किस उम्र में बैंक में होना चाहिए कितना पैसा? ये है बचत का वो 'सीक्रेट फॉर्मूला' जिससे कभी नहीं होगी तंगी
Investments Savings Rule: कई भारतीय वेल्थ मैनेजर्स का कहना है कि भारत में सोशल सिक्योरिटी का सिस्टम हर नागरिक के लिए नहीं है, इसलिए यहां केवल बैंक अकाउंट में पैसा रखने के बजाय 'एसेट एलोकेशन' पर ध्यान देना चाहिए। भारत में महंगाई दर को मात देने के लिए 50% बचत इक्विटी या म्यूचुअल फंड में और बाकी फिक्स्ड इनकम में होनी चाहिए
जितनी जल्दी आप शुरुआत करेंगे, 'कंपाउंडिंग का जादू' उतनी ही तेजी से आपके पैसे को बढ़ाएगा
Right Savings Amount by Age: 'पैसा खुदा तो नहीं, पर खुदा की कसम खुदा से कम भी नहीं'। यह कहावत आज के दौर में बिल्कुल सटीक बैठती है। हम सब दिन-रात मेहनत करके पैसा कमाते हैं, लेकिन क्या हम अपनी उम्र के हिसाब से सही बचत कर पा रहे हैं? अक्सर लोग 30 या 40 की उम्र में पहुंचने के बाद सोचते हैं कि काश उन्होंने थोड़ी और बचत कर ली होती।
पैसा बचाने का कोई एक तय नियम नहीं है, लेकिन दुनिया भर के पर्सनल फाइनेंस एक्सपर्ट्स और वेल्थ मैनेजर एक खास 'थंब रूल' का इस्तेमाल करते हैं। यह फॉर्मूला बताता है कि 30, 40, 50 और 60 की उम्र तक पहुंचते-पहुंचते आपके बैंक खाते या निवेश में आपकी सालाना सैलरी के मुकाबले कितना पैसा इकट्ठा हो जाना चाहिए। आइए इस पूरी गाइडलाइन को आसान भाषा में समझते हैं।
केंटिन विंगेट का मशहूर 'थंब रूल' क्या है?
वैश्विक वित्तीय संस्थाओं और निवेश सलाहकारों द्वारा 'फिडेलिटी इन्वेस्टमेंट्स' के एक बेहद लोकप्रिय फॉर्मूले का हवाला दिया जाता है। इस थंब रूल के अनुसार, आपकी बचत का सीधा संबंध आपकी मौजूदा उम्र और आपकी सालाना कमाई से होना चाहिए। इस फॉर्मूले का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जब आप 60 या 65 की उम्र में रिटायर हों, तो आपके पास लाइफस्टाइल को मेंटेन रखने के लिए पर्याप्त फंड मौजूद हो।
उम्र के हिसाब से कितनी होनी चाहिए बचत?
