इंडिया में कैंसर और दूसरी नॉन-कम्युनिकेबल डिजीज (एनसीडी) के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। अपोलो हॉस्पिटल्स की एक रिपोर्ट से यह जानकारी मिली है। इस रिपोर्ट में चौंकाने वाली बाते बताई गई हैं। इसमें कहा गया है कि इंडिया में हर तीन में से एक व्यक्ति प्री-डायबिटिक है। हर तीन में से दो लोगों को ब्लड प्रेशर की शिकायत है। हर 10 व्यक्ति में से एक व्यक्ति डिप्रेशन में है। कैंसर, डायबिटीज, हायपरटेंशन, ह्रदय रोग और मानसिक बीमारियां आम हो गई हैं।
ज्यादा कवरेज वाली पॉलिसी जरूरी है
अपोलो की रिपोर्ट से यह साफ हो जाता है कि स्वास्थ्य को लेकर इस बढ़ती चुनौती का सामना करना जरूरी है। साथ ही ज्यादा कवरेज वाली हेल्थ पॉलिसी (Health Policy) अनिवार्य है। अब हेल्थ पॉलिसी एक विकल्प नहीं है। हर व्यक्ति के लिए यह पॉलिसी जरूरी है। आपकी हेल्थ पॉलिसी ऐसी होनी चाहिए, जो स्वास्थ से जुड़ी आपकी हर जरूरत पूरी कर सके। इसलिए हेल्थ पॉलिसी खरीदने से पहले आपको अपनी मेडिकल हिस्ट्री और हेल्थ की ठीक तरह से समझना जरूरी है।
उम्र बढ़ने के साथ इंश्योरेंस की जरूरत बदलती है
आप अपनी लाइफस्टाइल और फैमिली की मेडिकल हिस्ट्री के आधार पर भविष्य में हेल्थ को लेकर आने वाले चैलेंज का अंदाजा लगा सकते हैं। उदाहरण के लिए अगर किसी व्यक्ति के परिवार में पहले से सदस्यों को डायबिटीज या दिल की बीमारी है तो आपको ऐसी हेल्थ पॉलिसी लेनी चाहिए, जिसमें ये बीमारियां पूरी तरह से कवर हो जाए। इसके अलावा आपको यह भी समझने की जरूरत है कि उम्र बढ़ने के साथ हेल्थ इंश्योरेंस की जरूरतें बदलती रहती हैं।
परिवार के लिए फ्लोटर पॉलिसी लेने में फायदा
जब व्यक्ति अविवाहित होता है तो उसका फोकस बेसिक कवर और कम प्रीमियम वाली हेल्थ पॉलिसी पर होता है। लेकिन, विवाहित होने के बाद फैमिली फ्लोटर प्लान लेना समझदारी है। इसमें पति और पत्नी दोनों कवर होते हैं। जब आप बच्चों के पिता बन जाते हैं तो आपको हेल्थ पॉलिसी में उन्हें शामिल कराना होगा। इसमें बच्चों की वैक्सीनेशन सहित दूसरे मेडिकल केयर शामिल होते हैं।
उम्र बढ़ने के साथ पॉलिसी के बेनेफिट्स बढ़ने चाहिए
जब व्यक्ति रिटायरमेंट की तरफ बढ़ता है तो उसकी पॉलिसी में क्रिटिकल इलनेस और हॉस्पिटलाइजेशन का कवरेज जरूरी हो जाता है। उम्र बढ़ने पर मेडिकल केयर की जरूरत बढ़ जाती है। आपको यह ध्यान में रखना होगा कि कम उम्र में हेल्थ पॉलिसी खरीदना समझदारी है। इससे उम्र बढ़ने के साथ पॉलिसी के बेनेफिट्स बढ़ते रहते हैं। जब व्यक्ति रिटायरमेंट के करीब होता हो तो ज्यादातर बीमारियां इसमें कवर हो जाती हैं।
पॉलिसी सेलेक्ट करने में थोड़ा होमवर्क जरूरी
सही हेल्थ प्लान को सेलेक्ट करने में जल्दबाजी नहीं करें। कई हेल्थ प्लान के फीचर्स की तुलना करें। आपको इंटरनेट पर हेल्थ पॉलिसी के कई ऑप्शन मिल जाएंगे। उनके बेनेफिट्स, कॉस्ट, कवरेज आदि को समझने की कोशिश करें। यह याद रखें कि सबसे सस्ती हेल्थ पॉलिसी जरूरी नहीं कि सबसे अच्छी हो। अगर आपको खुद सही पॉलिसी सेलेक्ट करने में दिक्कत आ रही है तो आप इंश्योरेंस एडवाइजर की मदद ले सकते हैं।
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हेल्थ पॉलिसी खरीदने में इन फीचर्स का रखें खास ध्यान
कवरेज: ऐसी हेल्थ पॉलिसी लें जिसमें इनपेशेंट और आउटपेशेंट केयर शामिल हों। साथ ही कैंसर जैसी क्रिटिकल इलनेस कवर और आपकी हेल्थ के हिसाब से दूसरे कवर शामिल होने चाहिए।
नेटवर्क: व्यापक हॉस्पिटल नेटवर्क वाली हेल्थ पॉलिसी लेने में फायदा है। इससे कैशलेस क्लेम सेटलमेंट की सुविधा मिलती है। इलाज के दौरान आपको अपनी जेब से पैसे खर्च नहीं करने पड़ते हैं।
नो क्लेम बोनस: कई ऐसे प्लान हैं, जो पॉलिसीहोल्डर के स्वस्थ रहने और किसी तरह का क्लेम नहीं करने पर पॉलिसी का कवरेज और सम इनश्योर्ड बढ़ा देते हैं। यह एक तरह से पॉलिसीहोल्डर की अच्छी हैबिट का इनाम होता है।