतियों पर निर्भर करता है। अगर आप HRA, होम लोन का ब्याज या धारा 80C और 80D के तहत बड़ा निवेश (जैसे LIC, PPF, मेडिक्लेम आदि) क्लेम करते हैं तो आपके लिए ओल्ड टैक्स रिजीम अधिक फायदेमंद साबित हो सकती है।

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इसके उलट अगर आपके पास निवेश और कटौतियों के विकल्प सीमित हैं और आप कम टैक्स दरों के साथ एक सरल टैक्स स्ट्रक्चर चाहते हैं तो न्यू टैक्स रिजीम आपके टैक्स दायित्व को कम कर सकती है। ऐसे में इनकम टैक्स पेयर्स को सलाह दी जाती है कि वे अपना इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने से पहले दोनों ही व्यवस्थाओं के तहत अपने टैक्स लायबिलिटी की तुलना जरूर कर लें।

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।)

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