Bullish on India : नौकरियों के मौकों के साथ ही कमाई बढ़ेगी, ICICI Pru के आनंद शाह ने क्यों कही यह बात

शाह ने कहा कि अक्टूबर 2021 में मार्केट के पीक पर पहुंचने के बाद से ही कंपनियों की कमाई में इम्प्रूवमेंट दिख रहा है। मार्केट ने उन कंपनियों को इनाम दिया है। मार्केट ने उन कंपनियों को इनाम दिया है, जिनकी कमाई में ग्रोथ देखने को मिली है, जिन्होंने अपनी वैल्यूएशंस सही लेवल पर बनाए रखी है और आखिर में जिनमें अर्निंग्स अपग्रेड देखने को मिले हैं।

अपडेटेड Aug 14, 2023 पर 5:57 PM
आनंद शाह ने कहा कि मार्केट्स ने नए हाई बनाए हैं, लेकिन वैल्यूएशंस नई ऊंचाई पर नहीं हैं। हालांकि, वैल्यूएशंस बहुत सस्ते नहीं हैं, लेकिन वे उस लेवल से कम हैं जब अक्टूबर 2021 में मार्केट ने पिछले हाई बनाए थे।

निवेशकों के मन में आजकल शेयर बाजार को लेकर कई सवाल चल रहे हैं। क्या Sensex और Nifty ऑल टाइम हाई के करीब टिके रहने में कामयाब होंगे? क्या यह बुल रन की शुरुआत है? क्या निवेशकों को मुनाफा वसूली करनी चाहिए? इन सवालों के बारे में ICICI Prudential Asset Management Company के प्रमुख आनंद शाह ने विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि यहां एक अहम बात यह है कि मार्केट्स ने नए हाई बनाए हैं, लेकिन वैल्यूएशंस नई ऊंचाई पर नहीं हैं। हालांकि, वैल्यूएशंस बहुत सस्ते नहीं हैं, लेकिन वे उस लेवल से कम है जब अक्टूबर 2021 में मार्केट ने पिछले हाई बनाए थे। उन्होंने कहा कि एक बात जो दिमाग में आती है वह यह है कि कंपनी की कमाई उत्साहजनक है।

शाह ने कहा कि अक्टूबर 2021 में मार्केट के पीक पर पहुंचने के बाद से ही कंपनियों की कमाई में इम्प्रूवमेंट दिख रहा है। मार्केट ने उन कंपनियों को इनाम दिया है। मार्केट ने उन कंपनियों को इनाम दिया है, जिनकी कमाई में ग्रोथ देखने को मिली है, जिन्होंने अपनी वैल्यूएशंस सही लेवल पर बनाए रखी है और आखिर में जिनमें अर्निंग्स अपग्रेड देखने को मिले हैं। आज इकोनॉमी की बुनियादी स्थितियां विदेश में कई तरह की प्रॉब्लम्स के बावजूद हमें उम्मीद जगाती हैं।

चाहें आप लार्जकैप, मिडकैप या स्मॉलकैप को देखें पिछले दो साल में अर्निंग्स ग्रोथ शानदार रही है। इसका असर आज निवेश के माहौल पर पड़ता दिख रहा है। पिछले 24 महीनों में कमाई करीब दोगुनी हो गई है, जबकि बाजार सिर्फ 15-20 फीसदी बढ़ा है। इसका मतलब है कि पिछले 24 महीनों में पीई मल्टीपल बेहतर हुआ है। इसलिए हम हेल्दी रैली कह सकते हैं। यह सिर्फ मार्केट में दिख रहे उत्साह का नतीजा नहीं है।


इससे भी बड़ी बात यह है कि अर्निग्ंस ग्रोथ का दायरा व्यापक रहा है। दूसरी इकोनॉमी के मुकाबले आज इंडियन इकोनॉमी मजबूत स्थिति में है। इसमें कुछ चीजों का हाथ है। कोरोना की महामारी के बाद ग्रॉस फिक्स्ड कैपिटल फॉर्मेशन (GFCF) बढ़ा है। जीएफसीएफ की ग्रोथ में सरकार के पूंजीगत खर्च का बड़ा हाथ रहा है। मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री में भी कंसॉलिडेशन देखने को मिला है। स्टील, सीमेंट और एविएशन इसके उदाहरण हैं। स्मॉल और मिडकैप स्पेस में एंसिलियरी बिजनेस से भी ग्रोथ को बढ़ावा मिल रहा है। दूसरी तरफ, हाउसिंग सेक्टर ने भी इकोनॉमी की ग्रोथ में बड़ी भूमिका निभाई है।

इनफ्लेशन में तेजी से कमी आती दिख रही है। फूड प्राइसेज में भी नरमी के संकेत हैं। करेंट अकाउंट डेफिसिट में कमी आई है, जिसमें क्रूड ऑयल की कीमतों में नरमी का हाथ है। आईटी सेक्टर को छोड़कर सर्विसेज सेक्टर के एक्सपोर्ट में भी उछाल दिखा है। इतनी पॉजिटिव बातों की वजह हमें कंजम्प्शन और पूंजीगत खर्च हाई बने रहने की उम्मीद है। इससे नौकरियों के मौके बढ़ेंगे और इनकम में इजाफा होगा।

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