ITR Filing 2026: बिना सैलरी वाले लोग भी पा सकते हैं किराए पर टैक्स छूट! जानें सेक्शन 80GG का नियम और पूरा कैलकुलेशन

Non Salaried HRA Claim: IT Act के तहत वो भी लोग किराए पर टैक्स छूट ले सकते हैं जो जॉब नहीं करते है। इस छूट में एक तय सीमा होती है। भले ही आपका वास्तविक किराया कितना भी ज्यादा क्यों न हो, धारा 80GG के तहत आपको एक लिमिटेड अमाउंट की ही टैक्स छूट मिल सकती है

अपडेटेड Jun 02, 2026 पर 8:13 PM
किराए पर HRA डिडक्शन का दावा वही लोग कर सकते हैं जो IT Act की शर्तों को पूरा करते हों

ITR Filing Guide: अमूमन माना जाता है कि हाउस रेंट अलाउंस (HRA) पर टैक्स छूट का फायदा सिर्फ नौकरीपेशा लोगों को ही मिलता है, क्योंकि यह उनके सैलरी पैकेज का हिस्सा होता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि अगर आप सैलरीड नहीं हैं यानी आप एक सेल्फ-एंप्लॉयड प्रोफेशनल, फ्रीलांसर, बिजनेसमैन हैं या आपकी कंपनी आपको HRA नहीं देती है तो भी आप अपने घर के किराए पर टैक्स छूट का दावा कर सकते हैं?

आयकर अधिनियम की धारा 80GG और नए IT Act 2025 के तहत धारा 134 आपको यह खास सुविधा देती है। हालांकि, इस छूट का दावा करने के लिए आपको ओल्ड टैक्स रिजीम को चुनना होगा। आइए जानते हैं इसका पूरा गणित और जरूरी नियम।

Section 80GG के तहत टैक्स छूट के लिए जरूरी शर्तें


इस धारा के तहत किराए पर डिडक्शन का दावा वही लोग कर सकते हैं जो नीचे दी गई सभी शर्तों को पूरा करते हों:

  • टैक्सपेयर को अपनी नौकरी या बिजनेस से किसी भी तरह का HRA न मिला हो।
  • वह रहने के लिए आवासीय संपत्ति का किराया चुका रहा हो।
  • उस शहर में जहां टैक्सपेयर रहता है या काम करता है, वहां उसके नाम पर, उसकी पत्नी/पति, नाबालिग बच्चे या HUF (हिंदू अविभाजित परिवार) के नाम पर कोई अपना मकान नहीं होना चाहिए।
  • आईटीआर दाखिल करते समय या उससे पहले फॉर्म 10BA भरना अनिवार्य है।

HRA छूट और सेक्शन 80GG में क्या अंतर है?

डेलॉयट इंडिया के पार्टनर सुधाकर सेथुरमन के मुताबिक, इन दोनों नियमों में सबसे बड़ा अंतर मौद्रिक सीमा का है:

सैलरीड HRA छूट: यह आपकी सैलरी, चुकाए गए वास्तविक किराए और आपके शहर (मेट्रो या नॉन-मेट्रो) पर निर्भर करती है और इसमें छूट की कोई निश्चित ऊपरी सीमा नहीं होती है।

धारा 80GG छूट: इसमें एक तय सीमा होती है। भले ही आपका वास्तविक किराया कितना भी ज्यादा क्यों न हो, धारा 80GG के तहत आपको अधिकतम ₹60000 प्रति वर्ष या ₹5000 प्रति महीना की ही टैक्स छूट मिल सकती है।

छूट का कैलकुलेशन कैसे होता है?

आयकर विभाग नीचे दिए गए तीन फॉर्मूलों के आधार पर कैलकुलेशन करता है और इसमें से जो सबसे कम राशि होती है, उसे डिडक्शन के रूप में मंजूर किया जाता है:

  1. ₹5000 प्रति महीना या ₹60000 प्रति वर्ष।
  2. टैक्सपेयर की कुल 'Adjusted Income' का 25 प्रतिशत।
  3. सालाना चुकाया गया वास्तविक किराया घटाकर कुल इनकम का 10 प्रतिशत।

क्लेम करने के लिए कौन से दस्तावेज हैं जरूरी?

टैक्स विभाग की स्क्रूटनी से बचने के लिए आपके पास पुख्ता सबूत होने चाहिए:

  • रेंट एग्रीमेंट या लीज डीड।
  • मकान मालिक से मिली किराए की रसीदें।
  • बैंक ट्रांसफर, चेक या डिजिटल पेमेंट का भुगतान प्रमाण।
  • अगर आपका सालाना किराया ₹1 लाख से अधिक है, तो मकान मालिक का पैन होना अनिवार्य है।
  • फॉर्म 10BA ऑनलाइन सबमिट करना। इसमें यह घोषणा होती है कि आप सभी शर्तों को पूरा करते हैं। इसे ITR फाइल करने के साथ या उससे पहले ऑनलाइन भरना जरूरी है।

टैक्सपेयर्स अक्सर क्या गलतियां करते हैं?

फॉर्म 10BA न भरना: कई लोग इस फॉर्म को भरना भूल जाते हैं या देरी कर देते हैं, जिससे उनका क्लेम रिजेक्ट हो जाता है।

पूरा किराया क्लेम करना: कुछ लोग कैलकुलेशन किए बिना ही चुकाया गया पूरा रेंट क्लेम कर देते हैं, जबकि नियम अधिकतम ₹60000 का ही है।

कैश पेमेंट: बिना किसी रसीद या दस्तावेज के कैश में बड़ा रेंट चुकाने पर टैक्स डिपार्टमेंट का नोटिस आ सकता है।

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