ITR Filing Guide: अमूमन माना जाता है कि हाउस रेंट अलाउंस (HRA) पर टैक्स छूट का फायदा सिर्फ नौकरीपेशा लोगों को ही मिलता है, क्योंकि यह उनके सैलरी पैकेज का हिस्सा होता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि अगर आप सैलरीड नहीं हैं यानी आप एक सेल्फ-एंप्लॉयड प्रोफेशनल, फ्रीलांसर, बिजनेसमैन हैं या आपकी कंपनी आपको HRA नहीं देती है तो भी आप अपने घर के किराए पर टैक्स छूट का दावा कर सकते हैं?
आयकर अधिनियम की धारा 80GG और नए IT Act 2025 के तहत धारा 134 आपको यह खास सुविधा देती है। हालांकि, इस छूट का दावा करने के लिए आपको ओल्ड टैक्स रिजीम को चुनना होगा। आइए जानते हैं इसका पूरा गणित और जरूरी नियम।
Section 80GG के तहत टैक्स छूट के लिए जरूरी शर्तें
इस धारा के तहत किराए पर डिडक्शन का दावा वही लोग कर सकते हैं जो नीचे दी गई सभी शर्तों को पूरा करते हों:
HRA छूट और सेक्शन 80GG में क्या अंतर है?
डेलॉयट इंडिया के पार्टनर सुधाकर सेथुरमन के मुताबिक, इन दोनों नियमों में सबसे बड़ा अंतर मौद्रिक सीमा का है:
सैलरीड HRA छूट: यह आपकी सैलरी, चुकाए गए वास्तविक किराए और आपके शहर (मेट्रो या नॉन-मेट्रो) पर निर्भर करती है और इसमें छूट की कोई निश्चित ऊपरी सीमा नहीं होती है।
धारा 80GG छूट: इसमें एक तय सीमा होती है। भले ही आपका वास्तविक किराया कितना भी ज्यादा क्यों न हो, धारा 80GG के तहत आपको अधिकतम ₹60000 प्रति वर्ष या ₹5000 प्रति महीना की ही टैक्स छूट मिल सकती है।
छूट का कैलकुलेशन कैसे होता है?
आयकर विभाग नीचे दिए गए तीन फॉर्मूलों के आधार पर कैलकुलेशन करता है और इसमें से जो सबसे कम राशि होती है, उसे डिडक्शन के रूप में मंजूर किया जाता है:
क्लेम करने के लिए कौन से दस्तावेज हैं जरूरी?
टैक्स विभाग की स्क्रूटनी से बचने के लिए आपके पास पुख्ता सबूत होने चाहिए:
टैक्सपेयर्स अक्सर क्या गलतियां करते हैं?
फॉर्म 10BA न भरना: कई लोग इस फॉर्म को भरना भूल जाते हैं या देरी कर देते हैं, जिससे उनका क्लेम रिजेक्ट हो जाता है।
पूरा किराया क्लेम करना: कुछ लोग कैलकुलेशन किए बिना ही चुकाया गया पूरा रेंट क्लेम कर देते हैं, जबकि नियम अधिकतम ₹60000 का ही है।
कैश पेमेंट: बिना किसी रसीद या दस्तावेज के कैश में बड़ा रेंट चुकाने पर टैक्स डिपार्टमेंट का नोटिस आ सकता है।