Dhanteras Gold 2026: धनतेरस के दिन क्या आप भी खरीद रहे बिना बिल वाला गोल्ड? सर्वे में हुआ बड़ा खुलासा
धनतेरस पर सोने की खरीदारी से जुड़े एक सर्वे ने चौंकाने वाली तस्वीर दिखाई है। इंपोर्ट ड्यूटी 6% से 15% होने के बाद तस्करी वाला सोना सस्ता पड़ रहा है और लोग उसकी ओर मुड़ रहे हैं। जानिए सर्वे में क्या निकला और लोग सरकार से क्या चाहते हैं।
हर 10 में से करीब 3 लोग ज्वैलर की बजाय सस्ते दाम वाले अनौपचारिक रास्ते से सोना लेंगे।
धनतेरस पर सोना खरीदने वाले हर 10 में से करीब 3 लोग इस बार पक्के बिल वाले ज्वैलर के पास जाने की बजाय सस्ते दाम वाले अनौपचारिक रास्ते से सोना खरीदने की सोच रहे हैं। LocalCircles के एक सर्वे में ये बात सामने आई है। इसकी बड़ी वजह सोने पर इंपोर्ट ड्यूटी का 6% से बढ़कर 15% होना है, जिसके बाद तस्करी वाला सोना बाजार में सस्ता पड़ने लगा है।
29% खरीदार चुनेंगे अनौपचारिक रास्ता
सर्वे में उन लोगों से सवाल पूछा गया जो 6 नवंबर यानी धनतेरस पर सोना खरीदने वाले हैं। इनमें से 29% ने कहा कि वे कम कीमत देने वाले अनौपचारिक रास्ते से सोना लेंगे। बाकी 71% ने कहा कि वे पक्का बिल देने वाले ज्वैलर से ही खरीदारी करेंगे। इस सवाल पर 21,651 लोगों ने जवाब दिया।
LocalCircles के मुताबिक ये सर्वे देश के 312 जिलों में किया गया और इसमें घरेलू ग्राहकों से 42,000 से ज्यादा जवाब मिले। सभी जवाब उसके प्लेटफॉर्म के जरिए जुटाए गए।
क्यों सस्ता पड़ रहा तस्करी वाला सोना
सरकार ने 13 मई 2026 को सोने पर इंपोर्ट ड्यूटी 6% से बढ़ाकर 15% कर दी थी। इस फैसले का मकसद विदेशी मुद्रा बचाना और रुपये पर दबाव कम करना था।
लेकिन इसका एक दूसरा असर भी हुआ। ऊंची ड्यूटी और ऊपर से GST जुड़ने के बाद आधिकारिक तरीके से आयात हुए सोने और ग्रे मार्केट के सोने के दाम में फासला बढ़ गया। इसी फासले की वजह से तस्करी वाला सोना ग्राहक को सस्ता पड़ने लगा और देश में सोने की तस्करी फिर से बढ़ गई।
3 महीने में अनौपचारिक तरीके से आया करीब 50 टन सोना
तस्करी कितनी तेजी से बढ़ी है, ये वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) की Q3 2026 गोल्ड डिमांड ट्रेंड्स रिपोर्ट से साफ होता है। जुलाई से सितंबर के बीच देश में अनौपचारिक तरीके से आने वाला सोना सालाना आधार पर 1,500% से ज्यादा बढ़कर करीब 50 टन पहुंच गया। पिछले साल इसी दौरान ये करीब 3 टन था। दूसरी तरफ आधिकारिक रास्ते से हुआ सोने का नेट इंपोर्ट इसी तिमाही में 46% घटकर 114.1 टन रह गया।
तस्करी रोकने के लिए लोग सरकार से क्या चाहते हैं
सर्वे में लोगों से ये भी पूछा गया कि देश में तस्करी वाले सोने की बिक्री कैसे रोकी जाए। सबसे ज्यादा 37% लोगों ने सोने की तस्करी करने वाले नेटवर्क पर सख्त कार्रवाई की बात कही। 29% चाहते हैं कि सरकार इंपोर्ट ड्यूटी पर दोबारा विचार करे, ताकि तस्करी का फायदा ही खत्म हो जाए।
17% लोगों ने तस्करी वाला सोना बेचने वालों पर सख्ती की मांग की। 12% ने सख्त कार्रवाई और नीति में बदलाव, दोनों को साथ लेकर चलने की बात कही। बाकी 5% चाहते हैं कि बिना बिल सोना खरीदने के खिलाफ ग्राहकों को जागरूक करने का अभियान चलाया जाए। इस सवाल पर 20,471 जवाब मिले। कुल मिलाकर 66% लोग सख्त कार्रवाई के पक्ष में हैं, चाहे अकेले या नीति में बदलाव के साथ।
ड्यूटी घटाने की मांग, फैसला अब तक नहीं
तस्करी बढ़ने की चिंता के बीच बुलियन कारोबारी और ज्वैलर्स ड्यूटी घटाने की मांग कर रहे हैं। अगस्त में खबरें आई थीं कि सरकार इंपोर्ट ड्यूटी को वापस 6% पर लाने पर विचार कर रही है। लेकिन 4 नवंबर तक इस पर कोई फैसला नहीं हुआ था।
ऊंची कीमतों से घटी सोने की मांग
महंगे सोने का असर धनतेरस और शादियों के सीजन से पहले खरीदारी पर भी दिखा है। WGC के मुताबिक जुलाई-सितंबर तिमाही में भारत में सोने की मांग सालाना आधार पर 29% घटकर 162.5 टन रह गई। ज्वैलरी की मांग 20% घटकर 99.9 टन और गोल्ड बार व सिक्कों की मांग 40% घटकर 55 टन पर आ गई।
वजन के हिसाब से मांग घटी, लेकिन रकम के हिसाब से तस्वीर उल्टी है। कीमतें ऊंची होने की वजह से सोने की मांग की कुल वैल्यू 3% बढ़कर करीब ₹2.42 लाख करोड़ पहुंच गई। यानी लोगों ने सोना कम खरीदा, पर उसके लिए पैसे ज्यादा चुकाए।