अप्रैल वह महीना है जिसमें नौकरी (प्राइवेट) करने वाले लोगों को अपने प्रस्तावित इनवेस्टमेंट (Proposed Investment) के बारे में अपनी कंपनी के फाइनेंस डिपार्टमेंट को बताना पड़ता है। आम तौर पर एंप्लॉयी इनकम टैक्स के सेक्शन 80सी और सेक्शन 80डी जैसे डिडक्शन के प्रावधान को ध्यान में रख अपने इनवेस्टमेंट प्लान के बारे में बताते हैं। कंपनियां इस लिए एंप्लॉयीज से ये जानकारियां मांगती हैं, क्योंकि उनके लिए TDS काटना जरूरी होता है। TDS के कैलेकुलेशन के लिए एंप्लॉयीज की टैक्सबेल इनकम को जानना बहुत जरूरी है। इसलिए आपको प्रस्तावित इनवेस्टमेंट के बारे में कंपनी को बताने के लिए पहले से तैयार रहना चाहिए।
फाइनेंशियल प्लानिंग का सही वक्त
फाइनेंशियल ईयर की शुरुआत अपने फाइनेंशियल प्लान में बदलाव करने के लिए भी सही समय होता है। दरअसल, आपकी टैक्स प्लानिंग और इनवेस्टमेंट प्लानिंग के बीच तालमेल होना चाहिए। आपको सिर्फ टैक्स बचाने के लिए टैक्स प्लानिंग नहीं करनी चाहिए। आपको इसे अपने इनवेस्टमेंट गोल का हिस्सा बनाना चाहिए।
नई या पुरानी इनकम टैक्स की रीजीम का इस्तेमाल
आपको अपने एंप्लॉयर को यह भी बताना होगा कि आप इनकम टैक्स की नई रीजीम का इस्तेमाल करना चाहते हैं या पुरानी का। यह जान लेना जरूरी है कि इस फाइनेंशियल ईयर से इनकम टैक्स की नई रीजीम डिफॉल्ट रीजीम बन गई है। फाइनेंशियल ईयर 2022-23 तक इनकम टैक्स की पुरानी रीजीम डिफॉल्ट रीजीम थी। इसका मतलब है कि अगर कोई एंप्लॉयी नॉन-डिफॉल्ट रीजीम को सेलेक्ट करना चाहता है तो उसे इस बारे में अपने एप्लॉयर को बताना होगा।
डिफॉल्ट रीजीम का नियम बदल चुका है
अगर एंप्लॉयी अपने एंप्लॉयर को नॉन-डिफॉल्ट रीजीम के सेलेक्शन के बारे में नहीं बताता है तो यह मान लिया जाएगा कि वह डिफॉल्ट रीजीम का इस्तेमाल करना चाहता है जो इस वित्त वर्ष से न्यू टैक्स रीजीम हो चुकी है। दरअसल, दोनों रीजीम में इनकम टैक्स के रेट एकसमान नहीं हैं, इसलिए एंप्लॉयर के लिए यह जानना जरूरी है कि एंप्लॉयी किस टैक्स रीजीम का इस्तेमाल करेगा।
आपके लिए कौन सी रीजीम सही है?
एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर कोई एंप्लॉयी टैक्स सेविंग्स कर रहा है, उसने होम लोन ले रखा है और हेल्थ पॉलिसी खरीदी है तो फिर उसके लिए इनकम टैक्स की ओल्ड रीजीम उसके लिए ठीक रहेगी। अगर कोई एंप्लॉयी किसी तरह की टैक्स सेविंग्स नहीं करता है। उसने लाइफ और हेल्थ पॉलिसी भी नहीं ली है और उसने होम लोन नहीं लिया है तो उसके लिए इनकम टैक्स की नई रीजीम सही है।
टैक्स सेविंग्स न सिर्फ आपको टैक्स बचाने में मदद करती है, बल्कि लंबी और मध्यम अवधि के वित्तीय लक्ष्य को पूरे करने में भी मदद करती है। खासकर, पीपीएफ और टैक्स फंड में किया गया निवेश लंबी अवधि में बहुत अच्छा रिटर्न देता है। अगर आप अपने बच्चों के एजुकेशन, शादी या अपने रिटायरमेंट बाद के खर्च का इंतजाम करना चाहते हैं तो आप पीपीएफ और टैक्स फंड में लंबी अवधि का निवेश कर सकते हैं।