Bank FD: बिना जोखिम गारंटीड रिटर्न! जानिए 7 प्रकार के ऑप्शंस और आपके लिए कौन सी FD रहेगी सबसे बेस्ट
How to Choose Best FD: एफडी में पैसा लगाने की सोच रहे हैं तो सिर्फ ब्याज दर न देखें। टैक्स सेविंग, फ्लेक्सी से लेकर कॉरपोरेट एफडी तक जानिए कितने प्रकार की होती हैं फिक्स्ड डिपॉजिट और किसमें मिलता है सबसे ज्यादा फायदा। साथ ही जानिए एक्सपर्ट्स का वो फॉर्मूला जिससे कभी नहीं तोड़नी पड़ेगी अपनी एफडी
जानें एफडी कितने प्रकार की होती है और आपको अपने लिए कौन सा ऑप्शन चुनना चाहिए
Fixed Deposit Investment Guide: शेयर बाजार या म्यूचुअल फंड के उतार-चढ़ाव से दूर रहकर जो लोग एक सुरक्षित और तय रिटर्न की गारंटी चाहते हैं, उनके लिए फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) हमेशा से पहली पसंद रही है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि एफडी केवल एक तरह की नहीं होती?
कोई एफडी आपको हर महीने तय इनकम देती है, कोई टैक्स बचाती है, तो किसी में जरूरत पड़ने पर बिना किसी पेनाल्टी के पैसा निकाला जा सकता है। ऐसे में अपनी वित्तीय जरूरतों और गोल्स के हिसाब से सही एफडी चुनना बेहद जरूरी है।
आइए आसान भाषा में समझते हैं कि एफडी कितने प्रकार की होती है और आपको अपने लिए कौन सा ऑप्शन चुनना चाहिए।
कितने प्रकार की होती है फिक्स्ड डिपॉजिट (FD)?
बैंक और वित्तीय संस्थान आपकी अलग-अलग जरूरतों के हिसाब से ये कुछ प्रमुख FD ऑप्शंस ऑफर करते हैं:
1. स्टैंडर्ड एफडी (Standard FD): यह सबसे आम एफडी है, जो 7 दिनों से लेकर 10 साल तक की अवधि के लिए होती है। इसमें आपको बचत खाते से बेहतर और तय ब्याज मिलता है।
2. टैक्स-सेविंग एफडी (Tax-Saving FD): अगर आप टैक्स बचाना चाहते हैं, तो यह बेस्ट है। इसमें 5 साल का लॉक-इन पीरियड होता है और आयकर अधिनियम की धारा 80C के तहत ₹1.5 लाख तक की टैक्स छूट मिलती है।
3. कम्युलेटिव एफडी (Cumulative FD): इसमें मिलने वाले ब्याज को मूलधन में जोड़कर कंपाउंड यानी ब्याज पर ब्याज किया जाता है और पूरा पैसा मैच्योरिटी पर एक साथ मिलता है। यह उन लोगों के लिए बेहतर है जिन्हें बीच में नियमित पैसे की जरूरत नहीं होती और वे बड़ा फंड बनाना चाहते हैं।
4. नॉन-कम्युलेटिव एफडी (Non-Cumulative FD): इसमें मैच्योरिटी का इंतजार नहीं करना पड़ता। आपको आपकी जरूरत के हिसाब से हर महीने, तिमाही, छमाही या सालाना आधार पर ब्याज का भुगतान किया जाता है। रिटायर्ड लोगों के लिए यह बेहतरीन विकल्प है।
5. फ्लेक्सी एफडी (Flexi FD): यह आपके बचत खाते से लिंक होती है। सेविंग्स अकाउंट में एक तय सीमा से ज्यादा पैसा होते ही वह अपने आप एफडी में बदल जाता है, जिस पर ज्यादा ब्याज मिलता है। जरूरत पड़ने पर आप बिना किसी पेनाल्टी के वह पैसा निकाल भी सकते हैं।
6. सीनियर सिटीजन एफडी (Senior Citizen FD): 60 साल या उससे अधिक उम्र के बुजुर्गों को बैंक सामान्य ग्राहकों के मुकाबले 0.50% से 0.75% तक ज्यादा ब्याज देते हैं।
7. कॉरपोरेट एफडी (Corporate FD): यह बैंक नहीं, बल्कि एनबीएफसी या हाउसिंग फाइनेंस कंपनियां जारी करती हैं। इनमें बैंक एफडी से ज्यादा ब्याज मिलता है, लेकिन ध्यान रखें कि इन पर DICGC का 5 लाख रुपये वाला सरकारी बीमा कवर लागू नहीं होता। इसलिए इसमें निवेश से पहले कंपनी की क्रेडिट रेटिंग जरूर जांच लें।
अपने लिए सही FD कैसे चुनें?
लिक्विडिटी और गोल तय करें: अगर आपको हर महीने खर्चों के लिए पैसा चाहिए तो नॉन-कम्युलेटिव एफडी चुनें। अगर लंबे समय के लिए पैसा जोड़ना है तो कम्युलेटिव एफडी चुनें।
समयसीमा का ध्यान रखें: आमतौर पर कम अवधि की एफडी पर ब्याज दर थोड़ी कम और लंबी अवधि की एफडी पर ज्यादा होती है।
लैडरिंग तकनीक अपनाएं: सारा पैसा एक ही एफडी में लगाने के बजाय उसे अलग-अलग अवधि (जैसे- 1 साल, 2 साल, 3 साल) की 3-4 एफडी में बांट दें। इससे आपको जरूरत पड़ने पर बीच-बीच में पैसे मिलते रहेंगे और आपको कभी पूरी एफडी समय से पहले नहीं तोड़नी पड़ेगी।
केवल हाई ब्याज दर देखकर ही किसी एफडी का चुनाव न करें। कॉरपोरेट एफडी में जहां ब्याज थोड़ा ज्यादा मिलता है, वहीं बैंक एफडी में आपकी जमा पूंजी को सरकारी सुरक्षा (DICGC कवरेज) का फायदा मिलता है। अपनी जरूरत, टैक्स स्लैब और लिक्विडिटी को ध्यान में रखकर ही सही विकल्प का चयन करें।
Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।