गोल्ड या फिक्स्ड डिपॉजिट, पोर्टफोलियो डायवर्सिफाय करने के लिए कौन बेहतर?

जेफरीज की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में परिवारों के एसेट के 15 फीसदी हिस्से का निवेश गोल्ड में है। गोल्ड में निवेश के कई फायदे हैं। एक तरफ यह डायवर्सिफिकेशन में मदद करता है तो दूसरी तरफ सुरक्षित निवेश का सबसे अच्छा माध्यम है

अपडेटेड May 03, 2023 पर 6:14 PM
जब शेयर बाजार निराश करता है तो गोल्ड निवेशकों को होने वाले नुकसान की भरपाई कर देता है। साल 2016, 2018 और 2022 इसके उदाहरण हैं।

स्वादिष्ट खाने में जिस तरह कई चीजों का इस्तेमाल होता है, उसी तरह सही पोर्टफोलियो में अलग-अलग तरह के एसेट का शामिल होना जरूरी है। आम तौर पर लोग पोर्टफोलियो में शेयर और डेट तो शामिल करते हैं, लेकिन गोल्ड उसमें शामिल नहीं होता है। अगर आप अपने माता-पिता या दादा-दादी से पूछेंगे तो पाएंगे कि उनके इनवेस्टमेंट प्लान में हमेशा सोना शामिल था। जेफरीज की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में परिवारों के एसेट के 15 फीसदी हिस्से का निवेश गोल्ड में है। गोल्ड में निवेश के कई फायदे हैं। एक तरफ यह डायवर्सिफिकेशन में मदद करता है तो दूसरी तरफ सुरक्षित निवेश का सबसे अच्छा माध्यम है।

कैसा होना चाहिए पोर्टफोलियो?

एक औसत निवेशक के पोर्टफोलियो में शेयरों का होना जरूरी है, क्योंकि यह लंबी अवधि में वेल्थ क्रिएशन में मदद करता है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि हर उम्र के इनवेस्टर्स को कम से कम 20 फीसदी निवेश गोल्ड में करना चाहिए। हम इसे एक उदाहरण की मदद से समझ सकते हैं। मान लीजिए पोर्टफोलियो A में गोल्ड की हिस्सेदारी 20 फीसदी और इक्विटी की हिस्सेदारी 80 फीसदी है। पोर्टफोलियो B में डेट की हिस्सेदारी 20 फीसदी और इक्विटी की हिस्सेदारी 80 फीसदी है।


डायवर्सिफिकेशन के लिए बेहतर

अगर साल 2003 से 2023 के पीरियड में पोर्टफोलियो A के रिटर्न को देखें तो इसका रिटर्न पोर्टफोलियो B के मुकाबले अच्छा रहा है। इसमें उतार-चढ़ाव भी कम देखने को मिला है। साथ ही गिरावट की स्थिति में इसकी वैल्यू में ज्यादा कमी भी देखने को नहीं मिली। अगर हम थोड़ा और गहराई में जाते हैं तो पाते हैं कि पिछले दो दशकों में जिन सालों में शेयर मार्केट का निगेटिव रिटर्न 10 फीसदी से ज्यादा रहा है, उनमें डेट ने सामान्य पॉजिटिव रिटर्न देकर पोर्टफोलियो को स्थिरिता दिया है। साल 2008 और 2011 इसके उदाहरण हैं। अगर हम गोल्ड की बात करें तो उसने 30 फीसदी रिटर्न देकर पोर्टफोलियो को बड़ी ताकत दी है।

portfolio return

शेयर बाजार से नुकसान की भरपाई

जब शेयर बाजार निराश करता है तो गोल्ड निवेशकों को होने वाले नुकसान की भरपाई कर देता है। साल 2016, 2018 और 2022 इसके उदाहरण हैं। हालांकि, हमने देखा है कि इंडिया में इनवेस्टर्स के पोर्टफोलियो में डेट का ज्यादा महत्व रहा है। लेकिन, अब इस रणनीति में बदलाव करने का वक्त आ चुका है। यह सही है कि डेट गोल्ड के मुकाबले ज्यादा स्टेबल है। लेकिन, शेयर बाजार जब निराश करता है तो गोल्ड अपने रिटर्न से पोर्टफोलियो को संभालने में मदद करता है।

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