आइए एक्सपर्ट्स के इस फॉर्मूले को अलग-अलग उम्र के पड़ाव के हिसाब से देखते हैं:
30 साल की उम्र तक: इस उम्र तक आपके पास आपकी 1 साल की सालाना सैलरी के बराबर रकम की बचत हो जानी चाहिए। मान लीजिए 30 की उम्र में आपकी सालाना सैलरी ₹6 लाख है, तो आपके बैंक, पीएफ, म्यूचुअल फंड आदि को मिलाकर कुल बचत कम से कम ₹6 लाख होनी चाहिए। करियर के शुरुआती सालों में यह मुश्किल लग सकता है, लेकिन 22-25 की उम्र से ही एसआईपी शुरू करके इसे आसानी से पाया जा सकता है।
40 साल की उम्र तक: 40 का आंकड़ा छूते ही आपकी कुल बचत आपकी सालाना सैलरी की 3 गुना होनी चाहिए। अगर इस उम्र में आपका सालाना पैकेज ₹10 लाख है, तो आपकी कुल वेल्थ कम से कम ₹30 लाख के आसपास होनी चाहिए। इस उम्र में बच्चों की पढ़ाई और होम लोन जैसी जिम्मेदारियां बढ़ती हैं, इसलिए अनुशासन जरूरी है।
50 साल की उम्र तक: उम्र के इस पड़ाव पर आपकी बचत आपकी सालाना सैलरी की 6 गुना के बराबर पहुंच जानी चाहिए। यानी अगर आपकी सालाना कमाई ₹15 लाख है, तो 50 की उम्र तक आपके पास ₹90 लाख का फंड तैयार होना चाहिए। यह वह समय होता है जब आप अपने करियर के शीर्ष पर होते हैं और आपकी बचत की रफ्तार सबसे तेज होनी चाहिए।
60 साल की उम्र तक: रिटायरमेंट के मुहाने पर खड़े होने के दौरान आपकी कुल जमा पूंजी आपकी सालाना सैलरी की 8 से 10 गुना होनी चाहिए। अगर आपकी सालाना आय ₹20 लाख है, तो आपके पास ₹1.6 करोड़ से ₹2 करोड़ तक का रिटायरमेंट कॉर्पस होना चाहिए, ताकि नौकरी छूटने के बाद भी आपकी जिंदगी बिना किसी आर्थिक तंगी के आराम से कट सके।
एक्सपर्ट्स के अनुसार भारत के लिए क्या है सही फॉर्मूला?
भारतीय बाजारों और यहां के रहन-सहन के खर्च को देखते हुए देश के जाने-माने पर्सनल फाइनेंस एक्सपर्ट्स का थोड़ा अलग और व्यावहारिक नजरिया है।
कई भारतीय वेल्थ मैनेजर्स का कहना है कि भारत में सोशल सिक्योरिटी का सिस्टम हर नागरिक के लिए नहीं है, इसलिए यहां केवल बैंक अकाउंट में पैसा रखने के बजाय 'एसेट एलोकेशन' पर ध्यान देना चाहिए। भारत में महंगाई दर को मात देने के लिए 50% बचत इक्विटी या म्यूचुअल फंड में और बाकी फिक्स्ड इनकम (PPF, FD) में होनी चाहिए।
इसके अलावा, भारतीय एक्सपर्ट्स '50-30-20' का नियम अपनाने की सलाह देते हैं। यानी अपनी इन-हैंड सैलरी का 50% हिस्सा जरूरतों पर, 30% इच्छाओं पर खर्च करें और कम से कम 20% हिस्सा हर महीने बिना चूके भविष्य के लिए बचाएं।
बचत बढ़ाने के लिए तुरंत अपनाएं ये 3 आदतें
अगर आप ऊपर दी गई उम्र की समयसीमा से पीछे चल रहे हैं, तो घबराने की जरूरत नहीं है। आप इन तीन तरीकों से अपनी बचत को ट्रैक पर ला सकते हैं:
इमरजेंसी फंड बनाएं: किसी भी निवेश से पहले अपने बैंक खाते में कम से कम 6 महीने के खर्च के बराबर की रकम 'इमरजेंसी फंड' के रूप में रखें, जिसे मुश्किल वक्त में तुरंत निकाला जा सके।
सैलरी बढ़ते ही बचत बढ़ाएं: हर साल जब आपका इंक्रीमेंट हो, तो अपने खर्च बढ़ाने के बजाय अपनी बचत की रकम को भी 10% बढ़ा दें। इसे 'स्टेप-अप' कहते हैं, जो कंपाउंडिंग की मदद से लॉन्ग टर्म में बहुत बड़ा फंड बना देता है।
कम उम्र से निवेश की ताकत: जितनी जल्दी आप शुरुआत करेंगे, 'कंपाउंडिंग का जादू' उतनी ही तेजी से आपके पैसे को बढ़ाएगा। ₹2000 की एसआईपी अगर 25 की उम्र में शुरू की जाए, तो वह 55 की उम्र तक करोड़ों का फंड बन सकती है।
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