बाजार में फिलहाल वैल्यूएशंस कहीं भी सस्ता नहीं दिख रहा है। हालांकि, अगर इकोनॉमी का प्रदर्शन अच्छा रहता है तो कंपनियों के मुनाफे में अच्छी ग्रोथ दिख सकती है। ICICI Prudential Asset Management के डिप्टी चीफ इनवेस्टमेंट अफसर अनीश तावाकले ने यह राय जताई है। मनीकंट्रोल से बातचीत में उन्होंने निवेश से लेकर स्टॉक मार्केट के प्रदर्शन के बारे में खुलकर चर्चा की। मनीकंट्रोल ने उनसे यह भी पूछा कि आज 10 लाख रुपये का निवेश करना हो तो इस पैसे को कहां लगाना सबसे फायदेमंद रहेगा। तावाकले को स्टॉक मार्केट और निवेश का व्यापक अनुभव है।
10 लाख रुपये का कहां करें निवेश?
उन्होंने कहा कि अगर इनवेस्टर्स शेयरों में निवेश करना चाहते हैं तो उन्हें लंबी अवधि के लिए यह निवेश करना होगा। निवेशकों को म्यूचुअल फंड की स्कीम का चुनाव अपने इनवेस्टमेंट ऑब्जेक्टिव को ध्यान में रखकर करना चाहिए। इक्विटी म्यूचुअल फंड्स में लार्ज कैप और बिजनेस साइकिल फंड्स निवेश के लिए अच्छे हैं। लेकिन, इस बारे में किसी एक सिद्धांत की जगह इनवेस्टर्स को अपने हिसाब से फैसला करना चाहिए।
मार्केट के लिए सबसे बड़ा रिस्क क्या है?
यह पूछने पर कि अभी सबसे बड़ा रिस्क क्या है, उन्होंने कहा कि जहां तक ऑयल की कीमतों का सवाल है तो वे सीमित दायरे में बनी हुई हैं। इसलिए ऑयल को लेकर ज्यादा चिंता नहीं है। खासकर तब जब इंडिया यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद सस्ते प्राइस पर ऑयल खरीदने में कामयाब रहा है। फिर भी, हमें हालात पर नजर बनाए रखनी होगी। हमारे लिए फिस्कल डिसिप्लिन ज्यादा जरूरी है। पिछले पांच साल में जब इकोनॉमी को सपोर्ट की जरूरत थी तो यह माना जा रहा था कि सरकार को अपना खर्च बढ़ाना चाहिए। अब इकोनॉमी ने रफ्तार पकड़ ली है। प्राइवेट सेक्टर में डिमांड बढ़ रही है। अब हमें फिस्कल डेफिसिट में कमी लाने पर ध्यान देना चाहिए। इसके लिए फिस्कल डिसिप्लिन जरूरी है।
डायवर्सिफिकेशन के बारे में उन्होंने कहा कि सिर्फ डायवर्सिफिकेशन से मदद नहीं मिलती है। डायवर्सिफिकेश किस तरह से करना है, यह अहम है। फिलहाल जो स्थिति है, उसमें डोमेस्टिक साइक्लिकल स्टॉक्स में बने रहना ठीक रहेगा।
कॉर्पोरेट अर्निंग्स की ग्रोथ अच्छी रहने की उम्मीद
उन्होंने कहा कि कंपनियों के नतीजे उम्मीद के मुताबिक रहे हैं। ज्यादातर कंपनियों की ग्रोथ अच्छी रही है। मार्जिन पर थोड़ा प्रेशर दिखा है। जब ग्रोथ सुस्त थी तब कंपनियों ने मार्जिन को लेकर बहुत डिसिप्लिन दिखाया था। लेकिन, ग्रोथ में इम्प्रूवमेंट के बाद वे ज्यादा आक्रामक हो गई हैं। प्रतियोगिता भी बढ़ गई है। अगर वैल्यूएशन की बात की जाए तो अभी शेयर सस्ते नहीं हैं। उन्हें बहुत महंगा भी नहीं कहा जा सकता। इसका मतलब है कि हमें कंपनियों की अर्निंग ग्रोथ पर नजर रखनी होगी। अगर इकोनॉमी का प्रदर्शन अच्छा रहता है तो अर्निंग्स में अच्छी ग्रोथ दिख सकती है।
उन्होंने कहा कि जहां तक इकोनॉमी की बात है तो इसकी सेहत अच्छी है। इसलिए हम कंपनियों के प्रॉफिट में अच्छी ग्रोथ की उम्मीद कर सकते हैं। इसका मतलब है कि मार्केट से औसत रिटर्न की उम्मीद की जा सकती है। खासकर कैपिटल गुड्स और सीमेंट सेक्टर का प्रदर्शन अच्छा रह सकता है। मेटल सेक्टर पर दबाव दिख सकता है। इसकी वजह यह है कि चीन में ग्रोथ के लिए अब मेटल पहले जितना जरूरी नहीं रह गया है। इसलिए कमोडिटीजी की कीमतें दबाव में रह सकती हैं।