EPFO ने ज्यादा पेंशन के अप्लिकेशन के लिए लिंक एक्टिवेट किया है, लेकिन शर्तें ऐसी जिन्हें पूरी करना एंप्लॉयी के लिए नामुमकिन

EPFO ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश को ध्यान में रख अपनी वेबसाइट पर ज्यादा पेशन के लिए अप्लाई करने के वास्ते एक लिंक एक्टिवेट किया है। जो एंप्लाई ज्यादा पेंशन के लिए अप्लाई करना चाहते हैं वे इस लिंक पर 3 मई तक अप्लाई कर सकते हैं

अपडेटेड Apr 08, 2023 पर 4:59 PM
अगर एंप्लॉयी से फॉर्म भरने में किसी तरह की चूक होती है तो EPFO अप्लिकेशन को खारिज कर सकता है।

EPFO ने पिछले साल नवंबर में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद उन एंप्लॉयीज को ज्यादा पेंशन का फायदा उठाने का एक मौका दिया है, जो इससे पहले इस मौके का फायदा उठाने से चूक गए थे। शर्त यह है कि ऐसे एंप्लॉयीज को 1 सितंबर, 2014 या इसके बाद EPFO के सदस्य हैं वे ज्यादा पेंशन के लिए अप्लाई कर सकते हैं। दरअसल, इस बारे में फैसला सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल 4 नवंबर को दिया था। उसने EPFO को इसे लागू करने के लिए 3 महीने का समय दिया था। इसके हिसाब से ज्यादा पेशन के लिए अप्लाई करने की अंतिम तारीख 3 मार्च थी। बाद में इसे बढ़ाकर 3 मई कर दिया गया।

EPFO ने वेबसाइट पर लिंक एक्टिवेट किया है

कुछ हफ्ते पहले EPFO अपनी वेबसाइट पर एक लिंक एक्टिवेट किया है। उसने कहा है कि जो एंप्लॉयी ज्यादा पेंशन के लिए अप्लाई करना चाहते हैं उन्हें ज्वाइंट अप्लिकेशन फॉर्म भरना होगा। लेकिन, अप्लिकेशन फॉर्म में जिस तरह की शर्तें दी गई हैं, उससे लगता है कि इसे भरना किसी एप्लॉयी के लिए बहुत मुश्किल हो सकता है। अगर एंप्लॉयी से फॉर्म भरने में किसी तरह की चूक होती है तो EPFO अप्लिकेशन को खारिज कर सकता है।


पिछले कंट्रिब्यूशन के बारे में सवाल

एंप्लॉयी जब ऑनलाइन फॉर्म भरना शुरू करता है तो उससे उसके पहले के कंट्रिब्यूशंस के बारे में पूछा जाता है। नियमों में यह कहा गया है कि एंप्लॉयी और एंप्लॉयर (कंपनी) को ईपीएफ अकाउंट में ज्यादा कंट्रिब्यूशन (तय सीमा से ज्यादा) के लिए पीएफ कमिश्नर से संयुक्त रूप से अनुरोध करना होगा। लेकिन, शायद ही किसी ने इस प्रोसिजर का पालन किया होगा, क्योंकि इजाजत के बगौर ज्यादा कंट्रिब्यूशंस किए गए हैं। EPFO खुद ईपीएफ अकाउंट में ज्यादा कंट्रिब्यूशन के लिए ज्वाइंट रिक्वेस्ट पर जोर नहीं देता है। लेकिन, ज्यादा पेंशन के लिए ज्वाइंट अप्लिकेशन फॉर्म में यह पूछा गया है कि आपने ज्यदा कंट्रिब्यूशन किया है या नहीं।

परमिशन का सबूत मांगा जा रहा है

अगर आपने पहले से तय लिमिट (5000 या 6500 रुपये) से ज्यादा कंट्रिब्यूट किया है तो आपको 'यस' ऑप्शन सेलेक्ट करना है। लेकिन, जैसे ही आप इस ऑप्शन को सेलेक्ट करते हैं तो आपसे इसके लिए संबंधित पीएफ अथॉरिटी से मिली इजाजत का सबूत सब्मिट करने को कहा जाता है। शायद ही किसी एंप्लाई के पास यह सबूत होगा। इसलिए अगर आप 'यस' को सेलेक्ट करते हैं और इसका प्रूफ नहीं देते हैं तो ईपीएफओ आपके अप्लिकेशन को इनवैलिड घोषित कर सकता है।

