हम में से कई सारे लोग समय समय पर अपनी नौकरियों को बदलते रहते हैं। हालांकि नौकरी बदलने के दौरान अक्सर लोग एक अहम काम को करना भूल जाते हैं जिसकी वजह से आपको ज्यादा टैक्स भी चुकाना होता है। नौकरी चेंज करने के बाद आपको अपने सभी पीएफ अकाउंट को एक में ही मिला लेना चाहिए। पीएफ फंड में ऑफिस और कर्माचारी दोनों की तरफ से कंट्रीब्यूशन दिया जाता है।
नौकरी बदलने पर खोला जाता है नया पीएफ अकाउंट
जब भी आपका पीएफ अकाउंट (PF Account) ओपन किया जाता है तो आपको ईपीएफओ की तरफ से एक यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) दिया जाता है। इसी के जरिए पीएफ अकाउंट को मैनेज किया जाता है। जब भी आप किसी दूसरी कंपनी में जॉब करने जाते हैं तो आपको अपना यूएएन नंबर उस कंपनी को देना होता है। नौकरी बदलने के बाद उसी यूएएन नंबर के जरिए एक और पीएफ अकाउंट खोला जाता है।
पीएफ अकाउंट से पैसे निकालने के क्या हैं नियम
नियमों के मुताबिक अगर किसी कंपनी में आपने पांच साल से कम काम किया है और आपके पीएफ अकाउंट में जमा हुई कुल रकम 50,000 रुपये से कम है तो आपको पैसा निकालने पर कोई भी टैक्स नहीं देना होता है। हालांकि अगर रकम 50,000 रुपये से ज्यादा है तो इस पर 10 फीसदी के हिसाब से टीडीएस कटेगा। वहीं अगर आपने पांच साल तक नौकरी कर ली है तो आपके पीएफ फंड की निकासी पर कोई भी टैक्स नहीं कटेगा।
क्यों जरूरी है पीएफ खाते को मर्ज करना
पीएफ खाते को आपस में मर्ज करने से आपका यूएएन नंबर आपके वर्क एक्सपीरियंस को भी आपस में मर्ज कर देगा। इसका मतलब यह है कि अगर आपने तीन अलग अलग कंपनियों में 2-2 साल तक काम किया है और आप अपने सभी पीएफ अकाउंट को मर्ज कर देते हैं तो आपका कुल वर्क एक्सपीरियंस 6 साल का माना जाएगा। हालांकि अगर आप अपने पीएफ खाते को मर्ज नहीं करते हैं तो हर एक कंपनी की अवधि अलग अलग मानी जाएगी। जिस वजह से अगर आप कभी अपने पीएफ खाते से रकम निकालते हैं तो इस पर आपको 10 फीसदी के हिसाब से टीडीएस देना होगा।