सोने (Gold Rates) का भाव 2400 डॉलर प्रति औंस के करीब पहुंच गया है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह गोल्ड में कई साल वाले बुल रन की शुरुआत का संकेत है। इस साल अब तक गोल्ड का रिटर्न 13.6 फीसदी से ज्यादा रहा है। बीते छह महीनों में रिटर्न 25.5 फीसदी और बीते एक साल में 17.8 फीसदी रहा है। दशकों से सोने को इनफ्लेशन से बचाव का जरिया माना जाता है। हालांकि, पिछले कुछ महीनों में गोल्ड का रिटर्न इनफ्लेशन के रेट से ज्यादा रहा है। एक्सपर्ट्स गोल्ड में तेजी जारी रहने का अनुमान जता रहे हैं। ऐसे में अपने पोर्टफोलियो में गोल्ड की हिस्सेदारी पर यह फिर से विचार करने का सही समय है।
गोल्ड में तेजी की वजह क्या है?
पहले गोल्ड में जारी तेजी की वजह जान लेते हैं। पिछले एक-दो सालों में दुनिया में जियोपॉलिटकल टेंशन बढ़ा है। पिछले कुछ सालों में दुनियाभर में इनफ्लेशन में उछाल है। उधर, राजनीतिक अनिश्चितता की वजह से दुनिया के कई देशों के केंद्रीय बैंक गोल्ड में निवेश बढ़ा रहे हैं। अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ने इंटरेस्ट रेट में इस साल कमी के संकेत दिए हैं। लेकिन, वह इंटरेस्ट रेट में कटौती तभी करेगा, जब इनफ्लेशन पूरी तरह कंट्रोल में आ जाएगा।
गोल्ड में कितना निवेश होना चाहिए?
एक्सपर्ट्स का कहना है कि आपके इनवेस्टमेंट पोर्टफोलियो में कम से कम 10 फीसदी गोल्ड होना चाहिए। इसलिए सिर्फ गोल्ड की कीमतों में उछाल को देखते हुए आपको पोर्टफोलियो में गोल्ड को शामिल करने के बारे में नहीं सोचना चाहिए। इसकी वजह यह है कि किसी एसेट की कीमत में किसी खास पीरियड में आए उछाल के आधार पर पोर्टफोलियो में उसका एलोकेशन तय करना ठीक नहीं है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि गोल्ड की कीमतें अगले 6-7 साल में पीक पर पहुंच जाएंगी। लेकिन, यह सिर्फ अनुमान है।
अगर पहले से गोल्ड में निवेश है तो चिंता नहीं करें
इसलिए अचानक गोल्ड में निवेश करने की जगह आपको इसमें धीरे-धीरे निवश करना चाहिए। वह भी तब जब आपके पोर्टफोलियो में गोल्ड की हिस्सेदारी ना के बराबर हो। अगर आपके पोर्टफोलियो में गोल्ड की हिस्सेदारी 8-10 फीसदी तक है तो आपको चिंता करने की जरूरत नहीं है। आपको ध्यान में रखना होगा कि न सिर्फ गोल्ड बल्कि दुनियाभर के स्टॉक मार्केट में तेजी का ट्रेंड है।
अभी हर एसेट क्लास में है तेजी का ट्रेंड
कई इनवेस्टर्स गोल्ड में तेजी को देख इसमें निवेश बढ़ाने के बारे में सोच रहे हैं। लेकिन, यह समझना होगा कि हर एसेट क्लास के अपने डायनेमिक्स होते हैं। इसलिए अपने पोर्टफोलियो में एसेट एलोकेशन में बुनियादी बदलाव करना ठीक नहीं है। ऐसे इनवेस्टर जिनकी उम्र कम है उन्हें अब भी अपने पोर्टफोलियो में इक्विटी की हिस्सेदारी ज्यादा रखनी चाहिए। उम्र बढ़ने के साथ इक्विटी में हिस्सेदारी घटाई जा सकती है। लेकिन, इसका मतलब यह नहीं है कि आप इक्विटी की हिस्सेदारी घटाकर गोल्ड की हिस्सेदारी बढ़ाए। इसलिए गोल्ड में तेजी को देख जल्दबाजी में अपने एसेट एलोकेशन में बड़ा बदलाव करना ठीक नहीं होगा।
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