एंप्लॉयी प्रूफ सब्मिट किए बगैर 'यस' को सेलेक्ट कर आगे बढ़ने का फैसला कर सकते हैं लेकिन कोई एंप्लॉयर इस अप्लिकेशन में एंप्लॉयी का साथ नहीं देना चाहेगा जिसमें यह कहा जा रहा है कि पीएफ कमिश्नर के एप्रूवल के बगैर ज्यादा ईपीएफ कंट्रिब्यूशन किया गया।

'नो' ऑप्शन सेलेक्ट करने में भी मुश्किल

अगर किसी एंप्लॉयी को इसकी इजाजत नहीं मिली थी और उसके पास परमिशन लेटर नहीं है तो वह सोच सकता है कि उसे 'नो' ऑप्शन को सेलेक्ट करना चाहिए। लेकिन, डेक्लेरेशन के प्वाइंट नंबर 5 में कहा गया है : "मैं वचन देता हूं कि उपर्युक्त फॉर्म में दी गई सर्विस डिटेल सही हैं और किसी तरह की जानकारी मेरी तरफ से गलत नहीं दी गई है या छुपाई नहीं गई है।" इसलिए 'नो' का मतलब ज्यादा कंट्रिब्यूशन से जुड़ी जानकारी को छुपाने के बराबर है। EPFO इस आधार पर अप्लिकेशन को रिजेक्ट कर सकता है।

अगर कोई एंप्लॉयी 'नो' के साथ आगे बढ़ना चाहता है तो इस अप्लिकेशन में कोई एंप्लॉयर उसके साथ शामिल होना नहीं चाहेगा, जो यह कहता हो कि ज्यादा ईपीएफ कंट्रिब्यूशन नहीं किया गया है, क्योंकि यह तथ्य के उलट है।

शुरू में क्या था प्रावधान?

एक्सपर्ट्स का कहना है कि जब 1992 में यह स्कीम आई थी तब इसमें कहा गया था कि एंप्लॉयीज जिनकी सैलरी 5,000 रुपये से ज्यादा है वे इस स्कीम का मेंबर बनने के हकदार हैं। इसके लिए एंप्लॉयी और एंप्लॉयर का ज्वाइंट डेक्लेरेशन जरूरी होंगे। दूसरा इस अप्लिकेशन को संबंधित प्रोविडेंट फंड कमिश्नर का एप्रूवल होना जरूरी है। लेकिन, जब 1995 में ईपीएस स्कीम आई तब 5000 रुपये से ज्यादा सैलरी पाने वाले एंप्लॉयीज को शामिल नहीं किया गया। यह प्रावधान किया गया कि एंप्लॉयर के कंट्रिब्यूशन के हिस्से में से सैलरी की तय सीमा का 8.33 फीसदी पेंशन फंड में ट्रांसफर कर दिया जाएगा। इसके लिए सैलरी की तय सीमा 31 अगस्त, 2014 तक बढ़ाकर 6,500 रुपये कर दी गई। इस तरह 22 अगस्त, 2014 के एक संशोधन के जरिए 15,000 रुपये से ज्यादा सैलरी वाले एंप्लॉयीज को 1 सितंबर, 2014 से अपनी वास्तविक सैलरी के आधार पर कंट्रिब्यूशन जारी रखने के लिए एक नए विकल्प का इस्तेमाल करना था।

22 जनवरी, 2019 के सर्कुलर में EPFO ने ज्वाइंट ऑप्शन की शर्त में ढील दे दी। लेकिन, एक महीने के अंदर ही इस सर्कुलर को वापस ले लिया गया। इस तरह यह रियायत लागू नहीं हो पाई। इसलिए ऑनलाइन फॉर्म में भी ईपीएफ स्कीम के पाराग्राफ 26(6) के तहत परमिशन को जरूरी बताया गया है। इसलिए एंप्लॉयीज के लिए ज्यादा पेंशन के लिए एंप्लॉयर के साथ एक ज्वाइंट डेक्लेरेशन सब्मिट करना जरूरी है।

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