'LPG सप्लाई चेन बहाल होने में लग सकते हैं 4 साल', सरकारी अधिकारी बोले- अभी नुकसान का सही अंदाजा भी नहीं
LPG सप्लाई चेन में आई रुकावट को ठीक होने में 3-4 साल लग सकते हैं। भारत की आयात निर्भरता, बढ़ती कीमतें और सप्लाई जोखिम चिंता बढ़ा रहे हैं। जानिए इसका असर आम लोगों और बाजार पर कैसे पड़ेगा।
अधिकारी के मुताबिक, कुछ बेहद अहम LPG सप्लाई पूरी तरह बंद हो चुकी हैं।
दुनिया भर में LPG सप्लाई चेन में आई रुकावट जल्दी ठीक होने वाली नहीं है। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी के मुताबिक, इसे सामान्य होने में 3 से 4 साल लग सकते हैं। क्योंकि अभी यह साफ नहीं है कि उत्पादन सिर्फ कुछ समय के लिए रुका है या कहीं स्थायी नुकसान हो गया है।
पश्चिम एशिया पर भारत की निर्भरता
भारत अपनी LPG जरूरतों के लिए काफी हद तक पश्चिम एशिया पर निर्भर है। लेकिन स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की नाकेबंदी और अमेरिका-इजरायल की सैन्य कार्रवाई के जवाब में ईरान के हमलों से सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हुई है।
UAE, सऊदी अरब, कतर, कुवैत, बहरीन और ओमान मिलकर भारत की 92% LPG सप्लाई देते हैं, जिसकी कुल वैल्यू करीब 6 अरब डॉलर (FY25) है। इनमें UAE की हिस्सेदारी 41% और कतर की 22% है।
अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, 'प्रभावित सप्लायर्स से मिली जानकारी के आधार पर सप्लाई बहाल होने में कम से कम 3 साल लग सकते हैं। शायद इससे भी ज्यादा समय लग जाए।' उन्होंने भारत के लिए बढ़ते आयात के जोखिम और लागत दबाव की ओर इशारा किया।
लंबा संकट सामने
भारत की करीब 60% LPG खपत आयात से पूरी होती है। युद्ध से पहले इन आयातों का लगभग 90% हिस्सा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते आता था। लेकिन 24 मार्च तक खाड़ी से आयात का हिस्सा घटकर 55% रह गया। इससे साफ है कि सप्लाई में रुकावट आई है और साथ ही नए स्रोत भी तलाशे जा रहे हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, वैकल्पिक सोर्स और नए रूट अपनाने के बाद भी सप्लाई में 40-50% तक असर बना रह सकता है। यानी समस्या जल्दी खत्म होने वाली नहीं है। सरकार फिलहाल इस बात पर ध्यान दे रही है कि घरों तक LPG की सप्लाई लगातार बनी रहे और किसी तरह की कमी न हो।
असली दिक्कत क्या है
अधिकारी के मुताबिक, कुछ बेहद अहम LPG सप्लाई पूरी तरह बंद हो चुकी हैं। लेकिन 'बंद' का मतलब क्या है, यह अभी साफ नहीं है- क्या कुएं खत्म हो गए हैं या उत्पादन रुका है। यही अनिश्चितता सबसे बड़ी चिंता है। उन्होंने कहा कि इसी वजह से सप्लाई को सामान्य होने में कम से कम 3 साल लग सकते हैं।
सरकार उन उपायों को फिर से अपनाने पर विचार कर रही है, जो कोविड के दौरान किए गए थे। इनमें आयात के स्रोत बढ़ाना, शिपमेंट के रास्ते बदलना, घरेलू उत्पादन बढ़ाना और मांग को मैनेज करना शामिल है। फोकस इस बात पर है कि खपत को संभाला जाए और घरों को LPG सप्लाई में कोई दिक्कत न आए।
स्टोरेज कम, जोखिम ज्यादा
भारत में सालाना LPG की मांग करीब 33 मिलियन टन है, लेकिन स्टोरेज क्षमता सिर्फ 15 दिन की खपत के बराबर है। ऐसे में थोड़ी सी भी रुकावट से सप्लाई और कीमत दोनों पर दबाव बढ़ सकता है। मिड-मार्च से घरेलू 14.2 किलो LPG सिलेंडर ₹60 महंगा हो चुका है। वहीं, कमर्शियल सिलेंडर ₹115 तक बढ़ गया है।
सप्लाई में रुकावट के कारण शिपिंग (फ्रेट) और इंश्योरेंस की लागत बढ़ गई है, जिससे LPG और महंगी हो सकती है। सरकार ने रिफाइनरी कंपनियों को LPG उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए हैं, लेकिन इससे उनके ग्रॉस रिफाइनिंग मार्जिन पर दबाव पड़ सकता है।
किन पर पड़ेगा असर
LPG की बढ़ती कीमतों का असर होटल, रेस्टोरेंट और छोटे कारोबारों पर पड़ रहा है। साथ ही घरेलू सिलेंडर पर सब्सिडी देने वाली ऑयल मार्केटिंग कंपनियों पर भी दबाव बढ़ रहा है।
हालांकि भारत रिफाइंड पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स का निर्यात करता है, फिर भी LPG, नैफ्था और फ्यूल ऑयल जैसे ईंधनों के लिए आयात पर निर्भरता बनी हुई है। इसी वजह से देश ग्लोबल कीमतों और सप्लाई में उतार-चढ़ाव के प्रति संवेदनशील बना रहता है।