Gold Outlook: सोने की कीमत अपने ऑल-टाइम हाई से 26 फीसदी गिर चुकी है। अंतरराष्ट्रीय बजार में सोना 4100 डॉलर प्रति औंस से नीचे आ गया है। इसकी वजह मध्यपूर्व में बढ़ता टेंशन है। महंगे क्रूड से महंगाई बढ़ रही है। इसे काबू में करने के लिए केंद्रीय बैंक इंटरेस्ट रेट बढ़ा रहे हैं, जिसका निगेटिव असर सोने की कीमतों पर पड़ रहा है।
सोने में तेजी का ट्रेंड जारी है
सोने पर दबाव के बावजूद कमोडिटी एनालिस्ट्स का कहना है कि सोने में तेजी के रुख पर ब्रेक नहीं लगा है। जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता और दुनिया के कई देशों के केंद्रीय बैंकों की खरीदारी से सोने की कीमतों को सपोर्ट मिल रहा है। बोनांजा पोर्टफोलियो के सीनियर रिसर्च एनालिस्ट नृपेंद्र यादव ने कहा, "अमेरिकी डॉलर में मजबूती और ब़न्ड यील्ड में उछाल का असर सोने की कीमतों पर पड़ रहा है।"
रिकॉर्ड ऊंचाई से 26% फिसला
उन्होंने कहा कि हालिया तेजी के बाद पोजीशन खत्म करने की वजह से भी गिरावट को सपोर्ट मिला है। लेकिन, इस गिरावट का मतलब यह नहीं है कि सोने में तेजी का ट्रेंड खत्म हो गया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस साल 28 जनवरी को सोने की कीमत 5,600 डॉलर प्रति औंस की रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई थी। 23 अक्तूबर को कीमत इस लेवल से 26 फीसदी से ज्यादा गिरकर 4,007 डॉलर प्रति औंस पर आ गई है।
घेरलू बाजार में भी तेज गिरावट
घरेलू बाजार में भी सोने में इसी तरह का ट्रेंड दिखा है। 29 जनवरी को एमसीएक्स पर गोल्ड फ्यूचर्स चढ़कर 1,76,306 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया था। 23 अक्तूबर यानी गुरुवार को यह गिरकर 1,42,778 रुपये प्रति 10 ग्राम पर चल रहा था। इस गिरावट ने सोने और चांदी के निवेशकों को मायूस किया है। खास बात यह है कि इस साल शेयर बाजारों में भी लगातार गिरावट दिख रही है।
इंटरेस्ट बढ़ने की उम्मीद से बढ़ा दबाव
ऑगमोंट में चीफ रिसर्च अधिकारी रूपशा चैनानी के मुताबिक, गोल्ड में बीते चार महीनों में सबसे तेज गिरावट आई है, जिसकी वजह क्रूड ऑयल की ऊंची कीमतें हैं। क्रूड में उछाल से इंटरेस्ट रेट लंबे समय तक हाई बने रहने के आसार हैं। डॉलर में मजबूती और बॉन्ड यील्ड में उछाल का असर भी सोने पर पड़ा है।
फेड के फैसले पर लगी नजरें
इनवेस्टर्स को फेडरल रिजर्व की पॉलिसी पर नजर बनाए रखने की जरूरत है। अमेरिकी केंद्रीय बैंक की बैठक 27 अक्तूबर को शुरू होगी। इसके नतीजे 28 अक्तूबर को आएंगे। भारतीय समय के मुताबिक, देर रात इस बारे में पता चलेगा। अगर फेड लगातार दूसरी बार इंटरेस्ट रेट बढ़ाता है तो सोने पर दबाव बढ़ सकता है।
निवेशकों को क्या करना चाहिए?
यादव ने कहा, "निवेशकों को सोने में उतार-चढ़ाव के दौरान ज्यादा खरीदारी से बचना चाहिए। वे रिस्क लेने की अपनी क्षमता और निवेश के लक्ष्य के हिसाब से धीरे-धीरे निवेश बढ़ा सकता है।" शॉर्ट टर्म में सोने का भाव 1,40,000 रुपये प्रति 10 ग्राम तक आ सकता है। इसके बाद अगले दो से तीन महीनों में इसमें 10-15 फीसदी की तेजी दिख सकती है। 4,200 डॉलर के पार जाने पर इसमें नई तेजी शुरू हो सकती है।