इंप्लॉयीज प्रोविडेंट फंड ऑर्गेनाइजेशन (EPFO) फिर से कॉर्पोरेट बॉन्ड में इन्वेस्टमेंट शुरू कर सकता है। दो साल पहले उसने कॉर्पोरेट बॉन्ड्स में इन्वेस्टमेंट रोक दिया था। अंग्रेजी न्यूज वेबसाइट इंडियन एक्सप्रेस ने यह खबर दी है। माना जा रहा है कि अपने फंड पर रिटर्न बढ़ाने के लिए वह ऐसा करेगा।
कंपनियां अपने अपनी कारोबारी जरूरतों के लिए बॉन्ड के जरिए उधार लेती है। ऐसे बॉन्ड को कॉर्पोरेट बॉन्ड कहा जाता है। इंडियन एक्सप्रेस ने बताया है कि करेंट इन्वेस्टमेंट पैटर्न के मुताबिक, ईपीएफओ को अपने एनुएल इनक्रिमेंटल डिपॉजिट का 20 फीसदी कॉर्पोरेट बॉन्ड में इन्वेस्ट करने का अधिकार है। यह रकम करीब 36,000 करोड़ रुपये होगी। लेकिन, वह पिछले दो साल से सिर्फ सरकारी कंपनियों के बॉन्ड में इन्वेस्ट करता है।
बुधवार को ईपीएफओ की फाइनेंस इन्वेस्टमेंट एंड ऑडिट कमेटी (FIAC) की बैठक में इस मसले पर चर्चा हुई। कमेटी के सदस्यों ने इस पर बातचीत की कि कब प्राइवेट सेक्टर कंपनियों के बॉन्ड में इन्वेस्ट किया जा सकता है और कब इस इन्वेस्टमेंट को निकाला जा सकता है। एफआईएसी के सदस्य के ई रघुनाथन ने कहा, "आज कोई ठोस फैसला नहीं लिया गया। हमने पिछली दो बैठकों में इस मसले पर विचार किया है।"
उन्होंने कहा कि बुधवार को हुई बैठक में इस मसले पर रिस्क और प्रॉफिट के एंगल से व्यापक बातचीत हुई। रघुनाथन ईपीएफओ के सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज (CBT) के भी सदस्य है। सीबीटी ईपीएफओ की सबसे ताकतवर बॉडी है। केंद्रीय श्रम मंत्री इसके प्रमुख होते हैं। ईपीएफओ में जमा प्राइवेट सेक्टर के इंप्लॉयीज के पैसे पर ब्याज दर तय करने का काम सीबीटी ही करती है। उसके बाद उसे एप्रूवल के लिए फाइनेंस मिनिस्ट्री को भेजा जाता है।
ईपीएफओ ने दो साल पहले प्राइवेट कंपनियों के बॉन्ड में इन्वेस्टमेंट रोक दिया था। तब कुछ कंपनियों के अपने बॉन्ड पर डिफाल्ट करने के बाद ईपीएफओ ने यह कदम उठाया था। प्राइवेट कंपनियां अपने बॉन्ड पर अपेक्षाकृत ज्यादा इंट्रेस्ट रेट ऑफर करती हैं।
एक रिपोर्ट के मुताबिक, सीबीटी की बैठक अगले महीने की शुरुआत में होने वाली है। इसमें चालू वित्त वर्ष यानी 2021-22 में पीएफ फंड में जमा रकम की ब्याज दर के बारे में फैसला होगा। पिछले वित्त वर्ष के दौरान ईपीएफ ने प्राइवेट कर्मचारियों के प्रोविडेंट फंड पर 8.5 फीसदी इंट्रेस्ट दिया था।