सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (एसजीबी) पिछले कुछ सालों से गोल्ड में निवेश का अट्रैक्टिव ऑप्शन बन गया है। इसके कई कारण हैं। इसकी सुरक्षा को लेकर चिंता करने की जरूरत नहीं रहती है। गोल्ड की शुद्धता को लेकर भी कोई संदेह नहीं रहता है। साथ ही इस पर इंटरेस्ट भी मिलता है। लेकिन, एसजीबी में सरकार की दिलचस्पी घटती दिख रही है। इस साल फरवरी से आरबीआई ने एसीजीबी की नई किस्त जारी नहीं की है। सरकार की तरफ से आरबीआई समय-समय पर एसजीबी की किस्त जारी करता है। मनीकंट्रोल ने जुलाई के आखिर में बताया था कि सरकार एसजीबी की घटा सकती है या इसे बंद कर सकती है।
बीएसई और एनएसई पर होती है एसजीबी की ट्रेडिंग
एसजीबी की नई किस्त जारी नहीं होने पर निवेशकों के पास स्टॉक एक्सचेंजों पर एसजीबी में निवेश करने का विकल्प है। BSE और NSE में एसीजीबी की ट्रेडिंग होती है। RBI ने एसजीबी की पहली किस्त 30 नवंबर, 2015 को जारी की थी। तब से इसकी 67 किस्तें जारी हो चुकी हैं। इसके तहत कुल 14.7 करोड़ यूनिट्स जारी की गई हैं। बीएसई और एनएसई के कैश सेगमेंट में एसजीबी लिस्टेड हैं। रिटेल इनवेस्टर्स डीमैट अकाउंट के जरिए एसजीबी को खरीद और बेच सकते हैं।
स्टॉक एक्सचेंजों में लिक्विडिटी काफी कम
अगर आप स्टॉक्स एक्सचेंज में एसजीबी खरीदने के बारे में सोच रहे हैं तो आपको दो चीजों का ध्यान रखना होगा। एसजीबी की कई किस्तों में लिक्विडिटी काफी कम है। बॉन्ड की अच्छी कीमत तभी मिलती है, जब उसमें पर्याप्त लिक्विडिटी होती है। एसजीबी की किस्तों में बीएसई और एनएसई पर रोजाना का औसत ट्रेडेड वॉल्यूम सिर्फ 13.4 करोड़ था। दूसरा है रेफरेंस रेट के मुकाबले एसजीबी बॉन्ड का ट्रेडेड प्राइस। ibjarates.com पर प्रकाशित 999 प्योरिटी गोल्ड का प्राइस एजीबी के लिए रेफरेंस रेट होता है।
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निवेश में पर्चेज प्राइस का रखें ध्यान
एसजीबी की ज्यादातर किस्त में उसके रेफरेंस रेट के मुकाबले प्रीमियम पर ट्रेडिंग होती है। इसलिए एसजीबी की उन किस्तों में निवेश करना ठीक रहेगा, जिनका ट्रेडिंग प्राइस गोल्ड के रेफरेंस रेट से कम या उसके करीब है। इससे निवेशक को ज्यादा रिटर्न मिलने की संभावना रहेगी। ज्यादा ट्रेडिंग प्राइस पर निवेश करने पर निवेशक का रिटर्न कम रह सकता है। एसजीबी का मैच्योरिटी पीरियड 8 साल होता है। मैच्योरिटी पर एसजीबी पर मिले इंटरेस्ट अमाउंट पर टैक्स लगता है। लेकिन, कैपिटल गेंस पर कोई टैक्स नहीं लगता है। सरकार हर साल एसजीबी में निवेश पर 2.5 फीसदी इंटरेस्ट देती है। इससे एसजीबी में निवेश का आकर्षण बढ़ जाता है।