EPFO : प्रोविडेंट फंड (PF) निवेशक का सबसे बड़ माध्यम है जिसका इस्तेमाल निवेशक, कर्मचारी रिटायरमेंट प्लान करने के लिए इसका इस्तेमाल करते हैं। अभी हाल ही में EPFO की तरफ ब्याज में कटौती करते हुए इसे 8.1 फीसदी रखा गया था। इसके बाद 1 अप्रैल से पीएफ निवेशकों को एक और तगड़ा झटका लगने वाला है। अभी तक टैक्स फ्री रहने वाले प्रोविडेंट फंड पर 1 अप्रैल से टैक्स चुकाना होगा। आइए जानते हैं क्या ये नया नियम..
केंद्र सरकार ने बदला था नियम
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने बीते साल आम बजट (Budget 2021) में कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (Employees Provident Fund Organisation, EPFO) के खाताधारकों को बड़ा झटका दिया है। वित्त मंत्री ने एक अप्रैल से शुरू हो रहे नए वित्त वर्ष से प्रति वर्ष 2.5 लाख रुपये से अधिक का PF (Provident Fund) जमा करने पर मिलने वाले ब्याज को टैक्स के दायरे में लाने का प्रस्ताव रखा था। सरकार के इस फैसले से ज्यादा कमाई करने वालों को अब भविष्य निधि पर मिलने वाले ब्याज पर भी टैक्स देना होगा।
नए प्रावधान के मुताबिक अब विभिन्न PF में एक वित्त वर्ष में 2.5 लाख रुपये तक के कंट्रीब्यूशन पर मिलने वाले ब्याज पर ही टैक्स छूट का लाभ मिलेगा। इससे अधिक के कंट्रीब्यूशन पर मिलने वाले इंट्रेस्ट पर कर्मचारियों को टैक्स देना होगा। सरकार का यह प्रस्ताव हाई नेटवर्थ इनकम (HNI) वालों के लिए एक झटके की तरह है।
PF अकाउंट में निवेस इनकम टैक्स (Income Tax) कानून के सेक्शन 80C के तहत टैक्स में छूट मिलती है। आपके EPF अकाउंट में कंपनियों की तरफ से जमा किए जाने वाले रकम पर भी टैक्स छूट मिलती है। लेकिन अब यह रकम आपकी बेसिक सैलरी (Basic Salary) के 12 फीसदी से अधिक नहीं होनी चाहिए। अगर रकम इससे अधिक है तो बाकी रकम पर आपको टैक्स देना पड़ेगा।