Gold Price: सोना पहुंचा बबल जोन में, जल्द $300-400 की गिरावट आने का अंदेशा

Gold Price: सोने की कीमतों में हालिया उछाल ने निवेशकों के पोर्टफोलियो एलोकेशन को सामान्य से ज्यादा बढ़ा दिया है। ऊंची कीमतों के बावजूद निकट भविष्य में गिरावट बाजार के लिए अच्छी रहेगी, जिससे आगे चलकर निवेशकों की दिलचस्पी बनी रहेगी

अपडेटेड Oct 20, 2025 पर 8:22 PM
आने वाले महीनों में सोने में मुनाफा-वसूली का दौर देखने को मिल सकता है।

देश के अंदर और वैश्विक बाजार में रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच चुके सोने की कीमतों में जल्द ही गिरावट आ सकती है। ऐसी आशंका कामाख्या ज्वेल्स के को-फाउंडर मनोज झा ने जताई है। CNBC-TV18 से बात करते हुए झा ने कहा कि ऐसा लगता है कि सोना "बबल जोन" में एंटर कर गया है। आने वाले महीनों में इसमें मुनाफा-वसूली का दौर देखने को मिल सकता है। भारत में मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर दिसंबर में डिलीवरी वाले सोने का वायदा भाव 20 अक्टूबर को 2.12 प्रतिशत चढ़कर 129700 रुपये पर रहा।

वैश्विक स्तर पर सोने का हाजिर भाव 0.1% बढ़कर 4,253.33 डॉलर प्रति औंस हो गया। दिसंबर डिलीवरी वाला यूएस गोल्ड फ्यूचर्स 1.3% बढ़कर 4,266.30 डॉलर प्रति औंस हो गया। अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दरों में और कटौती की उम्मीद और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताएं सोने की तेजी के पीछे अहम वजह हैं।

अपने महत्वपूर्ण मोड़ पर सोना


झा के मुताबिक,, "सोना अपने महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंच गया है। निवेशक भी थोड़े चिंतित हैं। इससे पहले, सोने ने 1979-80 और फिर 2010-11 में बड़ी तेजी दिखाई थी। लेकिन उन ऊंचाइयों के बाद इसमें बड़ी गिरावट आई।" झा के अनुसार, सोने की कीमतों में हालिया उछाल ने निवेशकों के पोर्टफोलियो एलोकेशन को सामान्य से ज्यादा बढ़ा दिया है। उन्होंने कहा, "आमतौर पर लोग अपने पोर्टफोलियो में 10-12% सोना रखते हैं, लेकिन कीमतों में हालिया बढ़ोतरी के बाद यह रेशियो बढ़कर 18-22% हो गया है। इसलिए, लोग अभी मुनाफा कमाना चाह सकते हैं क्योंकि सोना ओवरबॉट जोन में है।"

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गिरावट पर लॉन्ग टर्म निवेशक फिर से लगा सकते हैं पैसा

झा का मानना है कि निकट भविष्य में सोने की कीमत में लगभग 300-400 डॉलर प्रति औंस की गिरावट आएगी। उन्होंने कहा कि इस स्तर पर आप नए निवेश अवसरों की उम्मीद कर सकते हैं। झा का सुझाव है कि कीमतें स्थिर होने पर लॉन्ग टर्म निवेशक फिर से निवेश कर सकते हैं। सोने में शॉर्ट टर्म गिरावट की आशंका के बावजूद झा भारत में त्योहारी और लॉन्ग टर्म डिमांड को लेकर आशावादी हैं।

उनका कहना है कि इस साल धनतेरस के दौरान ज्वैलरी की मांग उम्मीद से बेहतर रही। रिकॉर्ड कीमतों के बावजूद बिक्री में केवल 15-20% की गिरावट आई। सराफा बिक्री सालाना आधार पर 25% से ज्यादा बढ़ी। ऊंची कीमतों के बावजूद झा का मानना ​​है कि निकट भविष्य में गिरावट बाजार के लिए अच्छी रहेगी, जिससे आगे चलकर निवेशकों की दिलचस्पी बनी रहेगी।

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